प्रो. परिहार ने विवि एसओइटी सहित सभी समिति से क्यों दिया इस्तीफा

पूर्व निदेशक उमेश सिंह को मिलेगा चार्ज, वाणिज्य विभाग में भी बदलाव की तैयारी

By: rajesh jarwal

Published: 04 Apr 2019, 09:00 AM IST

 

उज्जैन. विक्रम विश्वविद्यालय के एसओईटी (इंजीनियरिंग अध्ययनशाला) के प्रभारी निदेशक प्रो. एसएस परिहार ने व्यस्तताओं के चलते इस्तीफा दे दिया। इसी के साथ उन्होंने रूसा, आईक्यूएसी समिति से भी इस्तीफा दे दिया है। प्रो. परिहार के पास एक वर्ष से एसओईटी का प्रभार था। सूत्रों के अनुसार अब पूर्व निदेशक उमेश सिंह को ही विभाग का प्रभार सौंपा जाएगा। इसी के साथ वाणिज्य अध्ययनशला में भी बदलाव की तैयारी शुरू हो गई। छात्र संख्या के हिसाब से वाणिज्य अध्ययनशाला सबसे बड़ी है। यहां पर एकमात्र स्थाई शिक्षक रामेश्वर सोनी थे। जिनका निधन हो गया। हालांकि उनके अवस्थ्य होने के चलते डीएसडब्ल्यू राकेश ढण्ड पर विभागाध्यक्ष का प्रभार था, लेकिन वह भी सेवानिवृत्त
होने वाले हैं। ऐसे किसी अन्य प्रोफेसर को विभाग का प्रभार दिया जाना है।

50 करोड़ रुपए से ज्यादा आना
विक्रम विवि में जल्द करीब 40 करोड़ रुपए बजट प्राप्त होना है। इसमें 38 करोड़ रुपए वल्र्ड बैंक की मदद से उच्च शिक्षा विभाग की शोध योजना के तहत प्राप्त होना है। इसी के साथ 10 करोड़ से ज्यादा रूसा मद में आना है। आईक्यूएसी और रूसा के प्रभार के दौरान प्रो. परिहार ने सभी विभागों के प्रस्ताव तैयारी के लिए भेजे। जिस कारण ज्यादा से ज्यादा बजट की स्वीकृति मिली। उन्होंने एसओइटी में बैचलर ऑफ कम्प्यूटर इंजीनियरिंग शुरू करने की तैयारी की थी, लेकिन यह प्रस्ताव भी अधर में लटक गया। इसी के साथ उन्होंने संस्थान में शिक्षक भर्ती का प्रस्ताव भी विवि को दिया था। इस प्रस्ताव में मौजूदा खर्च में ही संचालित कोर्स को स्थाई विभागाध्यक्ष व अनुबंध पर शिक्षक की बात शामिल थी। यह पूरा प्रस्ताव एसआइसीटीई के नियमों के अनुरूप था।

विवादों में आया एसओइटी
राजनीतिक दखल के चलते विवि की इंजीनियरिंग संस्थान विवादों में आ गई। यहां पर पदस्थ अतिथि विद्वानों का पूर्व निदेशक उमेश सिंह से विवाद हुआ। इसके बाद एबीवीपी ने मोर्चा खोल दिया। जमकर विरोध प्रदर्शन हुए। डॉ. उमेश सिंह ने इस्तीफा दे दिया। इसके बाद प्रो. परिहार को प्रभार सौंप दिया। बता दें कि संस्थान में फीस ज्यादा होने के चलते मौजूदा सत्र में प्रवेश संख्या काफी कम हो गई। इसी के साथ लगातार संस्थान की साख भी प्रभावित हुई है।

वाणिज्य विभाग के लिए तलाश शुरू
विक्रम विवि के वाणिज्य विभाग के लिए विभागाध्यक्ष की तलाश शुरू हो गई। इसके लिए अर्थशास्त्र अध्ययनशाला के एसके मिश्रा का नाम लगभग तय है। बता दें कि पूर्व कुलपति प्रो. एसएस पाण्डे के कार्यकाल में लगभग हर प्रभार एसके मिश्रा को सौंपा जाता था। उनके पास अर्थशास्त्र विभाग के अलावा दर्शनशास्त्र, अंबेडकर पीठ, विवि की सुरक्षा व्यवस्था, परीक्षा समन्वयक सहित अन्य काम है। ऐसे में एमबीए विभाग के किसी प्रोफेसर को वाणिज्य विभाग देने का विचार किया गया, लेकिन एमबीए विभाग के प्रोफेसरों का रवैया अधिकारियों से छुपा नहीं है। अधिकारी विवि की प्रमुख वाणिज्य संस्थान की व्यवस्था खराब नहीं करना चाहते हैं।

 

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