बदहाली का शिकार हैं स्कूलों के सुविधाघर

शासन के निर्देशों को ठेंगा

उमरिया. शहरी व ग्रामीण शासकीय स्कूलों के सुविधाघरों की सफाई व उपयोग के लायक बनाने हेतु शासन द्वारा लगातार नगरीय निकायों व ग्रामपंचायतों को निर्देंशित किया जा रहा है इसके बावजूद स्कूलों के सुविधाघर दुर्दशाग्रस्त हैं। नगरीय निकाय तथा ग्रामपंचायतें शासकीय आदेशों की अवहेलना कर रहीं हैं। जबकि आदेश के परिपालन हेतु जिला शिक्षा केन्द्र द्वारा कई बार जनपद कार्यालयों, ग्रामपंचायतों व नगरपालिकाओं को पत्र लिखे गए हैं। लेकिन उस पर कोई अमल नहीं किया गया। सीइओ जनपद भी इस संबंध में उदासीनता बरत रहे हैं। ज्ञातव्य है कि जिले में 801 प्राथमिक तथा 382 की संख्या में माध्यमिक शालाएं हैं।
जहां लगभग 86 हजार बच्चे अध्ययनरत हैं। 1182 स्कूलों में से 4 सौ से भी अधिक स्कूलें ऐसी हैं जहां के सुविधाघर अत्यंत जर्जर और गंदे हैं। गंदगी के कारण कई सुविधाघरों का तो उपयोग भी नहीं हो रहा है। जबकि सैकड़ों सुविधाघर ऐसे हैं जहां के शिक्षक अपने साधनों से साफ-सफाई कराते हैं। कभी पालक शिक्षक संघ व्यवस्था करा देता है। शत-प्रतिशत स्कूलों में सुविधाघर बने हुए हैं लेकिन स्कूलों के पास साफ-सफाई के अपने संसाधन नहीं हैं, इसलिए उन्हे दूसरी संस्थाओं पर सफाई के लिए आश्रित रहना पड़ रहा है।
ज्ञातव्य हो कि स्कूल सुविधाघरों की साफ-सफाई और रखरखाव के लिए लगभग 3 वर्षों पूर्व आयुक्त नगरीय प्रशासन ने नगरपालिकाओं के लिए आदेश जारी किए थे कि नगरपालिका क्षेत्र में शिक्षा उपकर की राशि से स्कूल सुविधाघरों की सफाई व्यवस्था कराई जाए तथा उन्हे उपयोग के योग्य बनाया जाए। दूसरी ओर सचिव ग्रामीण विकास पंचायती राज्य ने निर्देश दिए थे कि सभी ग्रामपंचायतें पंच परमेश्वर योजना मद की राशि के हिस्से से ग्रामीण विद्यालयों के सुविधाघरों की सफाई और उनका जीर्णोद्धार कराने की व्यवस्था करें। स्कूलों का नियमित रखरखाव व जीर्णोद्धार परिसर की सफाई आदि का कार्य कराया जाए। लेकिन इन आदेशों का न तो नगरपालिका ने और न ही ग्रामपंचायतों ने पालन किया।
नगरीय स्कूलों में भी बदहाली
नगर की कई स्कूलें ऐसी हैं जहां सुविधाघर तो दुर्दशाग्रस्त है ही भवन व परिसर भी बदहाल हैं। इन स्कूलों में कभी सफाईकर्मी नहीं भेजे जाते हैं। भवनों की मरम्मत व रंग रोगन का कार्य भी नहीं कराया जा रहा है। परिसर में कचरे का अंबार लगा हुआ है। 16 जून से नया शिक्षा सत्र भी आने वाला है, इसके बावजूद उदासीनता बरती जा रही है। जबकि इन स्कूलों को नए सत्र में विद्यालय संचालन से पूर्व भलीभांति व्यवस्थित करने के निर्देश दिए जा चुके हैं। स्कूलों का रखरखाव करने शासन ने प्रथम बार यह व्यवस्था की है कि जिला शिक्षा केन्द्र को प्रति स्कूल 36 सौ रुपए की राशि जारी करने का निर्देश दिया गया है। जिला शिक्षा केन्द्र के जिला परियोजना समन्वयक स्कूलों के खाते में रखरखाव हेतु राशि जारी करेंगे। बताया गया कि शासन से राशि शीध्र ही जारी की जाएगी।
यह है सुविधाघरों की हालत
स्कूलों में बने सुविधाघरों की हालत दयनीय है। किसी में दरवाजा तिरछा लगा है तो कहीं पानी की समुचित व्यवस्था नहीं है। इसके अलावा 4 सौ से भी अधिक स्कूलों के सुविधाघर तो ऐसे हैं जिनमें गंदगी भरी होने के कारण उनका उपयोग ही नहीं हो रहा है। इसलिए यहां सुविधाघर बनने के बाद भी बच्चों और स्टाफ के लोगों को निस्तार करने में परेशानी जा रही है। बार-बार ग्रामपंचायत सचिवों और सरपंचो से कहने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। कुछ ग्रामपंचायतों ने तो यह कहकर टाल दिया कि उनके पास भी स्वीपर कहां है जो साफ-सफाई कराएंगे।
इनका कहना है
सुविधाघरों की व्यवस्था सुधारने लगातार संबंधित संस्थाओं से संपर्क किया जाता है और पत्राचार भी किया जाता है लेकिन फिर भी शौचालयों का रखरखाव नहंी किया जाता है। इससे कठिनाइयां आती हैं।
सुशील मिश्रा, डीपीसी जिला शिक्षा केन्द्र उमरिया।

ayazuddin siddiqui
और पढ़े

MP/CG लाइव टीवी

खबरें और लेख पढ़ने का आपका अनुभव बेहतर हो और आप तक आपकी पसंद का कंटेंट पहुंचे , यह सुनिश्चित करने के लिए हम अपनी वेबसाइट में कूकीज (Cookies) का इस्तेमाल करते हैं। हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति (Privacy Policy ) और कूकीज नीति (Cookies Policy ) से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned