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मोक्ष देने वाली नदी को उद्धार का इंतजार

शिप्रा शुद्धिकरण के नाम पर करोड़ों खर्च करने के बाद भी नहीं हुआ उद्धार, खान डायवर्सन योजना भी क्षिप्रा को नहीं रख पाई साफ, नर्मदा क्षिप्रा लिंक योजना के बाद भी नदी प्रदूषित

उज्जैन

Published: December 24, 2021 11:57:45 am

अनिल मुकाती, उज्जैन
मोक्षदायिनी क्षिप्रा को प्रदूषण से मोक्ष का इंतजार है। यह इंतजार लंबा होता जा रहा है, लेकिन खत्म नहीं हो पा रहा। इसका कारण क्षिप्रा को स्वच्छ रखने के लिए उठाए गए कदमों का कामयाब नहीं होना। बीते सालों में क्षिप्रा को स्वच्छ व प्रवाहमान बनाने के लिए करोड़ों रुपए के बड़े-बड़े प्रोजेक्ट बनाए, लेकिन नतीजा उम्मीद के मुताबिक नहीं निकला। अब एक बार फिर से से क्षिप्रा को प्रदूषण से मुक्ति की कवायद शुरू हुई लेकिन देखना है कि यह कितनी सफल होगी। इन सब के बीच बड़ा सवाल है कि पिछले 20 सालों में जनता की गाढ़ी कमाई के अरबों रुपए क्षिप्रा को स्वच्छ रखने के लिए पानी की तरह बहाए गए हैं...उसका क्या होगा।
मोक्ष देने वाली नदी को उद्धार का इंतजार
खान डायवर्सन योजना भी क्षिप्रा को नहीं रख पाई साफ, नर्मदा क्षिप्रा लिंक योजना के बाद भी नदी प्रदूषित

