scriptVillagers saw the leopard, made a strategy | ग्रामीणों ने देखा तेंदुआ, बनाई रणनीति | Patrika News

ग्रामीणों ने देखा तेंदुआ, बनाई रणनीति

एक दिन सर्चिंग के बाद दोबारा गांव नहीं पहुंचे वन विभाग के कर्मचारी
केवल खानापूर्ति से कर रहे ग्रामीणों की मदद का दावा

उज्जैन

Published: January 12, 2022 12:19:51 am

शाजापुर. जिले के ग्राम निपानिया धाकड़ और जिले की सीमा से लगे ग्राम धतुरिया में पिछले तीन दिनों से ग्रामीण दहशत में जीवन बिता रहे हैं। ग्रामीणों का दावा है कि गांव में तेंदुआ है जो जानवरों का शिकार कर रहा है। जबकि वन विभाग के अधिकारी वहां लक्कड़बग्घे और सियार होने की संभावना जता रहे हैं।
ग्राम निपानिया धाकड़ निवासी नीलेश धाकड़ ने बताया कि मंगलवार सुबह करीब 8.30 बजे मेरे भांजे और उसके साथियों ने अपनी आंखों से तेेदुए को देखा है जो उनके पास से ही निकला। गनीमत रही कि वहां और भी लोग थे। जिसके चलते एक हिरण का शिकार करने उसके पीछे दौड़ रहा तेंदुआ लोगों को देखकर दूसरी तरफ भाग गया। उन्होंने यह भी बताया कि इसकी सूचना उन्होंने पटवारी, तहसीलदार और वन विभाग के अधिकारियों को भी दी थी, लेकिन वे दिनभर इंतजार करते रहे और कोई अधिकारी वहां नही आया। हालांकि एक दिन पूर्व अधिकारियों ने यहां सर्चिंग जरूर की थी और पगमार्क भी लिए थे। जिनके अनुसार वे लक्कड़बग्घे होने की बात कह रहे हैं।
अनुभूति कैंप के बहाने बनाई गांव से दूरी
एक तरफ दो गांव के लोग दहशत में जीवन जी रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ वन विभाग के अधिकारी ग्रामीणों की परेशानी से दूर अनुभूति कैंप के बहाने गांव नहीं पहुंच रहे हैं। जबकि गांव में तेंदुआ होने का दावा कर रहे ग्रामीण न अपने घरों से निकल पा रहे हैं और न ही खेतों की तरफ ध्यान दे पा रहे हैं। मंगलवार को ग्रामीण डरे सहमे वन विभाग के अमले की बाट जोहते रहे। जबकि अनुभूति कैंप में कोई वरिष्ठ अधिकारी नहीं पहुंचा था। बावजूद वन विभाग का अमला अनुभूति कैंप में अपनी उपस्थिति को अनिवार्य बताते हुए गांव से दूर रहा और गांव में एक पटवारी के अलावा वहां कोई नहीं पहुंचा। यही नही उन्होंने किसी के फोन भी रीसिव नहीं किए। जिसके चलते गांव वाले अब काफी डरे हुए हैं।
सैकड़ों लोग हुए जमा बैठक कर की सावधान रहने की अपील
मंगलवार सुबह गांव में नीलेश धाकड़ के भांजों ने गांव में तेंदुआ होने का दावा किया और दूसरे लोगों को भी इसकी जानकारी दी। इसके बाद गांव वालों ने जहां तेंदुआ देखा गया था वहां जमा होकर बैठक की। जहां गांव के वरिष्ठों ने कहा कि सभी लोग सावधानी बरतें। हालांकि तेंदुआ होने की बात पर कोई विश्वास कर रहा है और कोई इसे गांव वालों का डर बता रहा है, लेकिन जंगली जानवरों के शव मिलने से वहां दहशत का माहौल जरूर बना हुआ है।
पहले दिन की थी सर्चिंग, ग्रामीणों को दी थी हिदायत
रविवार के दिन गांव में पहले दिन गांव वालों ने एक हिरण का शव देखा था जिसे किसी जंगली जानवर द्वारा मारा गया था। इसके बाद जब गांव वालों ने वन विभाग को इसकी सूचना दी थी तब वहां मौके पर अधिकारी जरूर पहुंचे थे और जानवरों के पगमार्क भी लिए थे। गांव में पहले दिन काले हिरण को मारने की सूचना मिली थी। जिसका शव भी गांव वाले लेकर पहुंचे थे जिसका वन विभाग ने बकायदा दाह संस्कार कर पंचनामा भी बनाया था। इस पर वन मंडल के त्रिवेणी जोशी, कमलेश सोनी ने ग्राम धतुरिया घटना स्थल पर पहुंच गए। अभी यहां जांच कर ही रहे थे कि जिले की सीमा से लगे ग्राम निपनियां धाकड़ से भी हिरण के जंगली जानवर द्वारा शिकार की सूचना मिली। दोनो जगह एक ही तरीके से जानवर के मारने पर रेस्क्यू दल द्वारा दोनों जगह मुआयना किया गया। ग्राम निपानिया धाकड़ में करीब दो दिन पुराना हिरण का शव मिला था। जिसे लेकर अधिकारी तो लक्कड़बग्घे होने की बात कह रहे हैं, लेकिन गांव वाले तभी से तेंदुआ होने की शंका के चलते दहशत में दिन बीता रहे हैं।
पूर्व में भी मिल चुके बाघ और तेंदुआ
जिले में जंगली जानवरों की आमद कोई नई बात नहीं है। क्योंकि जिले में वर्ष 2016-17 में एक बाघ का रेस्क्यू किया गया था। इसके पहले जिले में दो तेंदुए मिल चुके है। ऐसे में अब फिर से ग्रामीण तेंदुआ होने की बात कह रहे है। देखना होगा कि वन विभाग जंगली जानवर से ग्रामीणों को कैसे राहत दिला पाता हैं।
Villagers saw the leopard, made a strategy
एक दिन सर्चिंग के बाद दोबारा गांव नहीं पहुंचे वन विभाग के कर्मचारी

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