scriptresearch will be on ram setu stones in vikram university ujjain | रामसेतु के पत्थरों पर होगी रिसर्च, प्रयोग सफल रहा तो पत्थरों से बनाए जाएंगे हल्के पुल और मकान | Patrika News

रामसेतु के पत्थरों पर होगी रिसर्च, प्रयोग सफल रहा तो पत्थरों से बनाए जाएंगे हल्के पुल और मकान

मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित विक्रम विश्वविद्यालय में होगा रामसेतु के पत्थरों पर शोध। सोध सफल रहा तो बनेंगे पानी में तैरने वाले पत्थर, हल्के पुल और मकानों के निर्माण में आएंगे काम।

उज्जैन

Published: November 08, 2021 08:53:23 pm

उज्जैन. महाकाल की नगरी उज्जैन में श्रीराम द्वारा लंका मार्ग पर बनाए गए सेतु पुल के पत्थरों पर शोध होने जा रहा है। उज्जैन की विक्रम यूनिवर्सिटी और शासकीय इंजीनियरिंग कॉलेज के छात्र रामसेतु के पत्थरों पर शोध करके पता लगाएंगे कि, ये पत्थर आखिर बने किस पदार्थ से हैं, जो सामान्य पत्थर के मुकाबले काफी हल्के होते हैं। जिसके चलते ये पानी में भी नहीं डूबते। शोध टीम का हना है कि, अगर ये प्रयोग सफल रहा, तो भविष्य में लोगों को इसका काफी लाभ मिलेगा। इन पत्थरों से दल्के पुल और मकानों का निर्माम कराया जा सकेगा।

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रामसेतु के पत्थरों पर होगी रिसर्च, प्रयोग सफल रहा तो पत्थरों से बनाए जाएंगे हल्के पुल और मकान


दरअसल, विक्रम यूनिवर्सिटी द्वारा हाल ही में राम चरित्र मानस और विज्ञान नामक एक सर्टिफिकेट कोर्स कराने की शुरूआत की है। इस कोर्स के माध्यम से छात्रों को रामसेतु पत्थर के बारे में बारीकी से जानने का मौका मिलेगा। साथ ही, उसके स्ट्रक्चर, भार सहने की क्षमता आदि चीजों पर शोध किया जाएगा। अगर वो स्ट्रक्चर लैब में तैयार हो गया, तो ये यूनिवर्सिटी की एक बड़ी होगी। खासतौर पर इस पत्थर का इस्तेमाल भूकंप और बाढ़ ग्रस्त इलाकों में करना फायदेमंद होगा।

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रामायण काल के रामसेतु का करीब से अध्यन

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विक्रम विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर अखिलेश कुमार पांडेय के अनुसार, राम चरित मानस में डिग्री पाठ्यक्रम शुरू करने के बाद छात्रों द्वारा रामायण काल में बने रामसेतु का भी अध्ययन किया जाएगा। इसका उद्देश्य ये जानना है, कि आखिर वो पत्थर निर्मित किस तरह हुआ था। हालांकि, इसरो, नासा, आईआईटी समेत अन्य संस्थान इस बात के बारे में तो जानते हैं कि, वो पत्थर प्यूबिक मटेरियल से बना है। प्रोफेसर अखिलेश कुमार ने ये स्पष्ट किया कि, ये एक वैज्ञानिक आधारों पर ही शोध कोर्स होगा, जिसमें उज्जैन के इंजीनियरिंग कॉलेज के छात्र छात्राओं की मदद ली जाएगी। दोनों के बीच हाल ही में एक MOU साइन हुआ है।

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प्रयोग सफल रहा तो...

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कुलपति अखिलेश पांडे के अनुसार, अगर रिसर्च में प्राप्त साक्ष्यों के आधार पर प्रयोग सफल रहा, तो लैब में ही उन पत्थरों का निर्माण किया जाएगा, जो पानी पर तैरने में सक्षम होंगे और ऐसे पत्थरों का इस्तेमाल बाढ़ और भूकंप ग्रस्त इलाकों में करना बहुत फायदेमंद होगा। इससे हल्के मकान और निर्माण किये जा सकेंगे, जिसका नुकसान भी काफी कम होगा।

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