जाने क्यों नाराज हुई महापौर जोनवाल

पूंजीगत आय पर चर्चा, जनता पर कोई नया कर या वृद्धि नहीं

By: Lalit Saxena

Published: 13 Mar 2018, 08:02 AM IST

उज्जैन. संपत्तिकर, बाजार वसूली आय पर ध्यान नहीं देने व खर्चों पर नियंत्रण नहीं होने को लेकर मेयर इन काउंसिल बजट बैठक में सोमवार को सवाल खड़े हुए। मौजूदा साल में भी संपत्तिकर टारगेट से एक तिहाई वसूली भी नहीं होने पर महापौर मीना जोनवाल सहित मेंबरों ने अमले को आड़े हाथों लिया। कहां कि हम शत प्रतिशत वसूली क्यों नहीं कर पाते। यदि बाजार वसूली हमसे ठीक नहीं होती तो इसे ठेके पर दे दिया जाए। शुरुआत किसी एक जोन से करें। साथ ही नए इंजीनियरों को जोनवाइज वसूली अभियान में लगाओ।
पहले दिन पूंजीगत आय पर चार घंटे मंथन हुआ। मंगलवार दोप. ११.३० बजे से पूंजीगत व्यय व पीएचई संबंधी प्रस्तावों पर चर्चा होगी। नगर सरकार के ६८९ करोड़ के बजट पर सोमवार से एमआईसी में मंथन चला। पहले प्री एमआईसी में सदस्यों ने विभागवार प्रावधानों पर चर्चा की। फिर बैठक शुरू हुई। निगमायुक्त की ओर से भेजे गए प्रस्ताव से पहले संपत्तिकर प्राप्ति पर लंबी चर्चा चली। महापौर ने कहा कि हमारी आय के दो ही प्रमुख स्त्रोत हैं। यदि इन पर ही हमारा फोकस नहीं रहेगा तो निगम की वित्तीय स्थिति मजबूत कैसे होगी। इधर नए बजट में निगम ने कोई नया कर या कर बढ़ोतरी का प्रस्ताव शामिल नहीं किया।
चार क्षेत्रों में टंकी निर्माण पर एमआईसी में आज चर्चा
१२ करोड़ के खर्च का अनुमान, वित्तीय हालात इतने मजबूत नहीं
उज्जैन. बजट २०१८-१९ में चार स्थानों पर पेयजल टंकी निर्माण के प्रस्ताव है। इनके लिए १२ करोड़ से अधिक राशि खर्च होने का अनुमान है। मंगलवार को बैठक में इसके सहित पीएचई के प्रस्तावों पर चर्चा होगी। ऋषिनगर व नानाखेड़ा क्षेत्र की कॉलोनियों में जलापूर्ति के लिए टंकी निर्माण कि घोषणा जनप्रतिनिधि कर चुके हैं। इसके साथ शंकरपुर व विक्रम नगर में भी टंकी निर्माण के लिए भी ५.८० करोड़ का पूरक प्रस्ताव आया है। निगम की वित्तीय स्थिति भी इतनी मजबूत नहीं की एक साल में ही टंकी निर्माण के लिए भारी भरकम मद दें सके। क्योंकि एक साल की अवधि में इतनी आय हो यह भी जरूरी नहीं।
५०.४८ करोड़ टारगेट, १७ करोड़ वसूली
निगम अमला संपत्तिकर टारगेट अनुसार वूसली करने में फिसड्डी साबित हुआ है। मौजूदा साल में संपत्तिकर, अधिभार व उपकरों से ५०.४८ करोड़ की वसूली का लक्ष्य तय था, लेकिन मार्च शुरुआत तक निगम १७ करोड़ रुपए ही वसूल सका है। वित्तीय साल खत्म होने में मात्र १८ दिन और शेष हैं।
हम समझें जवाबदारी, जमा करें कर
शासन से मिलने वाले अनुदान व प्रोजेक्ट फंड को छोड़ दें तो शहर विकास के लिए संपत्तिकर काफी अहम है। इसकी शत प्रतिशत वसूली से ही वार्डों में सड़क, नाली, उद्यान व अन्य विकास कार्यों को गति मिलती है। नागरिकों का भी कर्तव्य है कि वे अपना संपत्तिकर बगैर विलंब जमा करें, ताकी शहर विकास अवरुद्ध ना हों।
एमआईसी में ये हुई चर्चा, नहीं पहुंचने वाले तलब
- मोबाइल कोर्ट चालू हो, ताकी राजस्व में बढ़ोतरी हो तथा लोगों में भय भी रहे।
- निगम के अनुमति प्राप्त स्थानों पर एक समान गुमटी लगे, किराया भी समान हो।
- कई इंजीनियरों के बैठक में नहीं पहुंचने पर महापौर नाराज हुई। तत्काल निगमायुक्त ने उन अधिकारियों को तलब कराया। वे वीआईपी ड्यूटी में थे।
- अपर आयुक्त संजय मेहता बगैर सूचना अनुपस्थित। इस पर नाराजी उठी। इन्हें शोकॉज नोटिस जारी होगा।
- जोनल स्तर तक के अधिकारी निगमायुक्त को बताए बगैर मुख्यालय नहीं छोड़ें, ऐसा होने पर कार्रवाई होगी।
- निगम शाखाओं में लाखों का स्क्रैप हैं, प्रभारी स्वयं उसकी नीलामी अपने स्तर पर करें।
- वाहन अनुबंधित करने में अधिक खर्च लगता है। इससे अच्छा निगम खुद बोलेरो वाहन खरीदें और अधिकारियों को दें। १० वाहन खरीदने पर सहमति।

Lalit Saxena
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