रेयान स्कूल की घटना: लापरवाही जारी है...फिर कागजी साबित हुई ये सक्रियता

Gopal Bajpai

Publish: Nov, 15 2017 11:24:04 (IST)

Ujjain, Madhya Pradesh, India
रेयान स्कूल की घटना: लापरवाही जारी है...फिर कागजी साबित हुई ये सक्रियता

गुरुग्राम के रेयान स्कूल में ९ सितंबर को मासूम छात्र की हत्या के बाद अफसरशाही व नेतानगरी अचानक सक्रिय हो गई थी।

रफ्तार कुछ इस कदर तेज है जिन्दगी की,

सुबह का दर्द शाम को पुराना हो जाता है...
गोपाल वाजपेयी@उज्जैन. एक शायर की ये रचना फिर याद आ गई। गुरुग्राम के रेयान स्कूल में ९ सितंबर को मासूम छात्र की हत्या के बाद अफसरशाही व नेतानगरी अचानक सक्रिय हो गई थी। ये देखकर ऐसा लगने लगा था कि अब स्कूलों में व्यवस्थाएं पटरी पर आ जाएंगी। सीबीएसई ने भी स्कूलों से दो माह के अंदर पूरी गाइडलाइन पालन करने का फरमान जारी किया था। लेकिन ये सक्रियता पहले की भांति ही कागजी साबित हुई। वारदात के बाद १० दिन निर्देश व आदेशों की बाढ़ आई थी। देखें कुछ बानगी...

क्यों हवा हो जाते हैं निर्देश
निर्देश नं. १ : १२ सितंबर को उज्जैन सांसद चिंतामणि मालवीय ने जिले के अधिकारियों की बैठक में निजी स्कूलों की मनमानी व लापरवाही को लेकर गंभीर सवाल उठाए। सांसद ने कलेक्टर से कहा कि निजी स्कूलों में लूट मची है। बच्चे सुरक्षित नहीं हैं। सांसद ने जिला शिक्षा अधिकारी से कहा कि सभी स्कूलों का निरीक्षण करो। स्कूलों के पूरे स्टाफ का वेरिफेकशन कराओ।

निर्देश नं. २ : 14 सितंबर को स्कूल शिक्षा मंत्री विजय शाह ने आदेश जारी कर कहा कि बच्चों की सुरक्षा में लापरवाही बरतने वाली शिक्षण संस्थाओं की मान्यता समाप्त की जाएगी।

निर्देश नं. ३ : १५ सिंतबर को डीजीपी ने उज्जैन में पुलिस अफसरों की मीटिंग ली। डीजीपी ने पुलिस अफसरों को सभी निजी स्कूलों का निरीक्षण करने का आदेश दिया। सुरक्षा के सभी पैमाने परखने के निर्देश दिए।

निर्देश नं. ४ : २६ सितंबर को संभागायुक्त ने लोक शिक्षण संभाग के संयुक्त संचालक को निर्देश दिए कि सभी स्कूलों का निरीक्षण कर सुरक्षा संबंधी पैमाने सख्ती से लागू कराएं। पूरे स्टाफ का पुलिस वेरिफिकेशन कराएं।

सारे सवाल जस के तस
सारे सवाल फिर जस के तस हैं। क्या सभी स्कूलों में निर्देशित जगहों पर सीसीटीवी लगे हैं? क्या स्कूल स्टाफ का पुलिस वैरिफेकेशन किया गया? क्या पुलिस ने किसी स्कूल का दौरा किया? क्या जिला शिक्षा अधिकारी ने किसी स्कूल में जाने की जहमत उठाई? क्या स्कूल में जाकर छात्र-छात्राओं को जागरूक किया गया? क्या छात्र-छात्राओं के साथ ही स्कूल स्टाफ की मानसिक स्थिति की जांच की गई? क्या शिक्षकों व अभिभावकों की समन्वय समिति गठित हुई? क्या बसों में महिला कंडक्टर तैनात की गई? क्या किसी स्कूल के खिलाफ कुछ कार्रवाई की गई? जाहिर है, इन सभी सवालों के जवाब खुद सवाल पूछ रहे हैं।

दो माह बीत गए निर्देशों को
निर्देशों की झड़ी लगे दो माह बीत गए। एक भी निर्देश का पालन नहीं हुआ। न स्कूल प्रबंधन ने निर्देशों को गंभीरता से लिया और न ही जिम्मेदार अफसरों ने। निर्देश देने वालों ने भी कभी मुड़कर नहीं देखा। इससे साफ होता है कि सरकारी तंत्र कैसे काम कर रहा है। इन निर्देशों का नकारात्मक असर जरूर हुआ है। उज्जैन के कुछ स्कूलों में बच्चों को सिर्फ इंटरवल में टॉयलेट जाने की अनुमति है। दरअसल, स्कूल संचालकों की मनमानी पूरे सरकारी तंत्र पर भारी है। ऐसा लगता है कि इनकी अलग स्वतंत्र सत्ता चल रही है, जिन पर किसी का नियंत्रण नहीं है। राजनीतिक रसूख और धनबल के कारण कोई भी इनसे पंगा नहीं लेना चाहता।

चेतावनी दी और उठाए थे सवाल
अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि शिक्षा मंत्री व कमिश्नर ने तय मानक पूरे न करने वाले स्कूलों की मान्यता तक निरस्त करने की चेतावनी दी थी। लेकिन किसी स्कूल को नोटिस तक जारी नहीं हुआ। गत १३ मार्च को लोकसभा में उज्जैन सांसद चिंतामणि मालवीय ने स्कूलों की मनमानी का मामला उठाया था। सांसद ने भरी लोकसभा में रोष जताते हुए कहा था कि उज्जैन संसदीय क्षेत्र के निजी स्कूल एक साल में दस करोड़ तक की कमीनशखोरी करते हैं। इन पर लगाम लगाई जाए। इसके बाद भी स्कूलों की कार्यप्रणाली में एक फीसदी सुधार नहीं हुआ। भगवान न करे फिर कोई हादसा हो, क्योंकि फिर कागजी निर्देश जारी होंगे और मामला ठंडा होते ही भुला दिए जाएंगे। इसीलिए किसी शायर ने खूब कहा है-

बहल जाएगा मेरा दिल उसके वादों से लेकिन,
चलेगी पानी में कागज की कश्ती कब तक...

([email protected])

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