अनूठा महायज्ञ : जिसके लिए बनेगा विशाल कैलाश पर्वत और बाबा अमरनाथ की गुफा...

कलश यात्रा के साथ होगा प्रारंभ, 18 से 24 मई तक श्रीमद्् भागवत कथा का आयोजन किया जाएगा

By: Lalit Saxena

Published: 16 May 2018, 08:21 PM IST

उज्जैन. सात दिवसीय 109 कुंडात्मक शिव-शक्ति महायज्ञ का आयोजन 17 मई गुरुवार से प्रारंभ होने जा रहा है, जिसकी पूर्णाहुति 24 मई को होगी। मंगलनाथ रोड स्थित सांदीपनि आश्रम के सामने होने वाले इस महायज्ञ की शुरुआत 17 मई को प्रात: 9 बजे कलश यात्रा के साथ होगी।

ये होंगे मुख्य आकर्षण
महायज्ञ के इस आयोजन के मुख्य आकर्षण होंगे कैलाश पर्वत और अमरनाथ गुफ ा की झांकी। भक्तों के लिए यहां विशेष कलाकारों द्वारा इसे तैयार किया जा रहा है। श्री अमरधाम शिव शक्ति ? महायज्ञ महोत्सव सेवा समिति उज्जैन एवं सौ गांव के लोगों द्वारा आयोजित तथा निर्देशक एवं महानियंत्रक महंत अमरदास त्यागी बापू के सान्निध्य में होने वाले वाले महायज्ञ के पूर्व मौन तीर्थ गंगाघाट से कलश यात्रा निकलेगी, जिसमें हजारों कलशों के साथ हाथी, घोडे, बैंड, रथ, बग्गी एवं भगवान की झांकी विप्र विद्वानों, साधु संतों महंत, श्री महामंडेश्वरों सहित हजारों धर्मप्रेमी भक्त मंडली, श्रीराम नाम संकीर्तन धुन के साथ कलश यात्रा में शामिल होंगी।

साध्वी जयप्रिया दीदी सुनाएंगी कथा
समिति के गणेशप्रसाद द्विवेदी के अनुसार यज्ञाचार्य डॉ. गणेश प्रसाद द्विवेदी द्वारा संपन्न कराया जाएगा। साथ ही 18 मई से 24 मई तक कथा व्यास साध्वी जयप्रिया दीदी बरसाना के मुखारबिंद से श्रीमद्् भागवत कथा प्रतिदिन दोपहर 2 से शाम 6 बजे तक होगी। प्रतिदिन शाम 7 बजे विशाल भंडारे का आयोजन किया जाएगा।

शहर में यज्ञ तो कहीं महाआरती से प्रसन्न किया न्याय के देवता को
शाजापुर. शनि भगवान की जयंती पर मंगलवार को शहर के शनि मंदिरों में विशेष आयोजन किए गए। सुबह से ही भगवान शनिदेव के दर्शन और पूजन के लिए बड़ी संख्या में भक्त शनि मंदिरों में पहुंचे। फुलखेड़ी हनुमान मंदिर परिसर में भगवान शनिदेव की जयंती धूमधाम से मनाई गई। पंचकुंडीय यज्ञ हुआ। इसमें भक्तों ने जोड़ों के रूप में आहूतियां दी। मुरादपुरा हनुमान मंदिर स्थित शनिदेव के मंदिर में भी सुबह से भक्तों का पहुंचना शुरू हो गया। भक्तों ने भगवान शनिदेव को तेल, मसूर, काला वस्त्र आदि चढ़ाकर पूजन किया। धानमंडी क्षेत्र में स्थित प्राचीन शनिदेव मंदिर पर भी सुबह भक्तों ने भगवान शनिदेव का शृंगार कर पूजन किया। इसके बाद यहां पर आने वाले सभी भक्तों सहित यहां से गुजरने वाले भक्तों को हलुए की प्रसादी का वितरण किया। यहां पर सुबह से लेकर रात तक भक्तों का आना लगा रहा।

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