महाकाल सहित सभी मंदिरों में पूजन विधि पर बयानबाजी रोकने के लिए कुछ यह कहा पुजारी ने

Gopal Bajpai

Publish: Nov, 14 2017 01:17:38 (IST)

Ujjain, Madhya Pradesh, India
महाकाल सहित सभी मंदिरों में पूजन विधि पर बयानबाजी रोकने के लिए कुछ यह कहा पुजारी ने

प्राचीन मंदिरों की परंपरा और पूजन विधान-विधि को लेकर आए दिन होने वाली बयानबाजी को रोकने के लिए पूजन विधान को लिपिबद्ध किया जाए।

उज्जैन. महाकाल मंदिर सहित उज्जैन के सभी प्राचीन मंदिरों-देवालयों की परंपरा और पूजन विधान-विधि को लेकर आए दिन होने वाली बयानबाजी को रोकने के लिए मंदिरों के पूजन विधान को लिपिबद्ध किया जाए। अखिल भारतीय पुजारी महासंघ के संस्थापक महेश पुजारी ने उक्त मांग करते हुए कहा कि महाकाल की नगरी में मंदिरों की परंपराओं को लेकर अनर्गल बहसबाजी होती है, जो सनातन धर्म के लिए उचित नहीं है।

मंदिरों में पूजन, विधि-विधान प्राचीन परंपराएं शास्त्र आधारित होती है, इसलिए उसका पालन किया जाता है। कुछ व्यवस्थाओं को पवित्रता का ध्यान में रखकर बनाया जाता है। यह व्यवस्था लौकिक होती है। परंपराएं शास्त्र के मुताबिक है, उसे पुजारी, प्रशासन या अन्य किसी को बदलने का अधिकार नहीं है। वर्तमान में यह आवश्यक हो गया है कि मंदिरों की परंपराओं को शास्त्र संवत लिपिबद्ध किया जाए।

कुंड का पानी निकाला और शुरू की सफाई
उज्जैन. महाकाल के कोटि तीर्थ कुंड के जल को स्वच्छ करने के लिए एक बार फिर से प्रयास शुरू किए गए हैं। फिलहाल कोटितीर्थ कुंड को जल निकालकर सफाई की जा रही है। कुंड के बंद पड़े फिल्टर प्लांट को चालू करने के लिए विशेषज्ञों की सलाह ली जा रही है।

दक्षिणमुखी महाकालेश्वर मंदिर परिसर स्थित कोटि तीर्थ कुंड के जल को साफ रखने की कवायद शुरू हुई है। इसके लिए मंदिर समिति की ओर से पानी निकालकर कुंड की सफाई की जा रही है तो फिल्टर प्लांट को चालू किए जाने की दिशा में भी कार्य चल रहा है। महाकाल शिवलिंग शरण को लेकर सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर गठित आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया, जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया की टीम ने विभिन्न स्थिति के साथ ही कोटि तीर्थ कुंड का परीक्षण किया था। जांच में जल खराब होने के साथ कुछ ऐसे तत्व पाए गए थे, जो शिवलिंग के लिए हानिकारक माना था। सुप्रीम कोर्ट में मंदिर समिति की ओर से कोर्ट में दिए गए प्रस्तावों में बताया गया है कि भगवान को अर्पित होने वाले जल की शुद्धता के लिए समय-समय का नियमानुसार कार्य होता है। फिलहाल आरओ वॉटर से जलाभिषेक किया जा रहा है। समिति ने कोटि तीर्थ कुड जल को प्यूरीफिकेशन के लिए प्लान्ट स्थापित करने का निर्णय लिया है।

प्रस्ताव पर फिलहाल कोई निर्णय नहीं
कोटि तीर्थ कुंड के जल शुद्ध करने के लिए महाकाल मंदिर समिति की ओर से वाटर प्यूरीफिकेशन के लिए प्लांट स्थापित करने के प्रस्ताव मांगे थे। इसमें अनेक कंपनियों ने पानी को शुद्ध करने के अपने प्रोजेक्ट समिति को दिए हैं। इसमें सिंगापुर की कंपनी का प्रस्ताव भी है। इन प्रस्तावों पर फिलहाल कोई निर्णय नहीं हुआ है।

फिल्टर प्लांट को चालू करने की कवायद
कोटि तीर्थ कुंड के पानी को साफ रखने के लिए २०१४ जेएनएनयूआरएम के तहत करीब ३२ लाख रुपए की लागत से फिल्टर प्लांट लगाया गया था। संचालन का प्रतिमाह खर्च ५० हजार से एक लाख रुपए है। संचालन-संधारण के अभाव में प्लांट बंद हो गया। कुछ समय नगर निगम ने इसका संचालन किया, लेकिन मंदिर समिति को हस्तांतरित नहीं किया और संचालन से हाथ भी खींच लिए। नतीजतन फिल्टर प्लांट बंद है।

बड़ा खर्च है प्लांट में
मंदिर समिति की ओर से कोटि तीर्थ कुंड के फिल्टर प्लांट को चालू करने के प्रयास तो किए जा रहे हैं पर इस पर खर्च अधिक है। मंदिर समिति ने कुछ विशेषज्ञों से इसके लिए ओपिनियन और सलाह ली है। सूत्रों के अनुसार प्लांट को चालू करने पर १ से तीन लाख का खर्च संभावित है। इसके अलावा संचालन का मासिक संचालन-संधारण का व्यय भी है। सूत्रों का कहना है कि मंदिर समिति का करोड़ों का बजट है। इसके बाद भी समिति फिल्टर प्लांट की राशि के लिए किसी दानदाता का इंतजार कर रहीं है।

पहले भी हुई कोशिश
जानकारों के अनुसार सीवरेज के साथ अन्य दूषित पानी के सीपेज की वजह से कोटि तीर्थ कुंड का पानी प्रदूषित हो जाता है। हाल के वर्षों में कुंड के जल को स्वच्छ रखने के अनेक प्रयासों के साथ-साथ कुंड को कई मर्तबा खाली कर भी साफ किया जा चूका है।

" विशेषज्ञों से सलाह और मंदिर समिति में विचार के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। कुंड को साफ किया जा रहा है।
- प्रदीप सोनी, प्रशासक महाकाल मंदिर प्रबंध समिति

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