संध्या आरती में ऐसा सजा राजाधिराज महाकाल का दरबार, देखें वीडियो

भोले बाबा भगवान श्रीमहाकालेश्वर का दरबार सोमवार की संध्या आरती के दौरान आकर्षक रूप से सजाया गया।

By: Gopal Bajpai

Published: 22 Aug 2017, 11:33 AM IST

उज्जैन. भोले बाबा भगवान श्रीमहाकालेश्वर का दरबार सोमवार की संध्या आरती के दौरान आकर्षक रूप से सजाया गया। महाकाल का मनभावन शृंगार किया गया। फूलों और भांग के अलावा ड्रायफ्रूट से सजाया गया। वहीं मंगलवार को महाकाल की भस्म आरती के दौरान अद्भुत शृंगार किया गया। बाबा महाकाल की भोग आरती में झांझ-डमरुओं की गूंज होती है। साथ ही इसी समय उन्हें पकवानों का भोग भी अर्पण किया जाता है।

अलौकिक स्वरूप में दिए दर्शन
भगवान महाकाल की महिमा बड़ी ही निराली है। बिल्व पत्र और चंदन से खूब सजते हैं। भस्म आरती के बाद सुबह 10.30 बजे भोग आरती के दर्शन होते हैं। भोलेनाथ भगवान महाकाल अपने भक्तों को अलौकिक स्वरूप में दर्शन देते हैं। चंदन-ड्रायफ्रूट आदि से उन्हें सजाया जाता है। शृंगार भी ऐसा कि देखते ही मन आनंदित हो जाए।

जल-दूध और दही से पंचामृत स्नान-पूजन
भोलेनाथ को जल-दूध, दही और चंदन से स्नान के बाद पंचामृत पूजन किया गया। गले में पुष्पों का हार सुशोभित था, तो त्रिपुंड व त्रिनेत्र से मुखारविंद दमक रहा था। राजाधिराज महाकाल का मनभावन शृंगार हुआ। श्रावण मास में ज्योतिर्लिंग पर चंदन से आकर्षक स्वरूप बनाया गया, भक्तों ने इस निराले रूप के दर्शन किए तो पूरा हॉल जयकारों से गूंज उठा।

भस्मी रमैया महाकाल का ये अनूठा रूप
भस्मी रमाने वाले बाबा महाकाल को पहले जल-दूध से स्नान कराया, इसके बाद भस्मी रमाई। बिल्व पत्रों और फूलों के हार से सजाया गया। यह रूप भक्तों को हर पल आनंदित करता है। प्रतिदिन अनूठे शृंगार होते हैं। भांग और ड्रायफ्रूट का शृंगार किया जाता है। उनके मुख पर चंदन का त्रिपुंड तो गले में पुष्पों की माला शोभा बढ़ा रही थी। तरह-तरह के सूखे मेवे भी शृंगार में उपयोग किए जाते हैं। बाबा का यह रूप बड़ा ही मनोहारी होता है। विविध प्रकार के शृंगारों में भांग शृंगार सबसे अनूठा और खास माना जाता है।

बड़ा मनोहारी रूप है महाकाल का
बाबा महाकाल त्रिपुरारी का स्वरूप बड़ा ही मनोहारी है। भक्तों को आशीर्वाद देते हैं। उनके कई रूप हैं, सभी झलक पाने को आतुर रहते हैं। हमेशा श्रद्धालुओं की भीड़ मंदिर में उमड़ती है। जब भोले भस्मी रमाए बैठते हैं, तो उनका स्वरूप बड़ा ही मनोहारी नजर आता है। सुबह भस्मी से स्नान करते हैं। तन पर भस्मी लगाते हैं और मृगछाला ओढ़कर भक्तों को धन-धान्य का आशीर्वाद देते हैं। गर्भगृह में चारों तरफ भस्मी फैली होती है। जिससे ऐसा लगता है, मानों भक्त बाबा के हिमालय पर्वत पर दर्शन कर रहे हों। बाबा अनेक रूपों में भक्तों को दर्शन देकर धन्य करते हैं। महाकाल मंदिर में अनेक छोटे-बड़े मंदिर हैं। इनके दर्शन के लिए भी श्रद्धालु पहुंचते हैं।

Gopal Bajpai Editorial Incharge
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