scriptWhy is the rain making relief or disaster in ujjain-indore? | आसमान से बरसी राहत को आफत क्यों बना रहे हैं? | Patrika News

आसमान से बरसी राहत को आफत क्यों बना रहे हैं?

उज्जैन-इंदौर जैसे शहरों में प्री-मानसून की पहली ही बारिश ने व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी, कई सवाल खड़े किए?

उज्जैन

Updated: June 14, 2022 12:35:15 am

उज्जैन. प्री मानसून का श्रीगणेश झमाझम बारिश से हुआ तो गर्मी से हलाकान लोगों ने राहत की सांस ली। मगर, यह राहत ज्यादा देर तक ठहर नहीं पाई क्योंकि मानसून के प्रति जिम्मेदारों के बेपरवाह रवैये ने राहत को आफत में तब्दील कर दिया। देश के स्वच्छ शहरों में नंबर वन इंदौर और नंबर 10 उज्जैन महज 2 इंच बारिश भी नहीं झेल पाए। यहां नालों से गंदगी सड़कों पर फैल गई। पूरा शहर कचरा-कचरा हो गया। जहां-तहां कीचड़ फैल गया। और तो और बत्ती भी ऐसी गुल हुई कि लोग रातभर परेशान होते रहे। एक जगह तो बिजली के तार टूटने से महिला काल के गाल में समा गई। इस घटनाक्रम ने जिम्मेदारों की मानसून तैयारियों की पोल खोलकर रख दी। सभी वादे-इरादे पहली बारिश में ही बह गए। ऐसा तो नहीं, समय पूर्व प्री मानसून एक्टिविटी हुई, जिससे तैयारियों का मौका नहीं मिल पाया। तीन-तीन महीने से मानसून को लेकर मेंटेनेंस किया जा रहा है। नालों की सफाई की जा रही है, लेकिन हुआ कुछ भी नहीं। इंदौर-उज्जैन के ये हाल हैं, तो फिर बाकी प्रदेश की कल्पना की ही जा सकती है कि वहां क्या स्थिति बनेगी? इन स्थितियों के बाद आमजन के मन में सवाल उभरा कि आखिर बारिश से निपटने की कैसी तैयारी की गई? या जनता को उसके हाल पर छोड़ दिया गया है? जिम्मेदार आखिर क्यों जनता की परेशानी को नजरअंदाज कर रहे हैं। जनप्रतिनिधि भी जनता की सुविधाओं के प्रति क्यों गंभीर नहीं हैं? सिर पर आ चुके मानसून के बावजूद तैयारियां नहीं होना, बेपरवाह रवैये, लापरवाही के साथ जो होगा, देखा जाएगा... की भावना का ही बेखौफ प्रदर्शन है। क्या स्वच्छता सर्वे में तमगा हासिल कर लेने की कागजी कार्रवाई से इतिश्री कर लेना है या इसकी वास्तविकता का जनता का अहसास कराने की जिम्मेदारी निभाना भी जरूरी है। सवालों की फेहरिस्त तो बहुत लंबी है, जो व्यवस्था और जिम्मेदारों की कार्यप्रणाली को ही कठघरे में खड़ी कर रही है। लेकिन अब भी समय है, जिम्मेदार अब भी जाग जाएं तो जनता परेशानी से बच सकती है। नदी-नालों के साथ सीवरेज लाइन की व्यवस्था को चाक-चौबंद करने के साथ वरिष्ठ अफसरों को जांचना परखना भी होगा। मेंटेनेंस के नाम पर परेशान करने के साथ मानसून में बड़ा हादसा न हो, इसके सकारात्मक प्रयास शुरू करना होंगे। इन प्रयासों के बल पर ही आसमान से राहत बरसेगी आफत नहीं।
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