एक साथ जन्में तीन बच्चें, कुल वजन ३.६ किलो, चमत्कार एेसा कि बच गई जान

तराना निवासी गरीब परिवार कि महिला पर डॉक्टरों की मेहरबानी, चरक अस्पताल में आधुनिक इलाज से परिवार को मिली

 

 

उज्जैन। तराना निवासी एक गरीब परिवार की महिला के कम वजनी तीन बच्चों को चरक अस्पताल में नवजीवन मिला। निजी अस्पताल में जन्मे इन बच्चों में से दो का वजन १.३, १.३ व एक का मात्र १ किलो था। बेहद नाजुक इन बच्चों का बचाना किसी चुनौती से कम नहीं था लेकिन चरक अस्पताल के एसएनसीयू यूनिट की आधुनिक मशीनों व स्टॉफ ने इन बच्चों की सतत निगरानी कर इन्हें तंदुरुस्त कर दिया। १२ दिन बाद इन बच्चों में पहले का २.५, दूसरे का २ व तीसरे का वजन २.८ किलो हो गया। चिकित्सकों के अनुसार अब ये नवजात खतरे से बाहर हैं।तराना निवासी परवीन पति सलमान को पहली डिलिवरी के लिए परिजन निजी अस्पताल ले गए। यहां उन्हें तीन जुड़वा बच्चे हुए। इनका वजन कम होने से इन्हें एनआइसीयू में रखने का ५ हजार रोजाना का खर्च बताया। परिवार की स्थिति एेसी नहीं थी कि वे इतना महंगा इलाज करा पाएं। इस पर वे चरक अस्पताल के मातृ एवं शिशु विभाग आए। एसएनसीयू प्रभारी चिकित्सक ने परीक्षण कर जच्चा-बच्चा को भर्ती कर लिया गया। यहां हुए बेहतर इलाज से परवीन व उनका परिवार बेहद खुश है। बगैर किसी खर्च बच्चे यहां स्वस्थ्य हो गए।

बीते साल २२६५ नवजात का उपचार, इस बार ७१२ कासाल २०१८-१९ में चरक अस्पताल के मातृ एवं शिशु विभाग की नवजात शिशु इकाई में 2265 नवजात शिशुओं को भर्ती कर नि:शुल्क उपचार किया गया। वहीं अप्रैल 2019 से अभी तक 712 नवजात शिशुओं का उपचार किया गया। सभी बच्चे स्वस्थ्य हैं। अस्पताल के एसएनसीयू में 20 बेड की क्षमता है। हाल ही में चरक अस्पताल में १0 बेड की न्यूनेटल हाई डिपेंडेंसी यूनिट शुरू की गई है। इसमें बेहद कम वजनी शिशुओं को मां के साथ रखा जाएगा।

निजी अस्पतालों से कमतर नहीं, सरकारी चरकचरक अस्पताल में अत्याधुनिक सुविधाओं व उपकरणों से लैस एसएनसीयू, गहन चिकित्सा इकाई में 1 वेंटीलेटर, 4 सीपेब मशीन, 25 वार्मर एवं 6 फोटो थैरेपी मशीन उपलब्ध है। सीएमएचओ डॉ रजनी डाबर के अनुसार चरक अस्पताल में निजी अस्पतालों से कई अधिक संसाधन व योग्य स्टॉफ तैनात है। यहां नवजातों के लिए सभी आधुनिक सुविधाएं नि:शुल्क उपलब्ध हैं।

राहुल कटारिया Reporting
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