इतने रुपए खर्च कर ग्रामीण मंगवाते हैं टैंकर, घर पहुंचने तक हो जाता है आधा खाली

इतने रुपए खर्च कर ग्रामीण मंगवाते हैं टैंकर, घर पहुंचने तक हो जाता है आधा खाली

Mukesh Malavat | Publish: Apr, 16 2019 08:03:03 AM (IST) Ujjain, Ujjain, Madhya Pradesh, India

जहां से रिसता है पानी वहीं लगा देते हैं बर्तन

नागदा. शहर से 11 किमी दूर स्थित ग्राम निंबोदियाकलां में ग्रामीण इन दिनों भीषण जलसंकट से जूझ रहे हैं। हालात यह हो चुके हैं कि ग्रामीणों को पेयजल खरीदकर उपयोग करना पड़ रहा है। किस्मत की मार देखिए, ग्रामीण जहां 500 रुपए खर्चकर पेयजल मंगवा रहे है। वहीं पंचायत के टैंकर जर्जर होने से ग्रामीणों को आधा टैंकर ही पानी उपलब्ध हो पाता है। मजबूर हो चुके ग्रामीणों के समक्ष पंचायत के जर्जर हो चुके टैंकर का उपयोग करने के सिवा कोई चारा नहीं है। मामले को लेकर ग्रामीणों ने सरपंच व सचिव को कई बार चेताया, लेकिन किसी प्रकार के कोई उपयुक्त इंतजाम नहीं किए जा सके।
क्या है मामला
करीब 1900 की आबादी वाले ग्राम निंबोदियाकला में ग्रामीण इन दिनों पेयजल संकट से जूझ रहे हैं। हालात यह है कि ग्राम में मौजूदा आधा दर्जन हैंडपंपों ने दम तोड़ दिया है। अब ग्रामीणों के समक्ष पेयजल खरीदने के अलावा कोई मार्ग नहीं बचा है। ग्रामीण स्वयं की राशि खर्च कर और पंचायत के जर्जर टैंकरों का उपयोग कर पेयजल जुटा रहे हैं।
छेद होने के कारण टैंकर आधा हो जाता है खाली
ग्रामीणों द्वारा खेत पर मौजूदा कुओं से जर्जर टैंकरों को भरा जाता है। चित्र को देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है, कि टैंकर में स्थान से अधिक छिद्र (छेद) हो रखे हैं। छिद्रों को छिपाने के लिए ग्रामीण टैंकर पर प्लास्टिक की पन्नियां व लकडिय़ों की टहनियों को लगाकर पेयजल बचाने की कोशिश करने से भी पीछे नहीं हटते। ग्रामीणों का कहना है कि टैंकर कई माह से खराब पड़े है, लेकिन सरपंच द्वारा टैंकर की देखरेख की ओर ध्यान नहीं दिया गया।
ठीक करवाने के लिए भेजा है
यह बात सही है कि पंचायत के अधीन मौजूदा टैंकर जर्जर हो चुके है। ग्रामीण अपने उपयोग के लिए टैंकर ले जाते है। टैंकर कोई भी सावर्जनिक उपयोग के लिए ले जाता है। एक टैंकर ठीक करवाने लिए भेजा गया है।
गोपाल परमार, सचिव, निंबोदियाकलां
यह बोले ग्रामीण
ग्राम में पेयजल संकट वर्षभर रहता है। इस बार ग्रीष्म ऋतु में अधिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। पांच से सात परिवार जन मिलकर चार दिनों में 500 रुपए का भुगतान कर पेयजल टैंकर मंगवा रहे हैं। टैंकर भी जर्जर हो चुके है। टैंकरों में पानी टिक नहीं पाता आधा पानी ही घरों तक पहुंच पाता है।
जुझारसिंह सिसौदिया, ग्रामीण
ग्राम के मौजूदा जलस्त्रोतों ने दम तोड़ दिया है। ग्रामीणजन खेतों पर पहुंच रहे है। पानी को संचित कर चार से पांच दिनों तक चलना पड़ रहा है। ऐसे में यदि कोई अन्य वैकल्पिक उपाय नहीं किए गए तो जलसंकट और गहराएगा। मामले को लेकर सरपंच को कई बार कहा गया, लेकिन उनकी ओर से कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिल पाता।
पप्पूसिंह डोडिया, ग्रामीण

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