scriptThe candidates did not reach even to collect the pamphlets and flax | चुनाव निरस्त होने की घोषणा होते ही उम्मीदवार पर्चे और फ्लैक्स लेने ही नहीं पहुंचे | Patrika News

चुनाव निरस्त होने की घोषणा होते ही उम्मीदवार पर्चे और फ्लैक्स लेने ही नहीं पहुंचे

प्रिटिंग प्रेस संचालक बोले- चुनाव से जागी व्यापार की उम्मीद पर फिरा पानी

उज्जैन

Published: December 27, 2021 12:31:54 am

नागदा. त्रि-स्तरीय पंचायत चुनाव स्थगित के सरकार के फैसले ने उम्मीदवारों की उम्मीदों पर पानी फिर गया है। नागदा-खाचरौद जनपद क्षेत्र में 6 जनवरी को मतदान की तिथि नीयत होने की वजह से क्षेत्र में प्रचार-प्रसार तक शुरू हो गया था। चुनाव मैदान में खड़े हुए उम्मीदवारों ने अपने-अपने क्षेत्रों में पूरी तैयारियां कर ली थी। मगर रविवार दोपहर आए सरकार के इस फैसले ने उनकी सारी तैयारियोंं को ध्वस्त कर दिया। गांव के हालातों पर नजर डालें तो कई उम्मीदवार तो कर्ज लेकर चुनाव लड़ रहे थे। इसके लिए उन्होंने प्रचार सामग्रीयां तक छपवा ली थी। यही नहीं गांव में तो डीजे का शोर तक शुरू हो गया था। मगर सरकार के इस फैसले ने उम्मीदवारों के चेहरे की रौनक ही छीन ली। इधर चुनाव स्थगित होते ही उम्मीदवारों ने जो पेंपलेट, फ्लैक्स छपवाए थे, वह लेने पहुंचे ही नहीं। जिससे प्रिटिंग प्रेस व फ्लैक्स संचालकों को नुकसान का डर है।
पर्चों में 50 प्रतिशत नुकसान
प्रिटिंग प्रेस संचालक अब्दुल गफूर ने बताया कि उन्होंने लगभग 25 गांवों का करीब 60 हजार रुपए काम किया है। हालांकि 50 प्रतिशत राशि तो मिल गई है। मगर चुनाव स्थगित होने से बाकी राशि डूबने का डर बना हुआ है। रविवार को 14 गांवों में पेंपलेट की डिलीवरी करना थी। मगर सरकार के फैसला होते ही एक भी गांव से उम्मीदवार अपनी सामग्री लेने नहीं आया। नतीजा- इन 14 गांवों की 50 हजार प्रिटिंग धरी रह गई। जिसकी कीमत करीब 25 हजार रुपए है। उम्मीदवारों ने प्रचार सामग्री ले जाने के लिए फोन लगाया गया। मगर वे भी टालमटोल करते नजर आए।
फ्लैक्स संचालक को डेढ़ लाख से ज्यादा का नुकसान
फ्लैक्स संचालक अभिषेक अग्रवाल ने बताया कि उनके पास लगभग 50 से ज्यादा गांवों का काम था। फ्लैक्स छपकर तैयार पड़े थे। मगर सरकार के इस फैसले के बाद कोई भी प्रत्याशी अपने फ्लैक्स लेने ही नहीं आया। इसके अलावा कच्चा माल अलग पड़ा है। कुल मिलाकर लगभग डेढ़ लाख से ज्यादा का नुकसान हुआ है। चुनाव को लेकर बन रही असमंजस की स्थिति को देखते हुए कई प्रिटिंग प्रेस व फ्लैक्स संचालकों ने एडवांस राशि ले ली थी। मगर उन्हें भी कुछ हद तक नुकसान हुआ है।
एनओसी के नाम पर बिजली कंपनी के खाते में आया 5 लाख से ज्यादा का राजस्व
चुनाव स्थगन से बिजली कंपनी को फायदा ही हुआ है। नोड्यूज के बहाने से ही सही बिजली कंपनी के खाते में बकाया बिजली बिल की राशि जमा हो गई। बिजली कंपनी के सौरभ गोस्वामी ने बताया कि लगभग 500 से ज्यादा उम्मीदवार ने नोड्यूज लेने पहुंचे थे। जिनसे करीब 5 लाख से ज्यादा का बकाया शुल्क जमा हुआ है।
कांग्रेस का तंज: जब चुनाव ही नहीं कराना थे तो इतनी प्रक्रिया क्यों की
मप्र कांग्रेस कमेटी के प्रतिनिधि बसंत मालपानी ने बताया शिवराज सरकार की कैबिनेट ने वर्ष 2014 के परिसीमन और आरक्षण के आधार पर गैर लोकतांत्रिक तरीके से चुनाव की घोषणा की। फिर कानूनी दांवपेचों मे चुनाव को उलझाया। अब उसी कैबिनेट ने चुनाव को निरस्त करने का निर्णय लिया। अगर चुनाव नहीं करवाने की मंशा थी तो प्रक्रिया तो इतना क्यों उलझाया। सरकार के फेर में उम्मीदवारों ने लाखों खर्च कर प्रचार सामग्री व अन्य तैयारियां कर ली। भाजपा शुरू से ही पूंजीपतियों की पार्टी है मजदूर,किसान व गरीबों को कर्ज में धकेलना चाहती है। चुनाव का नामांकन दाखिल करने वाले सभी प्रत्याशी को सरकार के इस कदम का विरोध करना चाहिए।
