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Patrika Spot Light : मप्र में हरियाली को निगल गया यह नेशनल हाइवे

141 किमी लंबे ब्यावरा-देवास फोरलेन निर्माण में काटे थे 13 हजार 849 पेड़, दोगुनी से ज्यादा संख्या में लगाने थे पौधे, हाइवे शुरू हुए हो गए तीन साल से ज्यादा, लेकिन कहीं नहीं लगाए पौधे, औपचारिता निभाने कुछ जगह लगा दिए थे सजावटी पौधे, अब उनका भी नामोनिशान नहीं, तपती दोपहर में मुसाफिरों को कहीं नहीं मिलती पेड़ों का छाया, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने 1609 करोड़ रुपए की लागत से बनाया है ब्यावरा-देवास फोरलेन

उज्जैन

Published: May 27, 2022 07:29:20 pm

अनिल मुकाती
उज्जैन. राष्ट्रीय राजमार्ग क्रमांक ५२ पर ब्यावरा से देवास तक फोरलेन निर्माण में 13 हजार 849 पेड़ों की बलि ले ली गई, इसके बदले दोगुने से ज्यादा पौधे लगाना थे, लेकिन हाइवे शुरू हुए तीन साल हो गए, लेकिन इस 141 लंबे सडक़ मार्ग पर कहीं भी पेड़ नजर नहीं आ रहे। तपती दोपहर में मुसाफिरों को छाया तक नसीब नहीं हो रही।

Patrika Spot Light : मप्र में हरियाली को निगल गया यह नेशनल हाइवे
141 किमी लंबे ब्यावरा-देवास फोरलेन निर्माण में काटे थे 13 हजार 849 पेड़, दोगुनी से ज्यादा संख्या में लगाने थे पौधे, लेकिन पूरे मार्ग पर कहीं भी पौधे या पेड़ नजर नहीं आ रहे हैं।

भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण की ओर से नेशनल हाइवे क्रमांक 52 (आगरा-बॉम्बे रोड) पर शिवपुरी से देवास तक साढ़े तीन हजार करोड़ रुपए की लागत से 332.46 किमी फोरलेन का निर्माण किया है। यह कार्य तीन हिस्सों में बांटकर अलग-अलग कंपनियों के माध्यम से करवाया गया है। इसमें ब्यावरा से लेकर देवास तक 141 किमी लंबा फोरलेन ओरिएंटल इंफ्रास्ट्रचर प्राइवेट लिमिटेड ने 1609.48 करोड़ रुपए में बनाया है। प्रोजक्ट के इस हिस्से में राजगढ़, शाजापुर, उज्जैन व देवास जिले लगते हैं। साल 2016 के अंत में फोरलेन निर्माण शुुरू हुआ था। इस दौरान मार्ग में बाधक बन रहे हरे-भरे और बरसों पुराने पेड़ों को काट दिया। इन पेड़ों की संख्या भी 13 हजार 849 है। यह संख्या चिंह्नित पेड़ों की है। टेंडर शर्तों के मुताबिक सडक़ निर्माता कंपनी को काटे गए पेड़ों की तुलना में दोगुने से ज्यादा पौधे मार्ग के आसपास और डिवाइडर पर लगाना थे, लेकिन सडक़ निर्माण हुए तीन साल से ज्यादा समय बीत गया, यहां पौधे नहीं लगाए गए। ऐसे में सीमेंट कांक्रीट से बने 141 किमी लंबे इस रोड पर हरियाली का नामोनिशान तक नहीं बचा है। भीषण गर्मी के बीच इस सडक़ का सफर राहगीरों को रेगिस्तान का अहसास करवा रहा है।

ग्रामीणों ने किया था विरोध

शाजापुर से देवास के बीच के ग्रामीणों ने पेड़ कटाई के दौरान इसका विरोध भी किया था, लेकिन उनकी किसी ने नहीं सुनी। ग्राम बरखेड़ा के कमल पटेल, ग्राम आलरी के मोनू भंडारी, ग्राम पाडल्या के मांगीलाल चौधरी ने बताया कि रोड बनाने वाली कंपनी ने मनमानी की है। सडक़ किनारे हरे-भरे हजारों पेड़ काट दिए, लेकिन उसके बदले में कहीं भी पौधे नहीं लगाए गए हैं।

इन प्रजाति के पेड़ थे पूरे मार्ग पर

एबी रोड पर आम, जामुन, नीम, इमली, पीपल, बरगद, नीलगिरी, कनेर, शीशम, कचनार, बबूल, गुलमोहर, बिल्व सहित अन्य छायादार और फलदार पेड़ थे, जो हाइवे के निर्माण ने निगल लिए हैं।

शुरुआत में कुछ स्थानों पर लगाए पौधे

फोरलेन शुरू होने के समय शहरी क्षेत्रों के आसपास सडक़ किनारे कुछ स्थानों पर पौधे लगाए थे और डिवाइडर पर हरी घास रोपी गई थी, लेकिन देखरेख के अभाव में ये पनप ही नहीं पाए और बढऩे से पहले ही दम तोड़ गए।

ये हैं जिम्मेदारों के जवाब

मेरा ट्रांसफर हो गया है, मुझे जानकारी नहीं है- तत्कालीन प्रोजेक्ट डायरेक्टर

पत्रिका ने फोरलेन निर्माण के दौरान एनएचएआई के प्रोजेक्ट डायरेक्टर रहे आरआर दांडे (वर्तमान में छिंदवाड़ा में पदस्थ) से सवाल किया कि रोड निर्माण के दौरान जो पेड़ काटे गए, उनके बदले में दोगुने पेड़ लगाना थे, लेकिन अभी तक पौधे क्यों नहीं लगाए तो वे बोले कि इस मामले में मुझे कुछ नहीं पता, मेरा तबादला छिंदवाड़ा हो चुका है। पूरी जानकारी आपको इंदौर कार्यालय से ही मिलेगी। पत्रिका ने पूछा कि आपके कार्यकाल के दौरान पौधे क्यों नहीं लगे तो इस सवाल का जवाब दिए बगैर ही दांडे ने फोन काट दिया।

मैं अभी मीटिंग में हूं, बाद में बात करेंगे-वर्तमान प्रोजेक्ट डायरेक्टर

एनएचएआई (इंदौर) के वर्तमान प्रोजेक्ट डायरेक्टर मनीष असाटी ने पत्रिका के सवाल पर सिर्फ इतना कहा कि मैं अभी मीटिंग में व्यस्त हूं, इस बारे में आपसे बात नहीं कर सकता। बाद में मैं आपको कॉल करता हूं।

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