किसानों को ऐसे लालच देकर बढ़वाते थे प्याज के भाव

कृषि उपज मंडी में अनअधिकृत लोग करते हैं यह करतूत

शाजापुर में गत दिवस कृषि उपज मंडी में हुआ था विवाद, बाहरी लोगों पर लगाम की मांग,
अनुज्ञप्तिधारी व्यापारियों के सौदों को करवाते हैं निरस्त

शाजापुर. कृषि उपज मंडी में वैसे तो नियमानुसार केवल अनुज्ञप्तिधारी व्यापारी ही किसानों से उनका माल खरीद सकते हैं, लेकिन पिछले कुछ समय से कृषि उपज मंडी में आए दिन बाहरी लोग प्रवेश करके सौदा कर चुके किसानों को बरगलाते हुए सौदा निरस्त करने की बात कहते हैं। अपनी बेची हुई उपज को कुछ रुपए ज्यादा में बेचने का लालच देकर ये लोग किसान को मंडी से बाहर ले जाकर अन्य लोगों के पास माल की बिक्री करवा देते हैं। इसी तरह का एक मामला बुधवार को सामने आने पर कृषि उपज मंडी में हंगामा हो गया था। व्यापारियों का कहना है कि ऐसे लोगों पर लगाम लगाना जरूरी है, ताकि दोबारा इस तरह की स्थिति नहीं बनें।
कृषि उपज मंडी में किसानों से उनकी उपज को खरीदने के लिए व्यापारी बकायदा लाइसेंस लेते हैं। इस लाइसेंस के बाद मंडी में जो किसान उपज लेकर आता हैं, उससे उपज खरीदने के बाद संबंधित व्यापारी मंडी प्रबंधन को कर का भुगतान करता है। इससे कृषि उपज मंडी को भी आय होती है। इस आय के बदले कृषि उपज मंडी किसान और व्यापारी के बीच मध्यस्थता का कार्य करती है, जिससे किसानों को उनकी उपज का भुगतान हो सकें, वहीं व्यापारी को भी किसान से उपज खरीदने में कोई परेशानी न हो। प्रत्येक किसान से सौदा करने के बाद उसकी जानकारी मंडी प्रबंधन को देकर नियमानुसार इंट्री करवाने के बाद उसके कर का भुगतान व्यापारी द्वारा किया जाता है। वैसे तो किसानों को इस बात की आजादी रहती है कि वो अपनी मर्जी से व्यापारी से किए सौदे को निरस्त कर सकें, लेकिन ऐसा करने पर व्यापारी को तो नुकसान उठाना पड़ता है।
मंडी प्रबंधन के पास भी स्टॉक की जानकारी में गड़बड़ी हो जाती है। गत दिवस एक व्यक्ति ने मंडी में एक किसान को बरगलाते हुए सौदा निरस्त करावाने का प्रयास किया था। इसी बात को लेकर मंडी में हंगामा हो गया था। इसके बाद पुलिस हंगामा करने वाले को अपने साथ पकड़कर ले गई थी। जानकारी के अनुसार शाम के समय फिर से हंगामा करने वाला व्यक्ति अपने साथ किसान संघ के कुछ लोगों को लेकर पहुंचा था। हालांकि इस दौरान किसी ने उस पर ध्यान नहीं दिया। जिससे वो चिल्लाने के बाद चला गया था। गुरुवार को मंडी में कार्य सुचारू रूप से चलता रहा।
किसानों को दिया जाता है रुपए का लालच
जानकारी के अनुसार कृषि उपज मंडी में व्यापारी बोली लगाकर किसान की उपज का सौदा करते हैं उसे बाहरी लोग किसी को भेजकर व्यापारी से ज्यादा राशि देने का लालच देते हैं। ऐसे में कुछ किसान इनकी बात में आकर अपना सौदा करते है ंऔर मंडी से बाहर आकर दूसरे लोगों को अपनी उपज बेच देते है। हालांकि इस प्रक्रिया में किसानों को भुगतान का जोखिम भी रहता है। क्योंकि मंडी के अंदर यदि कोई व्यापारी भुगतान में गड़बड़ी करता है तो किसान उसकी शिकायत मंडी प्रबंधन को कर सकता है, लेकिन बाहर उपज बेचने पर यदि रुपए की गड़बड़ी होती है तो इसके लिए मंडी प्रबंधन की कोई जिम्मेदारी नहीं रहती है। जिससे कई बार किसानों को नुकसान भी उठाना पड़ता है।
दाम बढ़े तो कमा सकेंगे मुनाफा
मंडी व्यापारियों की मानें तो बाहरी लोग जो मंडी के लायसेंसी व्यापारी नहीं हैं, वे किसानों से उनकी उपज को खरीदने के लिए प्रयासरत रहतें हैं। इसके चलते वे अपने किसी परिचत को मंडी में भेजकर किसानों से सौदा निरस्त करवाते हैं और किसान से उसकी उपज खरीदते हैं। व्यापारियों की मानें तो इस वर्ष बारिश के कारण सोयाबीन की फसल को नुकसान हुआ है। ऐसे में बाहरी लोगों को संभावना है कि आगामी दिनों में सोयाबीन के दाम बढ़ सकते हैं। इस कारण से वे लोग प्याज व सोयाबीन का स्टॉक करके रखने का प्रयास कर रहे हैं, जिससे दाम बढऩे के बाद वे स्वयं इसे बेचकर मुनाफा कमा सकें। ऐसे लोगों पर लगाम लगाने के लिए गत दिवस मंडी के व्यापारियों ने एक ज्ञापन भी मंडी प्रबंधन को सौंपा था। मंडी प्रबंधन ने हंगामा करने वाले के खिलाफ कार्रवाई की बात कही है।

rajesh jarwal
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