पुरानी चित्रकारी से जागरूकता लाने का प्रयास कर रहे प्रशासन के अधिकारी

पुरानी चित्रकारी से जागरूकता लाने का प्रयास कर रहे प्रशासन के अधिकारी

ayazuddin siddiqui | Publish: Apr, 26 2019 10:20:00 AM (IST) Umaria, Umaria, Madhya Pradesh, India

बैगा महिला कलाकारों ने विधानसभा चुनाव के लिए की थी चित्रकारी

उमरिया. विधानसभा चुनाव के दौरान स्थानीय बैगा महिला कलाकारों के माध्यम से मतदाता जागरूकता का देने के लिए प्रशासन द्वारा चित्रकारी कराई गई थी। जिसका उपयोग प्रशासन लोकसभा निर्वाचन 2019 में भी कर रहा है। गौरतलब है कि उक्त चित्रकारी की विशेषता यह है कि आज भी आमजन को मतदान के लिए प्रेरित कर रहा है और बैगा महिलाओं की इस कला को सराहा जा रहा है। पर सवाल यह उठता है कि मतदाता जागरूकता के लिए प्रशासन को जो फंड मिला था, उसका इस्तेमाल नहीं हो पा रहा है। बताया जाता है कि इस चित्रकारी के बदले इन महिलाओं को कुछ पारिश्रमिक दिया गया था।
ग्राम लोढ़ा जिला उमरिया में कार्यरत बैगा आदिवासी महिलाओं ने मतदाता जागरूकता को लेकर तपती धूप में चित्रण अत्यंत रोचक एवं आकर्षक रूप में किया है। चित्रण के समय आने जाने वाले लोग बड़े ध्यान से चित्रों को देखते हुए मतदान पर चर्चा करते दिखाई दिए। इस चित्रण में जोधइया बाई बैगा जो एक राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त महिला चित्रकार हैं, उन्होंने बैगा कला को पहचान दिलाई, उनके द्वारा 80 वर्ष की आयु में चित्रण करना देश के प्रति संवेदना एवं सजगता का परिचय है। चित्र में अन्य कलाकार संतोषी बाई बैगा, झूलन बाई बैगा, सकुन बाई बैगा, राम बाई बैगा, अमर बैगा, संजय बैगा, महेश बैगा आदि कलाकारों ने सहयोग किया और मतदान करने का
संकल्प लिया।
यह चित्र जनगण तस्वीर खाना की बाहरी दीवार पर अंकित है। वहीं दूसरी ओर शहर की तस्वीर देखी जाए तो आज भी पुराने मतदाता जागरूकता के संदेश दीवारों में मतदाताओ को जागरूक कर रहे हैं, लेकिन यह स्लोगन विगत हुए विधानसभा चुनाव के समय लिखवाए गये थे।
वर्तमान समय में उन्हें भी प्रशासनिक स्तर पर नया करने का प्रयास किया गया। जिसमें महज मतदान की तारीख भर लिखकर अपने दायित्वो की इति श्री कर ली। जैसे उत्कृष्ट विद्यालय की दीवार, रेलवे चौराहे के समीप वन विभाग की दीवार, नगर पालिका की दीवार आदि में देखा जा सकता है। जहां एक ओर निर्वाचन आयोग प्रचार प्रसार को लेकर चुनाव को लेकर पानी की तरह पैसा बहा रहा है तो सवाल यह उठ रहा है कि यह पैसा जा कहां रहा है, जबकि इसी समय कुछ स्थानीय लोगों को रंग रोगन, स्लोगन के जरिए रोजगार भी मिल जाता रहा।

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