video : अधिकमास : सप्तसागरों के साथ यहां है दान की अलग महिमा

नौ नारायण में उमड़ रहे श्रद्धालु, पूजन-अर्चन के साथ 84 महादेव की यात्रा भी

By: Lalit Saxena

Published: 07 Jun 2018, 10:04 PM IST

उज्जैन. वर्षों बाद ज्येष्ठ अधिक मास के रूप में आया और यह अब समापन की ओर है। पुरुषोत्तम मास के ६ दिन शेष हैं। इसमें पूजन-अर्चन, दान कर पुण्य लाभ के लिए नवनारायण, 84 महादेव, सप्त सागर पर श्रद्धालु उमड़ रहे हैं।

उज्जैन में उत्तरवाहिनी शिप्रा

उज्जैन में उत्तरवाहिनी शिप्रा, नौ नारायण, 84 महादेव, सप्त सागर, अष्ट महाभैरव षट्विनायक आदि होने के कारण अधिक मास का विशेष महत्व है। 13 जून तक पुरुषोत्तम मास रहेगा। इसके चलते इन दिनों नव नारायण, 84 महादेव व सप्तसागरों की यात्रा का तांता लगा हुआ है। इन प्रमुख स्थानों पर सुबह से लेकर दोपहर तक पूजन चल रहे हैं। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार प्रत्येक तीन वर्ष में अधिक मास आता है। इस पुण्य पवित्र मास को पुरुषोत्तम मास कहा जाता है। इसमें धर्म कार्य का महापुण्य प्राप्त होता है। उज्जैन के सप्त सागरों के तीर्थाटन के साथ अलग-अलग दान की महिमा है। सात सागर और अर्पण की जाने वाली सामग्री अधिक मास में सप्त सागरों के पूजन का विशेष महत्व है।

इन सागरों पर पूजन

हरसिद्धि की पाल स्थित रुद्रसागर, नलिया बाखल स्थित पुष्कर सागर, नई सड़क स्थित क्षीर सागर, निकास चौराहा स्थित गोवर्धन सागर, ग्राम उंडासा स्थित रत्नाकर सागर, अंकपात मार्ग स्थित विष्णु सागर, इंदिरा नगर स्थित पुरुषोत्तम सागर ।

नौ नारायण यात्रा प्रमुख
अधिकमास अब अंतिम दौर में चल रहा है। पुरुषोत्तम मास में जहां दान, धर्म आदि करने का उल्लेख पुराणों में किया गया है वहीं विभिन्न यात्राएं भी इसी माह में होती हैं। नौ नारायण यात्रा प्रमुख है। नौ नारायणों के दर्शन करने से नौ ग्रहों की शांति हो जाती है। यह नौ स्वरूप उज्जैन में ही विराजित है।

- अनंतपेठ स्थित अनंतनारायण मंदिर 300 वर्ष से अधिक पुराना है। यहां अधिक मास के अलावा हरियाली अमावस्या तथा अनंत चतुर्दशी पर पूजा का विशेष महत्व है। इनकी पूजा करने से अनंत सुख मिलता है।

- सत्यनारायण मंदिर मंदिर ढाबा रोड पर है। लगभग 200 साल पुराने इस मंदिर में प्रतिदिन श्रद्घालु दर्शनों के लिए पहुंचते हैं। सत्यनारायण के दर्शन करने या यहां कथा श्रवण करने से सुख समृद्घि की कामना पूर्ण होती है।

- सेंट्रल कोतवाली के पास स्थित आदिनारायण मंदिर में दर्शन या पूजा करने से समस्त दु:खों का नाश होता है। मंदिर काफी पुराना है।
-शेषनारायण मंदिर क्षीरसागर परिक्षेत्र में स्थित है । लगभग पांच सौ वर्ष पुराने इस मंदिर में भगवान विष्णु शेषनाग पर विश्राम कर रहे हैं। सामने बैठी माता लक्ष्मी उनके चरण दबा रही है।

- पद्मनारायण मंदिर भी क्षीरसागर पर ही है। इस प्राचीन मंदिर में भगवान विष्णु का स्वरूप निराला है। यहां की यात्रा करने से अक्षय फल की प्राप्ति होती है।
- लक्ष्मीनारायण मंदिर गुदरी चौराहा पर स्थित है। कहा जाता है कि यहां नियमित दर्शन या आराधना करने वाले व्यक्ति को किसी बात की कमी नहीं रहती है। मूर्ति चमत्कारी है।

- बक्षी बाजार में बद्रीनारायण मंदिर है। यह मंदिर भी प्राचीन है। नौ नारायण की यात्रा करने वाले यात्री यहां पूजा-अर्चना कर आशीर्वाद ग्रहण करते हैं।
- चतुर्भुजनारायण मंदिर भी ढाबा रोड गोलामंडी पर ही है। इस प्राचीन मंदिर में भी नौ नारायण करने वाले यात्रियों की संख्या कम नहीं होती। इनके दर्शन करने से चारों तरफ ख्याति मिलती है।


सजा फलों का हिंडोला

गोलामंडी स्थित चारभुजानाथ मंदिर में माहेश्वरी सभा की ओर से आयोजित अधिकमास उत्सव में फलों के हिंडोला दर्शन हुए। उत्सव के लाभार्थी शांतादेवी अशोक मंडोवरा, शीला मंडोवरा, पूजा रोमिल देवपुरा, अतुल देवपुरा रहे। इस अवसर पर लक्ष्मीनारायण मूंदड़ा, आरती जयप्रकाश राठी, तृप्ति आशीष तोतला, अलका भूतड़ा, राजेश्वरी कैलाश गट्टानी, निर्मला राधेश्याम मंत्री, लीला अशोक लोया, नितिन बाहेती, मधुर दिलीप गुप्ता, सपना सौरभ देवपुरा, अर्पित चांडक आदि ने आरती की।

गेबी हनुमान पर 56 भोग कल
अधिकमास उत्सव के अंतर्गत गेबी हनुमान मंदिर में 9 जून को बाबा का विशेष शृंगार किया जाएगा। 56 भोग लगाकर आरती की जाएगी। 56 भोग भक्तों को बांटा जाएगा।

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