महाकाल मंदिर प्रशासन ही धर्म संकट में... भक्त कैसे करेंगे भस्मआरती के दर्शन

Gopal Bajpai

Publish: Dec, 07 2017 11:49:09 (IST)

Ujjain, Madhya Pradesh, India
महाकाल मंदिर प्रशासन ही धर्म संकट में... भक्त कैसे करेंगे भस्मआरती के दर्शन

भस्म आरती को लेकर असमंजस की स्थिति... महानिर्वाणी अखाड़े के महंत के बार-बार बदलते रुख से संशय

उज्जैन. महाकाल शिवलिंग क्षरण रोकने के लिए महाकाल मंदिर प्रबंध समिति की ओर से बदली गई भस्म आरती पूजा को महानिर्वाणी अखाड़े ने अमान्य कर दिया है। भस्मी अब शिवलिंग पर पूरी तरह से कपड़ा ढंककर नहीं चढ़ाई जा रही है। इससे सुप्रीम कोर्ट में प्रस्तुत प्रस्ताव का पालन नहीं होने से मंदिर प्रबंध समिति धर्म संकट में है तो अखाड़े के महंत के बार-बार बदलते रुख से संशय बन रहा है।
महाकाल मंदिर प्रबंध समिति ने भस्मी से शिवलिंग को होने वाले नुकसान की आशंका के चलते यह नई व्यवस्था शुरू की थी। सुप्रीम कोर्ट में २७ अक्टूबर की सुनवाई में क्षरण रोकने के संबंध में प्रस्तुत उपाय-नियमों के प्रस्ताव की सराहना मिलने के बाद भविष्य में कोई नुकसान नहीं हो इसे देखते हुए शिवलिंग पर चारों तरफ कपड़ा लपेटकर ही भस्मी चढऩा अनिवार्य कर दिया था। मामले में ३० नवंबर की सुनवाई के दौरान समिति को फटकार लगाते हुए कोर्ट ने कहा था कि धार्मिक अनुष्ठान कैसे किए जाए, भस्म आरती कैसे हो इस संबंध में कुछ भी नहीं कहा गया है।

कार्रवाई की मांग
महाकाल सेना के प्रमुख पं. महेश पुजारी ने कहा कि सभी की जिम्मेदारी है कि महाकाल के शिवलिंग क्षरण को रोका जाए। कपड़ा लपेटकर भस्म आरती करना आवश्यक है तो मंदिर समिति को इसका पालन करना चाहिए। पं. महेश पुजारी ने कहा कि महानिर्वाणी अखाड़े के महंत महाकाल मंदिर समिति के नियमों विरोध कर समानांतर समिति संचालित करना चाहते हैं। कोई यदि नियमों का पालन नहीं करता है तो उन पर कार्रवाई होनी चाहिए।

समिति और सरकार जाने...
शिवलिंग क्षरण और भस्म आरती को लेकर महंत प्रकाश पुरी का कहना था मामले में समिति और सरकार जाने, मुझे इससे कुछ लेना-देना नहीं है। इस बीच उनकी ओर से कोर्ट में अपील भी ही गई है, लेकिन महंत प्रकाश पुरी का कहना अखाड़े ने याचिका दायर नहीं की है। महंत के इस रवैये से मंदिर समिति के साथ साधु समाज और मंदिर के पुजारी-पुरोहित भी संशय में है।

 

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एक ही दिन में बदल दिए बयान
कुछ दिनों पूर्व भस्म आरती को लेकर मीडिया से चर्चा में महंत प्रकाश पुरी ने कहा था कि भस्म आरती के नियम और प्रस्ताव को लेकर मंदिर समिति ने उनसे कोई बात नहीं की है। इस मसले पर विवाद बढऩे पर अगले ही दिन महंत प्रकाश पुरी ने बयानों से पल्ला झाड़ते हुए कहा था कि मीडिया ने मनमाने तरीके से बयान दिए हैं। इसके लिए अखाड़े ने अवधेशपुरी को दोषी बताया और उनका अखाड़े से बहिष्कार करने की घोषणा कर दी। वहीं नियम और मंदिर की व्यवस्था के लिए समिति के साथ होने की बात कहीं थी।

महंत ने अपील की है...
महानिर्वाणी अखाड़े के महंत प्रकाशपुरी महाराज भले ही कहे कि अखाड़े ने कोई याचिका दायर नहीं की है, लेकिन महंत की ओर से कोर्ट में अपील की गई है। भस्म आरती नियम में राहत के लिए सुप्रीम कोर्ट की शरण ली गई है। मंदिर समिति के निर्देश के साथ परंपराओं का हवाला दिया गया है। इसमें बताया है कि समिति की ओर से कोर्ट के आदेश का हवाला देकर १५०० से अधिक वर्ष की परंपरा को रोक कर शिवलिंग पर कपड़ा लपेट भस्मी चढ़ाने को कहा जा रहा है। भस्म आरती एक परंपरा है और इसका अधिकार महाकाल महाराज को है। भस्म अर्पण महाकाल को किसी भी क्षति के बिना सूखा छिड़काव है, जो लैब द्वारा समर्थित है। भस्म सामग्री रसायनों के बिना तैयार होती है, शिवलिंग के लिए हानिकारक नहीं होती है। इसकी वैज्ञानिक रिपोर्ट भी है। भस्म को अखाड़े द्वारा तैयार की जाती है। इस स्थिति के मद्देनजर भस्मआरती को उसी तरीके से करने की अनुमति से राहत मिल सके। इस के बाद ही सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देने पर मंदिर समिति को कोर्ट की फटकार पड़ी थी।ऐसे तमाम उलझन के चलते प्रशासन और पुजारी सभी में उलझन की स्थिति में है।

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