गुजर गया नीरज की यादों का कारवां....रह गया उनके गीतों का गुबार...

प्रख्यात गीतकार व कवि गोपालदास नीरज अब नहीं रहे, लेकिन उनके गीत लोगों के जेहन में अब भी गुनगुनाते हैं।

By: Lalit Saxena

Published: 20 Jul 2018, 05:54 PM IST

उज्जैन. प्रख्यात गीतकार व कवि गोपालदास नीरज अब नहीं रहे, लेकिन उनके गीत लोगों के जेहन में अब भी गुनगुनाते हैं। 91 की उम्र में भी उनकी याददाश्त काबिले तारिफ थे। नीरजजी के साथ शहर के साहित्यकार और कवियों ने भी मंच साझा किया है। वे बताते हैं कि उम्र के चलते नीरजजी की जुबान लडख़ड़ाती थी बावजूद आयोजक उन्हें महज इसलिए भी बुलाते थे कि नई पीढ़ी उन्हें भले सुन न सके लेकिन देख तो सके। नीरजजी का पिछले सालों में शहर में तो नहीं आए लेकिन माधव कॉलेज के शताब्दी समारोह में आयोजित कवि सम्मेलन में शिरकत की थी और उस समय पूरी महफिल लूट ली थी। करीब 10 वर्ष पूर्व नीरजजी टेपा सम्मेलन में शामिल हुए थे। उनके निधन पर शहर के साहित्यकार व गीतकारों ने श्रद्धासुमन अर्पित किए हैं।

यह बोले कवि- गीतकार

नीरजजी एक मात्र ऐसे रचनाकार थे, जिन्होंने फिल्म इंडस्ट्री में अपनी कविताओं के माध्यम उच्च मुकाम पाया। वर्ष 2016 में ही बैंगलुरु में जोधपुर जैन एसोसिएशन के कवि सम्मेलन में उन्हें आमंत्रित किया गया था। 91 वर्ष की उम्र में जबान लडख़ड़ाने के जानकारी के बाद भी आयोजकों ने यह कहकर बुलाया कि नई पीढ़ी उन्हें देख तो सकेगी। हालांकि नीरजजी ने कविता भी सुनाई। टेपा सम्मेलन में नीरजजी को देखकर एक्टर रजामुराद ने उनके न केवल गीत गाए बल्की चरण भी छूए थे। उनका जाना एक बड़ी क्षति है।
- अशोक भाटी, कवि

हिंदी जगत के एक सूर्य को हमने खो दिया। साहित्य को कविता के माध्यम से आम आदमी तक पहुंचाने वाले गोपालदास नीरजजी एकमात्र गीतकार हैं। उनके शृंगार गीत के सभी मुरीद हैं। वे इतने सरल थे कि उज्जैन में आयोजित एक कवि सम्मेलन में आए तो उन्हें बीएसएनएल के हिंदी पखवाड़े में भी आमंत्रित किया। वे कवि ओम व्यास ओम के साथ न केलव आए बल्कि रचनापाठ भी किया। नीरजजी के निधन से साहित्य जगत में जो जगह खाली हुई है उसकी पूर्ति नहीं हो सकती है।
- प्रेम पथिक, गीतकार

नीरजजी का जाना साहित्य जगत के लिए बड़ी क्षति है। उनकी कविता जितनी मधुर थी उतने ही वे सहज थे। मुझे याद है शुजालपुर के एक टॉकिज में नीरज निशा का आयोजन किया था। मंच के संचालन की जिम्मेदारी मेरे पास थी। मैं थोड़ा घबरा रहा था। मैंने नीरजजी से कहा नया नवेला हूं... इस पर वे कंधे पर हाथ रखकर मुझे हौसला देते हुए बोले- निरंतर चिंता मत करो, जहां तुम बोलना बंद कर दोगे मैं गीत गाना शुरू कर दूंगा। उनकी इस बात ने मेरी चिंता खत्म कर दी थी। - राजेंद्र नागर निरंतर, लघुकथाकार

क्या रखा है आलमगीरी में ..जो मजा है फकीरी में, जैसे गीत रचने वाले नीरज जी के चाहने वाले लाखों में थे। जिस महफिल में वे होते थे वहां उनके सिवाय कुछ नहीं रहता। हमें इस बात का फख्र है कि हम उस पीढ़ी के प्रतिनिधि हैं, जिन्हें नीरजजी को प्रत्यक्ष देखने और भरपूर सुनने को मिला। उन्हें विनम्र आदराजंलि।
- मुकेश जोशी, साहित्यकार

Lalit Saxena
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