बीएससी की कॉपी में किसने की नंबरों से छेड़छाड़

एमए अंग्रेजी की जांच लंबित, विभाग में ही लिख दिए थे कॉपी में दो पेज

By: rajesh jarwal

Published: 10 Apr 2019, 08:08 AM IST

 

उज्जैन. विक्रम विश्वविद्यालय में बीएससी के एक विद्यार्थी की कॉपी में नंबरों का बड़ा हेरफेर सामने आया है, जिसमें मूल्यांकन के बाद मिले नंबर को सीधे बढ़ा (छेडख़ानी कर) दिया गया और 10 अंक का अंतर आ गया। इसके बाद फेल विद्यार्थी पास हो गया, लेकिन यह विद्यार्थी पूर्व में अपनी उत्तरपुस्तिका की फोटो कॉपी प्राप्त कर चुका था, जिसमें नंबर कम थे। इस मामले में प्रभारी कुलपति एसएस परिहार जांच के आदेश तक दे चुके हैं, लेकिन गड़बड़ी करने वाला अधिकारी नहीं मिल रहा है। मंगलवार को पुनर्मूल्यांकन व पुनर्गणना संभालने वाले अधिकारी ने कुलसचिव डीके बग्गा से शिकायत की। इसमें अधिकारी एक-दूसरे पर पल्ला झाड़ रहे हैं। हालांकि ऐसे हालातों में गोपनीय विभाग की व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई कि परीक्षा और रिजल्ट तैयार करने वाले विभाग में खुले आम गड़बड़ी सामने आ रही है, लेकिन यह कैसे हो रही सामने नहीं आ रहा। बता दें कि पूर्व में एमए अंग्रेजी की उत्तरपुस्तिका में विभाग में ही दो पेज लिख गए। इस मामले में भी दोषी की तलाश जारी है, जो अभी तक नहीं मिला।
गोपनीय विभाग में अधिकारियों में हुई बहस

उत्तरपुस्तिकाओं में गड़बड़ी के चलते गोपनीय विभाग के अधिकारियों में मंगलवार को सीधे बहस हुई। इस घटनाक्रम ने गोपनीय विभाग के मुख्य समन्वयक बीके मेहता और पुनर्मूल्यांकन व पुनर्गणना का काम देखकर केएन सिंह की टकराव को सामने ला दिया है। बता दें कि यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले एमए अंग्रेजी के छात्र दुष्यंत मालवीय के प्रकरण में भी ऐसा हुआ। इसमें उत्तरपुस्तका के मूल्यांकन के बाद 9 अंक मिले। इसके बाद पुनर्गणना में 9 से 18 हो गए। जांच की तो पाया गया कि पूर्व मूल्यांकन के दो पेज खाली छोड़कर लिखवा लिया गया और मूल्यांकन कर दिया गया। इस मामले में गलती पकड़ में आने पर एक कर्मचारी को निलंबित कर दिया और मामले को जांच के नाम पर अटका दिया। इस मामले में शासन स्तर पर भी जांच के लिए पत्र भेजा गया।
नंबर बढ़ाने वाले की तलाश जारी

विवि के गोपनीय विभाग में लगातार गड़बड़ी जा रही है। कॉपियों में नंबरों का हेरफेर सामने आ रहा है। अधिकारी खुद की गलती मानने को तैयार नहीं है। ऐसे में सवाल यह है कि यह गड़बड़ी कर कौन रहा है। साथ ही अधिकारी गड़बड़ी को मान रहे है, लेकिन गड़बड़ी करने वाले की तलाश नहीं कर पा रहे हैं। गोपनीय विभाग के मुख्य समन्वयक बीके मेहता का कहना है कि पुनर्मूल्यांकन और पुनर्गणना का काम उनके पास नहीं है। कुलसचिव डीके बग्गा कहना है कि मामले में तकनीकी गड़बड़ी हुई। इसकी जांच जारी है।
वर्षों से जमे परीक्षा और गोपनीय में कर्मचारी

विक्रम विवि के परीक्षा और गोपनीय विभाग में कर्मचारी वर्षों से जम हुए हैं। कई बार इन कर्मचारियों को अलग-अलग करने की प्रक्रिया शुरू हुई, लेकिन कुछ भी नहीं हुआ। मामले में विधानसभा तक प्रश्र उठे। उच्च शिक्षा विभाग की तरफ से निर्देश मिले कि 25 प्रतिशत के हिसाब से रोटेशन कर कर्मचारियों को बदला जाए, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। कुछ समय के लिए कर्मचारियों को इधर से उधर कर वापस पुरानी वाली जगह पर भेज दिया गया। इससे काम के साथ गड़बड़ी पर लगाम नहीं लग पा रहा है। साथ ही नए कर्मचारी तैयार नहीं हो पा रहे हैं।

rajesh jarwal Reporting
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