कोरोना ने बना दिया हाईटेकः पहली बार गूगल मीट पर होगा सामूहिक 'यज्ञोपवीत'

रक्षाबंधन पर ब्राह्मण समाज का हाईटेक ऑनलाइन यज्ञोपवीत, हेमाद्री स्नान, श्रावणी उपाकर्म, पंचगव्य स्नान व जनेऊ संस्कार होगा

By: Manish Gite

Published: 02 Aug 2020, 05:30 PM IST

 

 

 

उज्जैन। घरों तथा अपने-अपने मठ-मंदिर एवं तीर्थ स्थानों में रहकर गूगल मीट एप के माध्यम से इस बार श्रावणी पर्व थोड़ा अलग हटकर ही मनाया जाएगा। अखिल भारतीय ब्राह्मण समाज 3 अगस्त को 'श्रावणी पर्व' का आयोजन करेगा। जिला प्रशासन द्वारा प्रतीकात्मक सीमित मात्रा में प्रतिबंधात्मक अनुमति प्राप्त होने की स्थिति के मद्देनजर सभी विप्र जन अपने-अपने घरों में रहकर गूगल मीट एप के माध्यम से आयोजित करने निर्णय लिया है।

 

अखिल भारतीय ब्राह्मण समाज के अध्यक्ष पंडित सुरेंद्र चतुर्वेदी ने बताया कि श्रावणी ब्राह्मणों का सबसे बड़ा पर्व है। इस बार यह पर्व आचार्य पंडित द्वारकेश व्यास के नेतृत्व में ऑनलाइन डिजिटल वर्चुअल लिंक के माध्यम से सिद्धवट मंदिर तीर्थ पर प्रात: 10:00 बजे से तथा आचार्य पंडित, पंडित राम शुक्ल तथा कपूर शुक्ल के आचार्यत्व में रामघाट पर प्रात: 8 बजे से ऑनलाइन मनाया जाएगा।

 

आचार्यों के सान्निध्य में होगी सारी विधि :-:

उक्त दोनों ही तीर्थ स्थानों पर कोराना महामारी एवं लॉकडाउन के प्रतिबंधात्मक जिला प्रशासन के आदेश के कारण प्रतीकात्मक रूप से आचार्यों के सानिध्य में विधि प्रारंभ की जाएगी। जिसमें सभी सामाजिक बंधुओं को हेमाद्रि, दसबिधि, पंचगव्य स्नान कर विधि-विधान से पूजन एवं श्रावणी पर्व की ऋचाएं पूरी कराई जाएंगी।

 

 

घरों में ही रहें, वहीं से पूरी होगी विधि :-:

सभी लोग अपने घरों में रहें। सुबह 8 बजे से रामघाट से लाइव तथा 10 बजे से सिद्धवट मंदिर तीर्थ से गूगल मीट एप पर जुड़ सकेंगे। पर्व के महत्व और विधान की जानकारी के साथ पूजन करवाया जाएगा। दसविधि भस्म, मृत्तिका, गोबर, पंचगव्य, गोरज, सप्तधान्य, फल, सर्बोषधि, कुशा, स्वर्ण ये दस वस्तुओं से स्नान होगा। घरों में जो लोग एकत्र होंगे, वे मास्क और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करेंगे।

 

यह लगेगी पूजन सामग्री :-:

3 अगस्त को सुबह अपने अपने नियत समय पर गूगल मीट एप्स से प्रारंभ होने वाले उपाकर्म में सब लोग अपने घर में पूजन थाली में दूध, दही, शहद, शकर, गंगाजल, गोमूत्र, गोबर गाय का, घी, कुशा, दूर्वा, भस्म, मिट्टी मंदिर की, जनेऊ जोड़ा, रोरी, चावल, हल्दी, अबीर, गुलाल, सिंदूर, चन्दन, इत्र, कलावा, नारियल, गोल सुपारी 5, गोरी गणेश, दीपक यह सब सामग्री तैयार करके रख लें। विधि विधान से पूजन करवाया जाएगा।

 

स्वस्ति वाचन और गूंजेंगे मंत्र :-:

पवित्रीकरण आचमन, आसन शुद्धि, पवित्रीधारण, शिखा बंधन, स्वस्तिवाचन, संकल्प, हिमाद्रि संकल्प, दन्त धावन, पंचगव्य प्रासन, दसविधि स्नान, गणेश, कलश, भूमि, वेद माता, गायत्री गौरी पूजन, यज्ञोपवीत के संस्कार, ब्रहम गांठ, संपूर्ण विधान सहित यज्ञोपवीत धारण कार्यक्रम में जुडऩे और इसे सफल बनाने की अपील पं. सुरेंद्र चतुर्वेदी, तरुण उपाध्याय, शैलेंद्र द्विवेदी, गौरव उपाध्याय, यश पंड्या, चंदन गुरु, वेदप्रकाश त्रिवेदी, यश जोशी, महेंद्र उपाध्याय, वीरेंद्र त्रिवेदी, हेमंत शास्त्री, स्वप्निल शास्त्री, सुधीर चतुर्वेदी, उपेंद्र पुजारी, अभिजीत दुबे, गोपाल त्रिवेदी, शुभम डब्बावाला, सुयोग शास्त्री, अमृतेश त्रिवेदी, योगेश हाड़ा, नीतेश व्यास आदि ने की है।

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