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विश्व पृथ्वी दिवस: ये हैं उज्जैन के धरती पुत्र, वसुंधरा के लिए लिया लिया है संकल्प

हर संडे दो घंटे पर्यावरण के लिए और खुशी हो या गम... पौधे लगाएं हरदम के ध्येय वाक्य के साथ शहर के 175 लोग बने पर्यावरण के प्रहरी, तीन साल में अब लगाए 10 हजार से ज्यादा पौधे, पौधों की सिंचाई के लिए लगाया ड्रिप सिस्टम

उज्जैन

Published: April 22, 2022 11:14:52 am

अनिल मुकाती
उज्जैन. हर साल बारिश के समय कई लोग पौधे लगाते हैं और उनकी देखभाल का संकल्प लेते हैं, लेकिन इस पर पूरी तरह अमल नहीं कर पाते। ऐसे में पौधे पेड़ बनने से ही पहले ही दम तोड़ देते हैं। लेकिन शहर के कुछ लोग ऐसे भी हैं, जो पौधे लगाने के बाद पेड़ बनने तक बच्चों की तरह उनकी देखभाल करते हैं, नियमित रूप से पौधों के लिए पानी और खाद का इंतजाम करते हैं, जानवरों से बचाने के लिए ट्री गार्ड लगाते हैं। जब पौधे पेड़ बनकर छाया और फल देते हैं तो उनकी यह मेहनत सफल नजर आती है। २२ अप्रेल को विश्व पृथ्वी दिवस उज्जैन के कुछ ऐसे ही वृक्षमित्रों की कहानी प्रासंगिक हो जाती है, जो उज्जैन की धरा को हरा-भरा करने के संकल्प के साथ लगातार तीन साल से पौधरोपण कर रहे हैं।
ड्रिप पद्धति से पौधों पर जल की धारा
समिति की ओर से विवेक जायसवाल के सहयोग से विश्वविद्यालय परिसर में एक लाख वर्ग फीट की जाली फेंसिंग की गई, जिसमें वृक्ष मित्रों ने लगभग 1000 पौधे लगाए हैं। इसी परिसर में एक सघन वन का निर्माण किया गया है। लगभग 30 प्रजाति के पौधे इस क्षेत्र में लगाए हैं। इन पौधों को पानी देने के लिए आधुनिक ड्रिप पद्धति का उपयोग किया है, जिससे पौधों को नियमित बूंद बूद पानी मिलता है और पानी का अपव्यय भी नहीं होता। वहीं भारतरत्न स्व.लता मंगेशकर की स्मृति में विक्रम विश्व विद्यालय परिसर में लता वाटिका का निर्माण किया गया
उज्जैन को हरियाली से आच्छादित करने का यह प्रण लिया है वृक्षमित्र सेवा समिति ने। १७५ वृक्षमित्रों की इस समिति के अध्यक्ष अजय भातखंडे बताते हैं कि गिरते भू जल स्तर और बढ़ते तापमान को देखते हुए प्रात: भ्रमण करने वाले मित्रों ने तीन साल पहले वृक्षमित्र सेवा समिति का गठन किया। वृक्षमित्रों ने अपने घर से गेती और फावड़े लेकर पौधरोपण, संगोपन और संवर्धन का संकल्प लेकर कार्य प्रारंभ किया था। पहले चरण में विक्रम विश्वविद्यालय की गणित अध्ययन शाला, माइक्रो बायोलॉजी अध्ययन शाला में 400 पौधे लगाए गए। उसके बाद पाश्र्वनाथ बगीचा, जागृति ढाबा, उज्जैन इंजीनियरिंग कॉलेज, विक्रम विश्व विद्यालय परिसर, वसंत विहार, डाइट परिसर, कन्या छात्रावास, बालक छात्रावास इत्यादि स्थानों पर लगभग १० हजार पौधों का रोपण कर उनका संगोपन और संवर्धन कर रहे हैं।
हर रविवार को जुटते हैं वृक्षमित्र

समिति के ध्येय वाक्य हर संडे दो घंटे पर्यावरण के लिए के तहत वृक्षमित्र निरंतर पौधों को पानी देने, जैविक खाद डालने और खरपतवार निकालने का कार्य करते हैं। समिति द्वारा वन विभाग के साथ मिलकर उज्जैन इंजीनियरिंग कॉलेज परिसर में दो वर्ष पूर्व हरिओम वन में 40 प्रजाति के 3500 पौधे लगाए हैं। आज सभी पौधे वृक्ष बनने की कगार पर हैं। यहां ं शहतूत के पौधों में बहार आई हुई है, जिनका स्वाद वृक्षमित्र ले रहे है। कुलपति आवास के पीछे फलबाग का निर्माण किया, जहां 200 आम, जामुन, जामफल, सीताफल, खिरनी, शहतूत के पौधे लगाए हैं।
खुशी हो या गम, पौधे लगाए हरदम

समिति सदस्य अपने जन्मदिन, वैवाहिक वर्षगांठ, स्मरण दिन के साथ ही अब परिवार में शादी के उपलक्ष्य में भी पौधे लगा रहे हैं। अभी हाल ही में समिति अध्यक्ष अजय भातखंडे की माताजी के निधन पर उन्होंने पर्यावरण सरंक्षण का संदेश देते हुए विद्युत शवदाहगृह में उनकी अंत्येष्टि की। तीसरे दिन चक्रतीर्थ पर 5 बड़, पीपल, नीम के पौधे लगाए और उनके गड्ढे में सारी और अस्थि का विसर्जन किया। श्राद्ध पक्ष में श्रद्धा तर्पण आओ करें पौधों को अर्पण के तहत 51 त्रिवेणी (बड़-पीपल-नीम) का रोपण किया गया। इस वर्ष भी रोड किनारे 100 बड़, पीपल, नीम के पौधों पर ट्री गार्ड लगाकर लगाए हैं।
बगैर वेल्डिंग का कम लागत वाला ट्री गार्ड बनाया

पौधरोपण के पुनीत कार्य में समाजसेवी और वृक्षमित्र आर्थिक सहयोग करते हैं। अब समिति के पास स्वयं के 600 फीट पाइप, मोटर, गड्ढा करने की आधुनिक मशीन, घास काटने की मशीन व अन्य उपकरण उपलब्ध हैं। समिति ने बिना वेल्डिंग के कम लागत वाले ट्री गार्ड बनाने की तकनीक ईजाद की है।
यह हैं समिति के वृक्षमित्र

समिति के अध्यक्ष अजय भातखंडे, सचिव प्रवीण साठे, कोषाध्यक्ष मिलिंद गोखले, कुलदीप मुंडे, खेमजी चंदन, सुनील पेंडसे, श्रीकांत जोशी, मिलिंद लेले, अजय ततवाड़े, आशुतोष पंडित, अमिताभ पंडित, योगेश शुक्ला, लोकेंद्र शास्त्री, गोपाल महाकाल, दीपक शाहपुरकर, अशोक वर्मा, सुदर्शन कौर, अस्मिता भातखंडे, मीरा यादव नियमित और सतत सेवारत हैं। वृक्षमित्र वाट्सएप समूह में लगभग 175 सदस्य हैं। सोशल मीडिया के माध्यम से समय समय पर सूचना देने का कार्य किया जाता है। समय-समय पर सारे सदस्य एकत्र होकर पौधों की सेवा करते हैं।

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