उज्जैन के इस संग्रहालय में ५ लाख साल पुराना हाथी का सिर...

विक्रम विवि के संग्रहालय में हजारों वर्ष पुरानी मूर्ति व लकड़ी, कई बड़े शोध हुए, अब नए विद्यार्थियों को जानकारी तक नहीं

By: Lalit Saxena

Published: 24 May 2018, 08:02 AM IST

उज्जैन. विक्रम विश्वविद्यालय के संग्रहालय में हजारों वर्ष पुरानी व दुर्लभ चीजों का संग्रह है। यह धरोहर देशभर से मेहनत कर जुटाई गई। साथ ही इन पर पद्मश्री विष्णु श्रीधर वाकणकर सहित दर्जनों शोधार्थियों ने बड़े शोध किए, ताकि भावी पीढ़ी को पुरातत्व से परिचित करवाया जा सकें, लेकिन यह दुर्लभ धरोहर का संग्रह अब संग्रहालय तक ही सीमित रह गया है। विवि प्रशासन ने उक्त संग्रहालय की सुध लंबे समय तक नहीं ले रहा है। यहां तैनात अधिकारी, कर्मचारी व शोधार्थी संग्रहालय के साथ इन चीजों का संरक्षण कर रहे हैं।
शोध केंद्र के रूप में सीमित
विक्रम विवि का संग्रहालय शोध केंद्र के रूप में सीमित रह गया है। सिंहस्थ महापर्व के दौरान संग्रहालय के विकास व संरक्षण के लिए काफी योजना तैयार हुई। इसी के साथ यहां के धरोहर से लोगों को परिचित करवाने के लिए कई तरह के प्रस्ताव तैयार हुए, लेकिन कुछ भी अमल में नहीं आया। कई प्रशासन ने भी उक्त संग्रहालय की तरफ ध्यान देने की कोशिश की, लेकिन यह फाइलों तक सीमित रहा।
यह है खास
सबसे बड़ा हाथी का मस्तक (जीवाश्म)
संग्रहालय में एक हाथी का मस्तक है। जो वर्ष १९९७ में नृसिंहपुर (जबलपुर के पास) से लाया गया है। शोध में यह पाया गया है कि यह करीब ५ लाख वर्ष पुराना है और यह आकार में सबसे बड़ा हाथी का मस्तक है।
२६०० साल पुरानी लकड़ी
संग्रहालय में करीब २६०० वर्ष पुरानी लकड़ी के गट्ठे मौजूद है। यह वर्ष १९७० में शिप्रा से जुटाए गए हैं। शोध में जानकारी सामने आई कि शिप्रा नदी की बाढ़ से उज्जैयनी को बचाने के लिए इन लकडि़यों का प्रयोग पानी रोकने के रूप में विभिन्न तरह किया जाता रहा होगा।
४२५ पाषण की प्रतिमा
संग्रहालय में २३०० से १००० वर्ष पुरानी करीब ४२५ प्रतिमा मौजूद हैं। यह सभी पाषाण की प्रतिमा हैं। इन सभी की अपनी-अपनी विशेषता है। साथ ही यह प्रतिमा अपने तत्कालीन समय की कई रोचक जानकारी भी देती है। इन सभी तथ्यों को शोध के रूप में समय-समय पर सामने लाया जा चुका है।
प्राचीन जानकारियों से अवगत कराते हैं
संग्रहालय में आने वाले लोगों को यहां उपस्थित सभी चीजों की प्राचीन और ऐतिहासिक जानकारियों से अवगत कराया जाता है। शोधार्थियों के लिए यह केंद्र है, अन्य लोगों के लिए सभी व्यवस्थाएं हैं।
- रमण सोलंकी, प्रभारी, संग्रहालय

Lalit Saxena
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