यह योजनाएं, जो क्षिप्रा को नहीं कर सकी स्वच्छ
खान डायवर्शन योजना
सिंहस्थ 2016 में करीब एक अरब रुपए खर्च कर खान डायवर्सन योजना बनाई गई। इसमें पाइप लाइन के माध्यम से खान का गंदा पानी राघोपिपलिया से कालियादेह पैलेस के आगे निकाला जाना है। योजना से उम्मीद थी कि क्षिप्रा का जल अब साफ होगा और श्रद्धालु आचमन भी कर सकेंगे, लेकिन यह योजना भी कारगर साबित नहीं हुई। यह योजना सिर्फ 5 क्यूमेक्स पानी को डायवर्ट करने के लिए बनी थी पर वर्तमान में खान में इससे दोगुना पानी आ रहा है। जबकि योजना बनाते वक्त बताया गया था कि जून से सितंबर की अवधि में बारिश के कारण खान का गंदा पानी क्षिप्रा में मिलेगा। वर्तमान खान नदी के जलस्तर बढ़ोतरी होने से राघोपिपल्या पर बने स्टॉपडैम से पानी ओवरफ्लो होकर त्रिवेणी पर क्षिप्रा में मिल रहा है।
नदी संरक्षण योजना
शहर का सीवरेज वाटर को क्षिप्रा में मिलने से रोकने नदी संरक्षण योजना बनी थी। इसमें शहर के 11 नालों के पानी को ट्रीटमेंट कर क्षिप्रा में छोड़ा जाना था। इसके लिए तीन जगह सीवरेज पानी को ट्रिट करने के बाद ही नदी में छोड़ा जाना था। बताया जा रहा है इस योजना के संचालन के लिए नगर निगम को राशि नहीं मिल रही। इससे यह योजना कारगर नहीं हो पाई। इसके अलावा रुद्रसागर में जमा गंदा पानी रामघाट पर पहुंचने से रोकने के लिए भी चार करोड़ की योजना बनाई गई थी। दूषित पानी को रामघाट से आगे छोड़ा जाता है।
नर्मदा-क्षिप्रा लिंक योजना
क्षिप्रा को प्रवाहमान और स्वच्छ बनाए रखने के लिए 432 करोड़ रुपए से नर्मदा-क्षिप्रा लिंक योजना बनाई गई। नदी में नर्मदा जल के अपव्यय के चलते दोबारा से करोड़ों रुपए खर्च कर पाइप लाइन डाली गई। त्रिवेणी के यहां पर पाइप लाइन के माध्मय से क्षिप्रा में नर्मदा जल डाला जा रहा है। नर्मदा-क्षिप्रा लिंक योजना से उम्मीद थी कि इससे नदी में न केवल भरपूर पानी रहेगा बल्की स्वच्छ पानी से श्रद्धालु आचमन भी कर सकेंगे। खान नदी के प्रदूषित पानी मिलने से यह योजना कामयाब नहीं हो पा रही है।
इंदौर में ट्रीटमेंट प्लांट
खान नदी के शुद्धिकरण के लिए इंदौर नगर निगम ने अमृत परियोजना, जेएनएनयूआरएम से सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट नदी किनारे बनाए हैं। साथ ही नदी में मिलने वाले सीवरेज के गंदे पानी को भी नगर निगम ने प्राइमरी लाइनों के जरिए एसटीपी तक ले जाकर उसे साफ किया जा रहा है। यही साफ पानी दोबारा खान नदी में छोड़ा जाता है। बावजूद रास्ते में कई जगह उद्योग व नालों को पानी खान नदी में मिलने से यह प्रदूषित हो रही है। हाल ही में प्रदूषित पानी रोकने इंदौर जिला प्रशासन ने कमेटी भी बनाई है लेकिन इसका क्या असर होगा यह तो आने वाला समय ही बताएगा।
क्षिप्रा को स्वच्छ रखने अब इन तीन उपायों पर मंथन
क्षिप्रा शुद्धिकरण की मांग को लेकर संतों द्वारा किए गए प्रदर्शन के बाद मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान के निर्देश पर जलसंसाधन विभाग, नर्मदा घाटी विकास तथा नगरीय प्रशासन के प्रमुख सचिव ने खान नदी का निरीक्षण किया था। इसमें खान को क्षिप्रा में मिलने से रोकने के लिए तीन विकल्प रखे गए हैं, जिन पर अभी निर्णय होना बाकी है।
नहर- खान के पानी को नहर के माध्यम से क्षिप्रा नदी के मुख्य घाट से बायपास करके कालियादेह महल निकाला जाए। इससे नदी का पानी पूरी तरह से डायर्वट होगा। किसानों को भी पानी मिल सकेगा। हालांकि योजना पर फिर से करोड़ों खर्च होंगे।
सांवेर में स्टॉप डैम- खान के प्रदूषित पानी को सांवेर से पहले रोकने के लिए स्टॉप डैम बनाया जाए। इससे खान का पानी उज्जैन आने से पहले रुक जाएगा। यहां रुके पानी को सिंचाई के लिए उपयोग किया जा सकेगा।
इंदौर में ट्रीटमेंट- खान नदी को स्वच्छ रखने के लिए इसमें सीवरेज के पानी का ट्रीट कर ही नदी में डाला जाया। इससे उज्जैन तक खान का स्वच्छ पानी ही पहुंचेगा। ऐसा होने से नहर या स्टॉपडैम बनाने की जरूरत नहीं होगी। स्वच्छ पानी होने से क्षिप्रा में मिलने से भी परेशानी नहीं आएगी।
इन योजना पर नहीं हुआ काम
- त्रिवेणी संगम पर कच्चा स्टाप डैम की जगह पक्का स्टॉप डैम बनाया जाना। जलसंसाधन विभाग ने तैयार प्रस्ताव किया था। इसमें 5 से 7 मीटर ऊंचाई तथा 80 मीटर लंबा स्टाप डैम बनाने का प्रस्ताव था। करीब 5 करोड़ रुपए की लागत से बनने वाले स्टाप डैम की कार्ययोजना को मंजूरी नहीं मिली। हालांकि इस स्टॉप डैम को राघोपिपलिया के यहां बनाए जाने का भी प्रस्ताव है।
- खान नदी के पानी को नहर से निकालने के लिए भी कार्ययोजना बनाई गई है। करोड़ों रुपए के इस प्रोजेक्ट को भी संभागायुक्त के माध्यम से शासन को भेजा गया है। लेकिन इस पर भी अब तक कोई निर्णय नहीं हुआ है।
- क्षिप्रा नदी पर सांवराखेड़ी डैम बनान की योजना आकार नहीं ले रही है। जलसंसाधन विभाग ने डैम बनाने का प्रस्ताव भी शासन को भेजा है। अगर क्षिप्रा नदी पर डैम बन जाता है तो इससे साफ पानी के साथ क्षिप्रा स्वच्छ होने के साथ प्रवाहमान भी बनी रहेगी।
नदी के किनारों पर बड़े बोरवेल- जानकारों के अनुसार क्षिप्रा के प्रमुख घाट के किनारों पर अगर बड़े बोरवेल कर दिए जाएं तो क्षिप्रा को प्रवाहमान बनाया जा सकता है। पर्व स्नान के हफ्ते भर पहले बोरवेल से पानी डालकर दूषित पानी को आगे बढ़ाया जा सकता है। हालांकि जानकार इसे स्थायी समाधान नहीं मान रहे हैं।

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