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नए जमाने के साथ स्वतंत्र हुई महिलाएं

पत्रिका के टॉक शो में छात्राओं ने खुलकर रखे अपने विचार, कालिदास गल्र्स कॉलेज में हुआ पत्रिका के 67वे स्थापना दिवस के साप्ताहिक आयोजन का कार्यक्रम

उज्जैन

Updated: March 07, 2022 08:04:03 pm

उज्जैन.
नारी हर काम में सक्षम है। वह चाहे तो कुछ भी कर सकती है। कोई भी व्यक्ति कुछ ठान लेता है तो वह कर दिखाता है। पहले नारियों को भेदभाव की जनर से देखा जाता था। उसे केवल गृहणी के दर्जे से उपर नहीं उठने दिया, लेकिन नए जमाने के साथ महिलाएं स्वतंत्र हुई हैं। आज की नारी घर से बाहर निकल कर सीक्षित हो रही है, नौकरी कर रही है, व्यवसाय ही नहीं उद्योग भी चला रही है। डिजिटल इंडिया में भी महिलाओं ने अपनी शक्ति का बखूबी प्रदर्शन किया है। सोमवार ७ मार्च को उज्जैन के कालिदास गल्र्स कॉलेज में पत्रिका के ६७वे स्थापना दिवस पर आयोजित टाक शो में छात्राओं ने खुलकर अपने विचार रखे। उन्होंने एक ओर बड़ी बात यह भी कही कि पहले महिलाएं बाहर निकलने से इसलिए डतरी थी कि उनके साथ कुछ गलत ना हो जाए, लेकिन सुरक्षा के रूप में भी महिलाएं सक्षम हुई है, जो निजी कंपनियों में सुरक्षा गार्ड की नौकरी से लेकर देश की सुरक्षा में सेना अधिकारी के रूप में अपनी सक्षमता का प्रदर्शन कर रही हैं। कॉलेज की प्राध्यपिका कविता मंगलम ने पत्रिका परिवार को ६७वे स्थापना दिवस की बधाई देते हुए इस आयोजन में छात्राओं की दक्षता का परिचय दिया। वहीं प्राचार्य वंदना गुप्ता ने महिला शक्ति के साथ अपने महाविद्यालय की विशेषताओं के बारे में बताया। प्राचार्य ने कहा कि उनके कॉलेज की प्रतिष्ठा का आकलन इस बात से किया जा सकता है कि पिछले शैक्षणिक सत्र में उनके यहां २४०० छात्राएं अध्ययनरत थी, जो अब बढ़कर २६०० हो गई हैं।
Patrika Talk show
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हमने अपनी मर्जी से अपने पैरों पर खड़े होने की ठानी तो घर वालों ने भी साथ दिया। माता-पिता ने मेरी हर जरूरत को प्राथमिकता दी और मुझे पढ़ाई के लिए और अधिक प्रोत्साहित किया। पत्रिका के माध्यम से प्रत्येक लड़की, महिला को यह बताना चाहती हूं कि यदि आपमें सामथ्र्य है तो किसी से डरने की जरूरत नहीं। आप हर मुसिबत से लडऩे के लिए सक्षम हैं।
-प्रेरणा यादव, छात्रा
अकसर घर के बाहर महिला को सुरक्षित नहीं माना जाता था, लेकिन आज महिलाएं पुरूषों के साथ उनकी क्षमता के अनुरूप खड़ी हैं। जो महिलाएं सिक्षित होती हैं, उनका परिवार भी सिक्षित होता है। सरकार ने जो 'बेटी बचाओ..बेटी पढ़ाओÓ का नारा दिया है उसे सार्थक करने का काम भी महिलाओं की जिम्मेदारी है। पत्रिका के नारी शक्ति के आयोजन काफी उच्छे होते हैं और मैं इससे प्रभावित हूं।
- करीना रामी, छात्रा
पहले लड़कियां, स्त्रीयां घरेलु काम में ही रहती थी, लेकिन आज वे स्वतंत्र होने के साथ हर कार्य में अपना योगदान दे रही है। पत्रिका के इस टाक शो में यह कहना चाहती हूं कि इस प्रकार के आयोजन से हमें अपनी बात रखने का मौका मिलता है, जिसके लिए पत्रिका परिवार का धन्यवाद है।
-शैलजा पांडेय, छात्रा
भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश है और हिजाब हमारी च्वाइस है। इससे किसी को कोई गुरेज नहीं होना चाहिए। बात लड़कियों को देश के बाहर जाकर अध्ययन करने की है तो सेल्फ डिफेंस में परिपक्वता कहीं जाने से रोक नहीं सकती है। यूक्रेन और रूस की लड़ाई में कई देशों के छात्रों का नुकसान हुआ है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि हम विदेश में पढ़ाई करना छोड़ दें।
-अल्फीना काजी, छात्रा
नारी शिक्षा नीति के लिए अपने मुख्यमंत्री को धन्यवाद कि उन्होंने नारी शक्ति को पहचान कर उनके लिए कई योजनाएं शुरू की। आज की लड़कियां खेल, शिक्षा, सुरक्षा, राजनीति, आत्मनिर्भरता में अपना योगदान दे रही हैं। पत्रिका के इस प्रकार के आयोजन प्रशंसा के लायक है।
- दीपशिखा जायसवाल, छात्रा

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