10 हजार किसान डिफाल्टर, 41 करोड़ रुपए कर्ज बाकी

10 हजार किसान डिफाल्टर, 41 करोड़ रुपए कर्ज बाकी

ayazuddin siddiqui | Publish: Sep, 10 2018 05:35:45 PM (IST) Umaria, Madhya Pradesh, India

किसान समाधान योजना

उमरिया. जिले में कृषि विभाग व सहकारिता विभाग न तो ऐसे किसानों से संपर्क कर उन्हे प्रोत्साहित कर रहे हैं और न किसान राशि जमा कर रहे हैं। इस योजना का लाभ उठाने के लिए किसानों को सहकारी समितियों में अपना पंजीयन कराना होगा और राशि की जानकारी देनी होगी। लेकिन अभी तक पंजीयन की संख्या शून्य है। जबकि लगभग एक माह का समय बीत रहा है। ज्ञातव्य है कि जिले में डिफाल्टर किसानों की संख्या 10707 है, जिन पर सहकारी बैंक का 41 करोड़ 49 लाख रुपए का ऋण बकाया है। इस संपूर्ण कर्ज राशि में 16 करोड़ 26 लाख रुपए केवल व्याज की राशि है। ज्ञातव्य हो कि प्रदेश सरकार डिफाल्टर किसानों को कर्ज से उबारने के लिए बीते 1 अप्रैल से किसान समाधान योजना संचालित कर रही है। जो कि 15 जून 18 को समाप्त हो गयी। इस योजना में ऐसे किसानों को कर्ज जमा करने का अवसर दिया जा रहा है जो कि 15 जून 17 की स्थिति तक कर्ज की राशि जमा नहीं कर सके और उन्हे लिए गए कर्ज पर सालाना 12 प्रतिशत सामान्य व्याज सहित 3 प्रतिशत दण्ड व्याज लग रहा है।
यह है राहत का प्रावधान
बताया गया कि जो किसान निर्धारित प्रक्रिया के तहत अपना पंजीयन कराकर अपने कर्ज का मूलधन जो कि फसल सुधार और खाद-बीज आदि के लिए लिया गया था को जमा कर देगें तो उनका संपूर्ण व्याज शासन द्वारा माफ कर दिया जाएगा। इसमें 80 प्रतिशत राशि का भुगतान शासन द्वारा और 20 प्रतिशत राशि समिति द्वारा वहन की जाएगी। इसके बाद किसान को पुन: नया ऋण प्रदान किया जा सकता है। अन्यथा जब तक किसान डिफाल्टर रहेगा उसे नया ऋण प्राप्त नहीं हो सकेगा।
नहीं लगा रहे शिविर
किसानों को योजना में मदद करने यह प्रावधान है कि सहकारी अमले के द्वारा योजना का भरपूर प्रचार प्रसार कर किसानों से व्यक्तिगत संपर्क कर उन्हे योजना से अवगत कराया जाए और उन्हेे कर्ज से मुक्ति दिलाने के लिए प्रेरित किया जाए। लेकिन जिले भर में कृषि विभाग, सहकारिता विभाग न तो किसानों से संपर्क कर रहे हैं और न शिविर आदि के माध्यम से किसानों को जानकारी दे रहे हैं। जबकि 15 जून योजना की अंतिम तिथि है।
हो रहा नुकसान
मानपुर के कृषक चन्द्र भूषण पटेल तथा रामसजीवन यादव ने कहा कि दो वर्ष से उन्हे खेती में नुकसान हो रहा है। पहली बार अल्प वृष्टि के कारण धान की फसल कमजोर रही। गेहूं की खेती की तो गहाई के समय पानी बरस गया इससे काफी गेहूं खराब हो गया। इसलिए कर्ज नहंी चुका पाए। इस वर्ष वे अपना कर्ज चुकाएंगे। लेकिन अभी तक कर्ज चुकाने कोई प्रयास नहीं किया जा रहा है।
पता लगाएंगे
घुनघुटी के कृषक सियाराम विश्वकर्मा ने बताया कि उन्हे अभी तक योजना की ठीक से जानकारी नहीं मिल रही है। ग्रामपंचायत में संपर्क करने से कोई लाभ नहंी हुआ। वे ब्लाक में जाकर पंजीयन का पता करेंगे।
भटक रहे किसान, नहीं मिल रही जानकारी
जिन किसानों को समाधान योजना की जानकारी मिली वे इसके बारे में संपूर्ण जानकारी लेने ग्रामपंचायतों में स्वयं पहुंच रहे हैं लेकिन उन्हे ग्रामपंचायतों में जानकारी नही मिल रही है। उन्हे समितियों के पास भेज दिया जाता है। समितियों में भी टाल मटोल किया जाता है। किसान को न तो समुचित जानकारी दी जाती है और न उनका सहयेाग किया जाता है। समितियों का पूरा ध्यान सिर्फ गेहूं उपार्जन के कार्य पर लगा हुआ है। वहां बैठे कर्मचारी यह कह कर टाल देते हैं कि उपार्जन के समय जब किसान गेहूं लेकर आएगा तब उसे जानकारी दे दी जाएगी।

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