बदलेगा महाकाल मंदिर का रूप, श्रद्धालु दो दिन बीता सकेंगे

महाकाल मंदिर विकास योजना, 300 करोड़ की योजना पर शुरू हुआ काम

उज्जैन. आने वाले दिनों में महाकालेश्वर मंदिर का ऐसा स्वरूप नजर आएगा, जिसमें श्रद्धालु न सिर्फ आराम से दर्शन कर सकेंगे, बल्कि वे यहां एक-दो दिन रुक भी सकते हैं। शहरवासियों के विकास के साथ-साथ पर्यटन केंद्र के रूप में भी महाकालेश्वर की नगरी का विकास होने जा रहा है।
मध्यप्रदेश सरकार ने 2019 में आध्यात्म विभाग का गठन किया। प्रदेश में धर्मस्व, धार्मिक न्यास और आनंद विभाग के बिखरे स्वरूप को आध्यात्म विभाग में समाहित कर प्रदेशवासियों को भारतीय संस्कृति से जोड़े रखने की शुरुआत पिछले वर्ष ही प्रदेश में हुई। देश के 12 ज्योतिर्लिंगों में से महाकालेश्वर भी हैं, जिन्हें राज्य सरकार ने विश्व पर्यटन केन्द्र के स्वरूप में विकसित करने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री कमलनाथ ने ओंकार सर्किट योजना में महेश्वर, ओंकारेश्वर के साथ महाकालेश्वर विकास योजना को भी मंजूरी दी है।
ये है महाकाल मंदिर विकास योजना
भगवान महाकाल मंदिर के विकास और विस्तार की 300 करोड़ की योजना पर काम शुरू हो गया है। योजना के कामों की निगरानी के लिए मंत्रीमंडल की तीन सदस्यीय समिति गठित की गई है, जिसमें लोक निर्माण मंत्री सज्जन सिंह वर्मा, आध्यात्म मंत्री पीसी शर्मा और नगरीय विकास मंत्री जयवर्धन सिंह सदस्य हैं। योजना को समय-सीमा में पूरा कराने की जिम्मेदारी मुख्य सचिव को सौंपी गई है। योजना ऐसी बनाई गई है कि यहां ऐसी व्यवस्थाएं रहें ताकि श्रद्धालु एक-दो दिन आराम से रुक सकें। मंदिर के मूल ढांचे के साथ कोई छेड़छाड़ न हो। शहरवासियों का विकास भी इस योजना में शामिल है।
पहले चरण में ये विस्तार किया जा रहा
यात्रियों-श्रद्धालुओं के लिए सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है। साथ ही, मंदिर के प्रवेश एवं निर्गम द्वार, नंदी हॉल का विस्तार किया जा रहा है। महाकाल थीम पार्क, महाकाल कॉरिडोर और पार्किंग आदि का निर्माण कराने की योजना है।
दूसरे चरण में ये होगा विस्तार
दूसरे चरण में महाराजावाड़ा, कुंभ संग्रहालय, महाकाल से जुड़ी विभिन्न कथाओं का प्रदर्शन, अन्नक्षेत्र, धर्मशाला, रुद्रसागर की स्कैपिंग, रामघाट मार्ग का सौंदर्यीकरण, पर्यटन सूचना केन्द्र, रुद्रसागर झील का पुनर्जीवन, हरिफाटक पुल और अन्य सुविधाओं का निर्माण शामिल है।
धार्मिक स्थलों का जीर्णोद्धार
राज्य सरकार ने पिछले साल शासन द्वारा संधारित मंदिरों का जीर्णोद्धार करने का निर्णय लिया। साथ ही, पुजारियों के मानदेय में भी तीन गुना वृद्धि की। इस दौरान 30 मंदिरों के जीर्णोद्धार और विकास के लिए 4 करोड़ 82 लाख 36 हजार रुपए की राशि जारी की। अब प्रदेश में मंदिरों को पर्यटन केन्द्रों के स्वरूप में विकसित किया जा रहा है।
तीर्थ स्थानों पर सुविधाओं का विस्तार
प्रदेश के प्रमुख तीर्थ ओरछा और बगलामुखी माता मंदिर नलखेड़ा में तीर्थ-यात्रियों की सुविधा के लिए पौने दो करोड़ से ज्यादा की लागत से सेवा सदन बनवाए जा रहे हैं।

anil mukati Desk
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