चुनाव निरस्त होने की घोषणा होते ही उम्मीदवार पर्चे और फ्लैक्स लेने ही नहीं पहुंचे
प्रिटिंग प्रेस संचालक बोले- चुनाव से जागी व्यापार की उम्मीद पर फिरा पानी
नागदा. त्रि-स्तरीय पंचायत चुनाव स्थगित के सरकार के फैसले ने उम्मीदवारों की उम्मीदों पर पानी फिर गया है। नागदा-खाचरौद जनपद क्षेत्र में 6 जनवरी को मतदान की तिथि नीयत होने की वजह से क्षेत्र में प्रचार-प्रसार तक शुरू हो गया था। चुनाव मैदान में खड़े हुए उम्मीदवारों ने अपने-अपने क्षेत्रों में पूरी तैयारियां कर ली थी। मगर रविवार दोपहर आए सरकार के इस फैसले ने उनकी सारी तैयारियोंं को ध्वस्त कर दिया। गांव के हालातों पर नजर डालें तो कई उम्मीदवार तो कर्ज लेकर चुनाव लड़ रहे थे। इसके लिए उन्होंने प्रचार सामग्रीयां तक छपवा ली थी। यही नहीं गांव में तो डीजे का शोर तक शुरू हो गया था। मगर सरकार के इस फैसले ने उम्मीदवारों के चेहरे की रौनक ही छीन ली। इधर चुनाव स्थगित होते ही उम्मीदवारों ने जो पेंपलेट, फ्लैक्स छपवाए थे, वह लेने पहुंचे ही नहीं। जिससे प्रिटिंग प्रेस व फ्लैक्स संचालकों को नुकसान का डर है।
पर्चों में 50 प्रतिशत नुकसान
प्रिटिंग प्रेस संचालक अब्दुल गफूर ने बताया कि उन्होंने लगभग 25 गांवों का करीब 60 हजार रुपए काम किया है। हालांकि 50 प्रतिशत राशि तो मिल गई है। मगर चुनाव स्थगित होने से बाकी राशि डूबने का डर बना हुआ है। रविवार को 14 गांवों में पेंपलेट की डिलीवरी करना थी। मगर सरकार के फैसला होते ही एक भी गांव से उम्मीदवार अपनी सामग्री लेने नहीं आया। नतीजा- इन 14 गांवों की 50 हजार प्रिटिंग धरी रह गई। जिसकी कीमत करीब 25 हजार रुपए है। उम्मीदवारों ने प्रचार सामग्री ले जाने के लिए फोन लगाया गया। मगर वे भी टालमटोल करते नजर आए।
फ्लैक्स संचालक को डेढ़ लाख से ज्यादा का नुकसान
फ्लैक्स संचालक अभिषेक अग्रवाल ने बताया कि उनके पास लगभग 50 से ज्यादा गांवों का काम था। फ्लैक्स छपकर तैयार पड़े थे। मगर सरकार के इस फैसले के बाद कोई भी प्रत्याशी अपने फ्लैक्स लेने ही नहीं आया। इसके अलावा कच्चा माल अलग पड़ा है। कुल मिलाकर लगभग डेढ़ लाख से ज्यादा का नुकसान हुआ है। चुनाव को लेकर बन रही असमंजस की स्थिति को देखते हुए कई प्रिटिंग प्रेस व फ्लैक्स संचालकों ने एडवांस राशि ले ली थी। मगर उन्हें भी कुछ हद तक नुकसान हुआ है।
एनओसी के नाम पर बिजली कंपनी के खाते में आया 5 लाख से ज्यादा का राजस्व
चुनाव स्थगन से बिजली कंपनी को फायदा ही हुआ है। नोड्यूज के बहाने से ही सही बिजली कंपनी के खाते में बकाया बिजली बिल की राशि जमा हो गई। बिजली कंपनी के सौरभ गोस्वामी ने बताया कि लगभग 500 से ज्यादा उम्मीदवार ने नोड्यूज लेने पहुंचे थे। जिनसे करीब 5 लाख से ज्यादा का बकाया शुल्क जमा हुआ है।
कांग्रेस का तंज: जब चुनाव ही नहीं कराना थे तो इतनी प्रक्रिया क्यों की
मप्र कांग्रेस कमेटी के प्रतिनिधि बसंत मालपानी ने बताया शिवराज सरकार की कैबिनेट ने वर्ष 2014 के परिसीमन और आरक्षण के आधार पर गैर लोकतांत्रिक तरीके से चुनाव की घोषणा की। फिर कानूनी दांवपेचों मे चुनाव को उलझाया। अब उसी कैबिनेट ने चुनाव को निरस्त करने का निर्णय लिया। अगर चुनाव नहीं करवाने की मंशा थी तो प्रक्रिया तो इतना क्यों उलझाया। सरकार के फेर में उम्मीदवारों ने लाखों खर्च कर प्रचार सामग्री व अन्य तैयारियां कर ली। भाजपा शुरू से ही पूंजीपतियों की पार्टी है मजदूर,किसान व गरीबों को कर्ज में धकेलना चाहती है। चुनाव का नामांकन दाखिल करने वाले सभी प्रत्याशी को सरकार के इस कदम का विरोध करना चाहिए।
As soon as the announcement of the cancellation of the election, the c
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