video : सिमी सदस्य को साबरमती जेल से उज्जैन क्यों लाई पुलिस

video : सिमी सदस्य को साबरमती जेल से उज्जैन क्यों लाई पुलिस

Lalit Saxena | Publish: Sep, 07 2018 08:17:18 PM (IST) | Updated: Sep, 07 2018 08:20:01 PM (IST) Ujjain, Madhya Pradesh, India

धार्मिक भावना भड़काने वाले दो सिमी सदस्यों को 3-3 साल की सजा, दो दोषमुक्त

उज्जैन। धार्मिक भावना भड़काने वाले दो सिमी सदस्यों को शुक्रवार दोपहर न्यायालय ने 3-3 साल के कठोर कारावास और 5 हजार रुपए के अर्थदण्ड से दण्डित किया है। सजा के दौरान न्यायाधीश ने कहा कि भारत में गंगा-जमनी तहजीब है, जहां सभी धर्मों के लोग एक साथ रहते हैं। यहां सभी धर्म के व्यक्तियों को धर्म की स्वतंत्रता दी गई है। किन्तु किसी भी व्यक्ति को दूसरे व्यक्ति के धर्म में हस्तक्षेप करने का अधिकार नहीं है। ऐसे व्यक्ति देश में घुन के रूप में संस्कृति को खत्म कर रहे हैं, इनके लिए कानून दवाई के रूप में कार्य करता है।

न्यायाधीश विवेक जैन ने आरोपी मोहम्मद शफी पिता अब्दुलबारी अंसारी निवासी फाजलपुरा को 3 साल की सजा 5 हजार रुपए अर्थदण्ड व मोहम्मद अकील कुरैशी पिता मो. रफीक कुरैशी निवासी मदारगेट को 3 वर्ष कारावास सहित 2 हजार रुपए के अर्थदण्ड से दण्डित किया है। इनके सह आरोपी मो. नईम व मो. इमरान अंसारी को दोषमुक्त किया है। शुक्रवार को उज्जैन पैशी के लिए गुजरात की साबरमती जेल में बंद आरोपी मो. शफी को उज्जैन लाया गया था। जिसे सजा सुनाने के बाद फिर से गुजरात भेजा है।

25 जुलाई 2006 में हुआ मामला दर्ज
डॉ. साकेत व्यास ने बताया कि सिमी कार्यकर्ता इमरान अंसारी को खण्डवा पुलिस ने गिरफ्तार किया था। जिससे पूछताछ में उसने उज्जैन के मोहम्मद अकील कुरैशी को सिमी संगठन का कार्यकर्ता बताया। इस पर आरोपी मोहम्मद अकील की गतिविधियों पर नजर रख सिमी कार्यकर्ता मोहम्मद शफी के साथ धार्मिक भावना भड़काने वाले साहित्य के साथ मो. अकील को गिरफ्तार किया था। जबकि मोहम्मद शफी उस वक्त भाग निकला था। अकील के घर की तलाशी में पुलिस को आपत्तिजनक दस्तावेज और साहित्य सहित सीडी मिली थी। जिस पर सिमी लिखा हुआ था। इस पर अकील के खिलाफ खाराकुआं थाना में धारा 153 के तहत प्रकरण दर्ज किया। अकील ने संगठन की ओर से जुटाए चंदे को साथी इमरान अंसारी को देना बताया। अकील ने ही इमरान अंसारी को टाटा इंडिकाम का मोबाइल व कनेक्शन रईस खान नामक व्यक्ति के साथ धोखाधड़ी कर दिलवाई गई थी। अभियुक्त मोहम्मद नईम व इमरान ने सिमी साहित्य छापने का काम किया था। एेसे में दोनों को आरोपी बनाकर वर्ष 2009 में गिरफ्तार किया था। शासन की ओर से कमलेश श्रीवास ने पैरवी की।

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