ऐसा क्या हुआ जो बिना जांच किए लौट गया केंद्रीय प्रदूषण बोर्ड का

शहर के उद्योगों से फैल रहे प्रदूषण की शिकायतों पर केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड एवं अन्य विभागों का 9 सदस्यीय जांच दल सोमवार दोपहर शहर पहुंचा। दल ने स्थानीय अधिकारियों के साथ बैठककर टीम गठित की और उसके जांच के लिए निकला। सबसे पहले ग्रेसिम में जांच की।

By: Ashish Sikarwar

Published: 06 Jan 2020, 09:14 PM IST

नागदा. शहर के उद्योगों से फैल रहे प्रदूषण की शिकायतों पर केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड एवं अन्य विभागों का 9 सदस्यीय जांच दल सोमवार दोपहर शहर पहुंचा। दल ने स्थानीय अधिकारियों के साथ बैठककर टीम गठित की और उसके जांच के लिए निकला। सबसे पहले ग्रेसिम में जांच की। उसके बाद गुल ब्रांडशन पहुंचा लेकिन मीडिया को यह बोलकर रोक दिया कि आगे डेंजर जोन प्लांट है तो उसके बाद अधिकारियों मौखिक जानकारी लेकर लौट गए। फिर लैंक्सेस में जांच करने पहुंचे अधिकारियों ने प्लांट का निरीक्षण किया। इस दौरान अधिकारियों के आंखों में जलन होने लगी तो उन्हें चश्मे पहनना पड़े। अंत में ग्रेसिम केमिकल डिवीजन में निरीक्षण कर पहले दिन की कार्रवाई को विराम दिया। मंगलवार को दल उद्योगों से निकलने वाले रसायनों से प्रभावित 22 गांवों में पहुंचेगा। इस दौरान सांसद अनिल फिरोजिया भी इनके साथ मौजूद रहेंगे। कारण सांसद ने ही गांवों की समस्या की शिकायत प्रदूषण बोर्ड को की थी। सोमवार को दल उद्योगों में अभिषेक चौरसिया की शिकायत पर पहुंचा था।
जांच करने पहुंचे अधिकारी मीडिया से बनाते रहे दूरी
शहर पहुंचे दल ने उद्योगों में निरीक्षण के दौरान मीडिया से दूरी बनाए रखी। मीडियाकर्मियों ने बात करने का प्रयास किया तो उन्हें अपने नाम तो छोड़ किस विभाग में किस पद पर हैं यह बताना भी उचित नहीं समझा। इससे स्पष्ट है अधिकारी केवल इतिश्री करने आए थे। इसका उदाहरण गुल ब्रांडशन में जांच के दौरान देखने को मिला जब मीडिया को रोका गया।
शिकायतकर्ता को ही नहीं मिली जांच की सूचना
खास बात यह है जिस अभिषेक चौरसिया की शिकायत पर दल शहर पहुंचा उसे ही सूचना देना भी उचित नहीं समझा। कुल मिलाकर जांच दल किसी भी बाहरी व्यक्ति को जांच में शामिल नहीं होने देना चाहता था।
चौरसिया ने दल पर सवाल खड़े करते हुए बताया उसके द्वारा केंद्रीय एवं राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अलावा मप्र शासन, राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग सहित कलेक्टर को उद्योगों द्वारा फैलाए जा रहे प्रदूषण एवं इससे मानव स्वास्थ्य पर पड़ रहे प्रतिकूल असर संबंधित 10 बिंदुओं की शिकायत की थी।
7 फरवरी तक देना है जवाब
राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग ने हाल ही में मप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड
के चेयरमैन एवं कलेक्टर को नोटिस जारीकर 7 फरवरी तक शिकायत की जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा है। बता दें चौरसिया ने आयोग को भी उद्योगों द्वारा फैलाए जा रहे वायु एवं जल प्रदूषण की शिकायत की थी।
सांसद की शिकायत पर जांच आज
उज्जैन-आलोट सांसद अनिल फिरोजिया ने पिछले दिनों लोकसभा में शहर में स्थापित उद्योगों द्वारा फैलाए जा रहे प्रदूषण का मामला उठाया था। साथ ही केंद्रीय पर्यावरण मंत्री से मुलाकात कर जांच दल से जांच करवाने की मांग की थी। इसी के चलते सोमवार को शहर पहुंचा जांच दल मंगलवार को सांसद की शिकायत की जांच के लिए प्रदूषण से प्रभावित 22 गांवों का दौरा करेगा।
ये अधिकारी थे शामिल
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के पर्यावरण डायरेक्टर सुनील मीणा, क्षेत्रीय प्रदूषण अधिकारी एसएन द्विवेदी, प्रदूषण बोर्ड के अधीक्षक यंत्री एचएस मालवीय, प्रदूषण बोर्ड के प्रयोगशाला प्रभारी डीके बघेला, स्वास्थ्य विभाग के संयुक्त संचालक लक्ष्मी बघेल, श्रम विभाग, कृषि विभाग के संयुक्त संचालक, प्रदेश भूल-जल बोर्ड के वैज्ञानिक के अलावा सीएमओ सतीश मटसेनिया, नायब तहसीलदार अन्नु जैन दल में शामिल था।

Ashish Sikarwar
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