पत्रिका एक्सपोज: आंसर शीट पर नाम, शिक्षक कर रहे मूल्यांकन

विक्रम विश्वविद्यालय की गोपनीयता, विश्वनीयता पर सवाल

शैलेष व्यास, उज्जैन. विक्रम विश्वविद्यालय में पीएचडी, एमफिल प्रवेश परीक्षा की विसंगति और नियम-दावे के उल्लंघन ने विश्वविद्यालय की गोपनीयता, विश्वनीयता पर सवाल खड़ा कर दिया है। प्रवेश परीक्षा में विद्यार्थियों के नाम दर्ज कराए गए और ओएमआर शीट का मूल्यांकन शिक्षकों के हाथों से कराया गया है, दरअसल विवि के पास ओएमआर शीट का मूल्याकंन की मशीन और सॉफ्टवेयर ही नहीं है।
शिक्षा या अन्य क्षेत्र की परीक्षा में उत्तर पुस्तिका और शीट्स पर परीक्षार्थी का नाम या कोई पहचान चिह्न वर्जित है। नियम भी यही कहते हैं कि आंसर शीट पर किसी भी स्थिति में छात्र-छात्रा का नाम या कोई पहचान का विशेष चिह्न नहीं होना चाहिए। इसके बाद भी विक्रम विश्वविद्यालय में रविवार को आयोजित पीएचडी, एमफिल प्रवेश परीक्षा में ओएमआर शीट पर छात्र-छात्राओं से उनके नाम लिखवाए गए। बकायदा शीट पर नाम लिखने का कॉलम भी रखा गया। पीएचडी के लिए 501 और एमफिल के लिए 40 शामिल हुए थे। सभी से आंसर शीट पर नाम लिखवा दिए।
इसलिए भी शंका
विश्वविद्यालय की गोपनीयता, विश्वनीयता पर शंका का एक बड़ा कारण यह भी है कि पीएचडी के लिए अनेक विषय में रिक्त स्थान की तुलना में कई गुना अधिक आवेदन मिले हैं। खास विषय पर गौर करें तो पीएचडी के लिए केमेस्ट्री में 19 रिक्त स्थान के लिए 52, कॉमर्स में 14 रिक्त स्थान के लिए 82, अर्थशास्त्र में 04 रिक्त स्थान के लिए 43, हिंदी में 04 रिक्त स्थान के लिए 48, लाइब्रेरी साइंस में 07 रिक्त स्थान के लिए 68, जूलॉजी में 03 रिक्त स्थान के लिए 28 आवेदन मिले थे। इस स्थिति में परीक्षा में गोपनीयता बनाएं रखना आवश्यक हो जाता हैं। इसके बाद भी विद्यार्थियों के नाम आंसर शीट होने से मूल्यांकन में पक्षपात की शंका को जन्म दे रही है।
ओएमआर शीट का मूल्यांकन हाथों से
प्रमुख प्रतियोगी और प्रवेश परीक्षा में ओएमआर शीट उपयोग करने के साथ ही इसका मूल्यांकन भी मशीन या विशेष सॉफ्टवेयर से किया जाता है ताकि विद्यार्थियों को अधिक नहीं लिखना पड़े, मूल्यांकन भी सही तरीके से पारदर्शिता के साथ बगैर पक्षपात के हो। विवि के पास न ओएमआर शीट के मूल्याकंन के लिए मशीन है और न ही सॉफ्टवेयर की उपलब्धता। रविवार को आयोजित पीएचडी, एमफिल प्रवेश परीक्षा ओएमआर शीट जांच और मूल्यांकन मशीन की बजाए शिक्षकों द्वारा हाथों से मैन्यूअल किया गया। विवि प्रशासन के पास ओएमआर शीट जांचने के लिए मशीन भी उपलब्ध नहीं है। जानकारों का कहना है कि ओएमआर शीट में गोपनीय कोड होता है, जिसे मशीन से जांचने पर पूरी जानकारी सामने आ जाती है। मशीन की बजाए शीट को जांचने का कार्य शिक्षकों के माध्यम से ही किया गया।

कोई पूर्वाग्रह-पक्षपात नहीं
प्रवेश परीक्षा के मुख्य समन्वयक और विक्रम विश्वविद्यालय के कुलानुशासक शैलेंद्र कुमार शर्मा के अनुसार परीक्षा में पक्षपात और पूर्वाग्रह से कार्य की कोई संभावना दूर-दूर तक नहीं है। मूल्यांकन विवि द्वार गठित कमेटी द्वारा रोल नंबर के आधार पर किया गया है। देर रात को प्रवेश परीक्षा के परिणाम घोषित कर विवि की वेबसाइट पर अपलोड कर दिए हैं। आंसर शीट पर नाम क्यों लिखवाए गए और मूल्यांकन शिक्षकों के हाथों से क्यो किया गया। इसका शर्मा के पास कोई जवाब नहीं था। उन्होंने केवल इतना कहा कि परीक्षा परदर्शिता के साथ हुई और मूल्यांकन निष्पक्षता के साथ किया गया है।

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anil mukati
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