scriptpresident kovind in ujjain, said-sages told us how to avoid epidemic | राष्ट्रपति बोले-हमारे ऋषि बता कर गए महामारी से बचने के तरीके | Patrika News

राष्ट्रपति बोले-हमारे ऋषि बता कर गए महामारी से बचने के तरीके

राष्ट्र्पति रामनाथ कोविंद ने अभा आयुर्वेद महासम्मेलन के 59वें अधिवेशन का किया उद्घाटन, आयुर्वेद के ज्ञान को वैज्ञानिक कसौटी पर खरा उतारने की जरूतर। राष्ट्रपति बोले-कोविड महामारी में आयुर्वेद से लाखों लोगों के जीवन की रक्षा संभव हुई।

उज्जैन

Published: May 29, 2022 04:03:38 pm

उज्जैन. राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद रविवार को उज्जैन पहुंचे। अखिल भारतीय आयुर्वेद महासम्मेलन के 59वें अधिवेशन के शुभारंभ पर संबोधित करते हुए वह बोले, विश्व में कई चिकित्सा पद्धतियां प्रचलित हैं, लेकिन आयुर्वेद इसमें अलग है। आयुर्वेद का अर्थ है, साइंस ऑफ लाइफ यानी आयु का विज्ञान। कोविड के बाद लोगों में आयुर्वेद के प्रति रुझान बढ़ा है। लाखों लोगों की जीवन की रक्षा इससे संभव हुई है। आयुर्वेद को लेकर आज का समय शोध और अनुसंधान, प्रमाणन और गुणवत्ता का है। आयुर्वेद के ज्ञान को वैज्ञानिक कसौटी पर खरा उतरने का है। प्रदेश में स्वास्थ्य क्षेत्र में काम हो रहा है। मैं चाहता हूं कि भारत में मध्यप्रदेश आयुर्वेद का केंद्र (सेंटर) बने।
राष्ट्रपति बोले-हमारे ऋषि बता कर गए महामारी से बचने के तरीके
राष्ट्रपति बोले-हमारे ऋषि बता कर गए महामारी से बचने के तरीके
कालिदास संस्कृति अकादमी में आयोजित कार्यक्रम में राष्ट्रपति बोले, भारतवर्ष के ऋषि-मुनि लोगों को महामारी से बचने के तरीके बता कर गए हैं। हजारों साल पहले लिखी गई चरक संहिता में इसका उल्लेख है कि भोजन के पहले हाथ-पैर और मुंह अच्छे से धोना चाहिए। ज्यादातर चिकित्सा पद्धतियों में 'पैथी' शब्द जुड़ा होता है। पैथी का अर्थ होता है, रोग के बाद उपचार, लेकिन आयुर्वेद रोग के मूल कारणों पर जाकर उसके निवारण पर बल देता है। हाल ही में गुजरात के जामनगर में डब्लयूएचओ का सेंटर खुला है, जो दर्शा रहा है कि हमारी प्राचीन औषधियों को विश्व स्वीकार कर रहा है।
उज्जैन की गलियों से वाकिफ : कोविंद

उज्जैन में 102 वर्ष बाद हो रहे आयुर्वेद के महाधिवेशन में हिस्सा लेने पहुंचे राष्ट्रपति ने उज्जैन से जुड़ी यादों को ताजा करते हुए कहा कि उज्जैन से बहुत पुरानी स्मृतियां जुड़ी है। करीब 35 वर्ष पूर्व उज्जैन आना-जाना रहता था, 15 -15 दिन यहां रुकता था। उज्जैन की गलियों से वाकिफ हूं।
आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज का उद्घाटन

समारोह में राष्ट्रपति कोविंद ने शासकीय स्वायत्तशासी धन्वंतरि आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज के भवन का वीडियो कॉम्फ्रेंसिंग के माध्यम से उद्घाटन भी किया। सम्मेलन में राष्ट्रपति के साथ देश की पहली प्रथम महिला सविता कोविंद, राज्यपाल मंगूभाई पटेल, मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान, उनकी पत्नी साधानासिंह, आयुष राज्य मंत्री रामकिशोर नानो कांवरे, वित्त मंत्री और जिले के प्रभारी मंत्री जगदीश देवड़ा, उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. मोहन यादव , सांसद अनिल फिरोजिया, आयुर्वेद सम्मेलन के अध्यक्ष वैद्य देवेंद्र त्रिगुणा, प्रो. वैद्य राकेश शर्मा मौजूद रहे।
आयुर्वेद भारत ही नहीं विश्व की आशा का केंद्र : राज्यपाल
राज्यपाल मंगूभाई पटेल ने कहा कि भारत में आयुर्वेद का विकास देश के लिए लाभकारी होने के साथ विश्व की आशा का केंद्र है। आवश्यकता है, हमें आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति को आधुनिक, वैज्ञानिक चिकित्सा पद़्धति के रूप में स्थापित करना होगा। आज भी कई आयुर्वेदाचार्यों के पास कई बीमारियों के उपचार के लिए लाभकारी फॉर्मूले हैं। हमें जनकल्याण के लिए उनके ज्ञान का संग्रह कर वैज्ञानिक रिसर्च करना चाहिए।
आयुर्वेद अस्पताल में करेंगे रोकस का गठन : मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ने कहा, आयुर्वेद संपूर्ण चिकित्सा पद्धति है। हमें इसे और बढाने की जरूरत है। उन्होंने आयुर्वेद के बढ़ावे को लेकर घोषणा की कि आयुष का बजट बढ़ाया जाएगा। आयुर्वेद चिकित्सकों को क्लीनिक खोलने की स्वीकृति सीएमएचओ से लेने की बजाय आयुष अधिकारियों से दिलवाएंगे। आयुर्वेद अस्पताल में जिला रोगी कल्याण समिति (रोकस) गठित करेंगे व आयुर्वेद चिकित्सकों की संख्या बढ़ाएंगे। आयुर्वेद चिकित्सकों के वेतन को चर्चा उपरांत बढ़ाने की बात भी कही।
राष्ट्रपति बोले-हमारे ऋषि बता कर गए महामारी से बचने के तरीकेराष्ट्रपति बोले-हमारे ऋषि बता कर गए महामारी से बचने के तरीकेराष्ट्रपति बोले-हमारे ऋषि बता कर गए महामारी से बचने के तरीकेमहाकाल में किए परिवार सहित दर्शन

राष्ट्रपति की अगवानी में बाबा महाकाल के दरबार वैभव देखते ही बना। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, पत्नी सविता और बेटी स्वाति के साथ दोपहर करीब 12:30 बजे महाकाल मंदिर पहुंचे। गर्भ गृह में जाकर राष्ट्रपति ने भगवान महाकाल का पूजन अभिषेक आरती कर राष्ट्र की सुख समृद्धि के लिए प्रार्थना की। उन्होंने महाकाल का जल तथा पंचामृत से अभिषेक किया। उनके साथ राज्यपाल मंगु भाई पटेल , मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और उनकी पत्नी साधना सिंह ने भी पूजन अर्चन किया। मुख्यमंत्री ने राष्ट्रपति को महाकाल का चांदी का स्मृति चिह्न भी भेंट किया।

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