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गंगा दशमी पर्व: लहराई धर्म ध्वजा, शान से निकली पेशवाई, साधुओं ने दिखाए साहसी करतब

गंगा दशमी पर्व पर सुबह 7 बजे सिहंस्थ पड़ाव स्थल नीलगंगा से पेशवाई निकाली गई, जिसमें चांदी के निशान, धर्म ध्वजा, घोड़े, ऊंट, बग्गी, बैंडबाजे आदि शामिल रहे।

उज्जैन

Updated: June 09, 2022 10:16:48 pm

उज्जैन. गंगा दशमी पर्व पर सुबह 7 बजे सिहंस्थ पड़ाव स्थल नीलगंगा से पेशवाई निकाली गई, जिसमें चांदी के निशान, धर्म ध्वजा, घोड़े, ऊंट, बग्गी, बैंडबाजे आदि शामिल रहे। साधुओं ने मार्ग में साहसी करतब दिखाकर लोगों को सिंहस्थ की यादें ताजा कराईं। रास्तेभर पुष्पवर्षा से स्वागत किया गया। पेशवाई नीलगंगा चौराहा होते हुए जूना अखाड़ा घाट पहुंची, यहां निशान देवता का विधि-विधान से स्नान हुआ, फिर जयगोष के साथ डुबकी लगाई। शाम को महाआरती के साथ महाभंडारा हुआ। हरियाणा से आए जंगम-जोगी बाबाओं ने अलग ही अंदाज में शिव स्तुति एवं निनाद नृत्य अकादमी की बालिकाओं ने मां गंगा स्तुति की प्रस्तुति दी। इस मौके पर जूना अखाड़ा के महामंडलेश्वर स्वामी महेंद्र आनंद गिरि महाराज, साध्वी महामंडलेश्वर जय अंबा गिरी माता गुजरात सहित जूना अखाड़ा के अन्य महामंडलेश्वर और संत शामिल हुए। सरोवर में 108 फीट की चुनरी अर्पण की गई।

Simhanstha Peshwai took out Ganga Dashami festival
गंगा दशमी पर्व पर सुबह 7 बजे सिहंस्थ पड़ाव स्थल नीलगंगा से पेशवाई निकाली गई, जिसमें चांदी के निशान, धर्म ध्वजा, घोड़े, ऊंट, बग्गी, बैंडबाजे आदि शामिल रहे।

नई शुरुआत: भाला स्वरूप में देवता पूजन
इस वर्ष जूना अखाड़ा द्वारा अखाड़े के पंचों के निर्णय अनुसार एक नई परंपरा की शुरुआत की गई। सिहंस्थ में जिस प्रकार से सभी अखाड़ों के देवता स्वरूप भाले का संत महंत विधि विधान क्षिप्रा में पूजन करते हैं, वर्ष गंगा दशहरे पर गंगा प्रकाश भाले की पूजन की परंपरा शुरू हुई।

नटराज के सामने 18 घंटे नृत्य आराधना की अविरल प्रस्तुति
गंगा दशहरा पर्व पर रसराज प्रभात नृत्य संस्थान के कलाकारों ने भगवान नटराज स्वरूप श्री महाकाल के दरबार में नृत्य आराधना की अविरल प्रस्तुति दी। यह आयोजन सुबह 6 से आरंभ हुआ, जो रात 10 बजे तक लगातार बिना रुके चला। कलाकारों ने भगवान महाकाल की नृत्य के माध्यम से आराधना की। संस्था की सांस्कृतिक सचिव साधना मालवीय, मृणालिनी चौहान ने बताया कार्यक्रम में 5 साल की बालिका से लेकर 60 साल तक के कलाकारों ने इस आराधना में शामिल होकर भगवान देवों के देव महादेव की आराधना की। मंदिर परिसर में शिव तांडव, शिव पंचाक्षर स्त्रोत सहित अन्य प्रस्तुतियां दी गईं।

मोगरे की सुगंध से महकी भगवान श्रीकृष्ण की बगिया
अंकपात मार्ग स्थित भगवान श्रीकृष्ण की बगिया (शिक्षास्थली महर्षि सांदीपनि आश्रम) में गंगा दशहरा महापर्व पर मोगरे का शृंगार किया गया। इसकी खुशबू से समूचा वातावरण सुवासित हो गया। पं. रूपम व्यास ने बताया भगवान को हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी मोगरे की कलियों का शृंगार कर फलों के राजा आम का महाभोग लगाकर आरती की गई। दिनभर दर्शन-पूजन का सिलसिला चला।

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