ग्रामीणों के पास रुपए खत्म, गेहूं के बराबर तौल में मिल रही भिंडी-टमाटर

गांवों में जरूरत की वस्तुओं का अनाज देकर कर रहे आदान-प्रदान

By: Mukesh Malavat

Published: 23 Apr 2020, 01:35 AM IST

बडनग़र (राजेन्द्र अग्रवाल) प्राचीन भारत में जब में सिक्के या कोई मुद्रा का चलन नहीं था, जब वस्तु विनिमय याने अदल-बदल व्यापार होता था, इसमें अनाज देकर कपड़े, बर्तन और जरूरत की अन्य वस्तुएं खरीदते थे। वर्तमान समय में किसी भी जरूरत की वस्तु को खरीदने के लिए हमें रूपया देना होता है, लेकिन कोरोना संक्रमण के कारण करीब एक माह से लॉकडाउन होने के कारण लोग घरों में है और नकद रुपया खत्म हो गया है, ऐसे में गांव में लोग प्राचीन भारत की व्यवस्था वस्तु विनिमय करने को मजबूर हो गए हैं।
उज्जैन तहसील के ग्राम ऊंटवास के ग्रामीण रुपए नहीं होने के कारण आवश्यक वस्तु सब्जी खरीदने के लिए घरों में रखा गेहूं दे रहे है। ग्रामीण पं. सोमेश्वर शर्मा ने बताया लॉकडाउन होने के कारण करीब एक माह से घर पर ही है, जो बचत के रुपए घर में रखे थे व खर्च हो गए है। घरों में अभी गेहंू रखा है इसलिए आवश्यक वस्तु सब्जी, दूध लेने के लिए गेहूं देकर अन्य वस्तु ले लेते हैं।
गांव में 40-45 वर्ष पहले वस्तु विनिमय ही होता था
सेवानिवृत्त पटवारी राधेश्याम व्यास ने पत्रिका से चर्चा में बताया कि मुद्रा चलन के पूर्व सामग्री का ही आदान-प्रदान किया जाता है। नोट व सिक्के प्रचलन में नहीं आए थे और यह व्यवस्था 40-45 साल पहले तक भी हमारे गांव में थी, क्योंकि ग्रामीण व्यक्तियों के पास रुपया नहीं होता था, बाहर आने-जाने के साधन भी नहीं थे गांव में ही लोग आपस में सामग्री देकर अपनी जरूरत की वस्तु का आदान-प्रदान कर लेते थे, फिलहाल ऑनलाइन की व्यवस्था है, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में लोग वर्षो पुरानी वस्तु विनिमय प्रक्रिया को ही अपना रहे है।
ऑनलाइन लाइन के दौर में अनाज से खरीदी
वर्तमान दौर ऑनलाइन का माना जाता है, लेकिन ऑनलाइन स्तर पर धोखाधड़ी के बढ़ते मामले और ग्रामीण क्षेत्र में पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने के कारण नकदी का संकट गहरा गया है। यही कारण है कि ग्रामीण अपने पास रखे अनाज को देकर रोजमर्रा की वस्तुओं को जुटा रहे हैं, लेने वाले भी सब्जी-दूध के बदले अनाज लेने से गुरेज नहीं कर रहे हैं।

Mukesh Malavat
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