@KUMBH: इस दीए की बाती पृथ्वी से भी बड़ी, बनाया WORLD RECORD

@KUMBH: इस दीए की बाती पृथ्वी से भी बड़ी, बनाया WORLD RECORD
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सिंहस्थ में श्रद्धालुओं को अद्भुत चीजों के भी दर्शन मिल रहे हैं। यहां हिमालय बाबा के शिविर में भव्य दीपक जलाया गया है, जिसकी खास बात यह है कि इसकी बाती 12,742 किलोमीटर लंबी है। यह पृथ्वी के व्यास के बराबर है।


मनीष गीते @ उज्जैन/भोपाल। सिंहस्थ में श्रद्धालुओं को अद्भुत चीजों के भी दर्शन मिल रहे हैं। यहां हिमालय बाबा के शिविर में भव्य दीपक जलाया गया है, जिसकी खास बात यह है कि इसकी बाती 12,742 किलोमीटर लंबी है। यह पृथ्वी के व्यास के बराबर है।

हरिद्वार के श्रीश्री 1008 श्री हिमालय पीठाधीश्वर जगतगुरु रामानुजाचार्य (हिमालय बाबा) के शिविर में यह अद्बुत दीप प्रज्वलित किया गया है। जयसिंह तिराहा के पास हिमालय बाबा के शिविर में यह दीप प्रज्वलित किया गया है।

विश्व कीर्तिमान का दावा
हिमालय बाबा ने पत्रिका को बताया कि इस भव्य दीपक और उसकी बाती की लंबाई के मुताबिक विश्व रिकार्ड बनने जा रहा है। 21 मई को वर्ल्ड रिकार्ड बनने की घोषणा हो जाएगी। इससे पहले, नासिक कुंभ में कश्मीर से कन्याकुमारी की लंबाई के बराबर की बाती जलाई गई थी।

इस भव्य दिए की बाती आधा किमी लंबी और 4 इंच मोटी है, जो सूत की कई शाखाओं से निर्मित है। इसका वजन लगभग तीन टन है। उन्होंने बताया कि यह संसार की अब तक की सबसे बडी दिए की बाती है। यह सिंहस्थ के शुरुआत में यह अखंड ज्योति प्रज्वलित की गई है, जो 21 मई तक प्रज्वलित रहेगी। इस दिए और बाती के निर्माण में करीब एक करोड़ रुपए खर्च किए गए हैं। हिमालय बाबा ने बताया कि इससे पहले यह अखंड ज्योति नासिक कुंभ में भी प्रज्वलित की गई थी, जिसका नाम गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज किया गया है। अब सिंहस्थ के दौरान वे अपना ही रिकॉर्ड तोड़ रहे हैं।

यह भी है खास
हिमालय बाबा बताते हैं कि इस बाती की लंबाई को पूरब से पश्चिम तक पृथ्वी की लंबाई, हिन्दुस्तान की लंबाई, MP की लंबाई, उज्जैन की लंबाई और रामघाट से लेकर महाकाल मंदिर तक करीब आधा किमी को ध्यान में रखकर सहेजा गया है।

उज्जैन सिंहस्थ में प्रज्वलित इस दीपक की बाती पृथ्वी के व्यास के बराबर है। पृथ्वी के भूमध्य रेखा जितनी लंबाई इस बाती की है। पृथ्वी की लंबाई पूरब से पश्चिम तक 12,742 किलोमीटर लम्बी है। इसे सूत के कच्चे धागे से बनाया गया है। इसे आधा किमी की लम्बाई से फोल्ड करने के बाद 500 मीटर लम्बा और 4 इंच मोटी बाती को एकत्र करके रखा गया है। इसका वजन 9 टन है। इसके आधार में 24 फीट भारतीय तिरंगे में लिपटे भारत के नक्शे को रखा गया है। भारत का यह नक्शा अष्ट धातु से निर्मित है।

5 हजार लीटर तेल प्रतिदिन
हिमालय बाबा के मुताबिक इस दीपक में करीब पांच हजार लीटर तिल का तेल डाला जाता है। यह श्रद्धालुओं के सहयोग से जल रही है।

ऐसी है अखंड ज्योति
विश्वशांति महाकुंभ अखंड ज्योत प्रज्वलित करने का उद्देश्य विश्व शांति और विश्व कल्याण है। विश्व की अखंडता, भारत की अखंडता, विश्व की एकता, भारत की एकता, वसुधैवकुटुंबकं, सर्वेभवंतुसुखिनं की भावना से यह कर्म प्रेरित है।

पर्यावरण की रक्षा करती है यह ज्योत
पर्यावरण की रक्षा के लिए यह ज्योत काफी महत्वपूर्ण है। वातावरण में पनपने वाले बैक्टीरिया खत्म हो जाते हैं। इसके जरिए मैग्नेटिक पॉवर निकलने से यह पर्यावरण की रक्षा करती है। ज्योत जलने से सभी का जीवन प्रकाशमय होता है। सभी का जीवन दीपावलीमय रहे।

दर्शन से मिलता है यह फल
ज्योत का दर्शन करने, तिल का तेल डालने से प्रदीक्षणा करने से पूरी पृथ्वी की प्रदीक्षणा का फल प्राप्त होता है। 51 शक्तिपीठों के दर्शन करने का फल मिलता है। 12 ज्योर्तिलिंग, नवग्रह, अष्ट विनायक 108 दिव्य देशों के दर्शन करने का लाभ इस ज्योत के दर्शन करने का लाभ मिलता है।
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