मशीन और स्टाफ के अभाव में रेफरल केन्द्र बना चंदिया

मशीन और स्टाफ के अभाव में रेफरल केन्द्र बना चंदिया

ayazuddin siddiqui | Publish: May, 12 2019 09:40:00 AM (IST) Umaria, Umaria, Madhya Pradesh, India

दर्जा बढ़ा लेकिन सुविधाएं जस की तस

उमरिया. चंदिया को सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र का दर्जा मिले दो दशक से ज्यादा का समय बीत चुका है लेकिन चिकित्सकीय स्टॉफ व मशीने आज भी प्राथमिक स्तर की ही हैं। जिसके चलते मरीजों की तबियत बिगड़ी कि झट से उमरिया रेफर कर दिया जाता है। एक्स-रे खून जांच से लेकर ओपीडी में मरीजों की जांच के दौरान आए दिन विवाद की स्थिति निर्मित होती है। कुछ दिनों से अस्पताल में उल्टी, दस्त व बुखार जैसी मौसमी बीमारियों के मरीज बढ़े हैं। स्टॉफ न होने से लोगों को खासी दिक्कत झेलनी पड़ रही है। बताया जा रहा है कि चंदिया अस्पताल में चार विशेषज्ञ चिकित्सकों के पद स्वीकृत हैं। इनमे केवल दो ही अपनी सेवाएं दे रहे हैं। इनके अलावा चार स्टॉफ नर्स, तीन लैब टेक्नीशियन, फार्माशिष्ट व नेत्र सहायक अपनी सेवाएं दे रहे हैं। केन्द्र में डॉक्टर के अलावा बीपीएम, एकाउण्टेंट जैसे महत्वपूर्ण पद नहीं भरे गए। अस्पताल में महिलाओं की जांच के लिए सोनो ग्राफी मशीन आज तक नहीं मिल पाई। इसी तरह हड्डी व अन्य प्रकार की एक्स-रे जांच के लिए मरीजों को उमरिया जाना पड़ता है। पर्याप्त मशीने व चिकित्सकीय स्टॉफ न होने से एक्सीटेंडल व गर्भवती महिलाओं को सबसे ज्यादा परेशानी उठानी पड़ती है।
बढ़ रहे उल्टी-दस्त के मरीज
मौसमी बीमारियों का असर बिलासपुर से लगे दूरांचल में ज्यादा देखा जा रहा है। इसके अलावा कौडिय़ा, पथरहठा, मझगवां में भी घर-घर संक्रामक बीमारियां बढ़ रही हैं। कौडिय़ा निवासी देवपाल सिंह गोंड ने बताया बच्चे को तीन दिन से खांसी आ रही है। पहले दिन अस्पताल में डॉक्टर ही मिले। स्टॉफ से किसी कदर मिन्नत कर कुछ दवाइयां मिली लेकिन सुधार नहीं। इसी तरह मझगवां निवासी राजेश कोल, पुरषोत्तम सिंह ने बताया गांव में बुखार, सर्दी जुकाम जैसी रोगों से ग्रसित मरीजों की शिकायतें तेजी से बढ़ रही हैं।
दो सौ ओपीडी मरीज
सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में नगरीय क्षेत्र के अलावा 39 ग्राम पंचायत के मरीज प्रतिदिन ओपीडी में दस्तक देते हैं। औसतन प्रति दिन दो सौ से अधिक मरीज यहां पहुंचते हैं। साल 2017 में चंदिया साुमदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में ही 29 हजार तथा 2018 में 35 हजार से मरीजों ने ओपीडी में दस्तक दी। वर्तमान में दो डॉक्टर में से एक को एमजरेंसी सेवा के रूप में कार्य करना पड़ता है। इसलिए कई बार ओपीडी व डॉक्टर न मिलने की स्थिति में मरीज के परिजनों को अव्यवस्थाओं से दोचार होना पड़ जाता है। जिससे मरीज के परिजन परेशान होते हैं।
इनका कहना है
डाक्टर व चिकित्सकीय स्टाफ की पदस्थापना भोपाल स्तर से होती है। हमने यहां से जानकारी भेज दी है। गर्मियों में मौसमी बीमारियों ेक लिए सभी सामुदायिक स्वास्थ केन्द्रों की मानीटरिंग की जा रही है।
राजेश श्रीवास्तव, सीएमएचओ, उमरिया।

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