खंडहर सुविधाघरों के भरोसे ओडीएफ करने का देख रहे सपना

खंडहर सुविधाघरों के भरोसे ओडीएफ करने का देख रहे सपना

Shiv Mangal Singh | Publish: Sep, 04 2018 04:51:35 PM (IST) Umaria, Madhya Pradesh, India

जिले में स्वच्छ भारत अभियान का निकल रहा दम

उमरिया. जिला प्रशासन ने जनपद पंचायत बिरसिंहपुर पाली के सभी गांवों को अक्टूबर तक ओडीएफ करने की घोषणा की थी। अक्टूबर माह भी बीत गया पर अभी तक 15 फीसदी कार्य ही नहीं हुए हैं। गांवों में वर्षों पहले बने खंडहर पड़े शौचालयों के भरोसे गांवों को ओडीएफ करने का सपना अधिकारियों ने पाल रखा है। जिले में 234 ग्राम पंचायतों में अब तक मात्र तीन ग्राम पंचायतों को खुले में शौच से मुक्त घोषित किया गया है।
गौरतलब है कि जिले में स्वच्छ भारत अभियान का दम निकल गया है। जिले में खंडहर पड़े शौचालय स्वच्छ भारत अभियान की असलियत बयां कर रहे हैं। वैसे तो 2018 तक जिले के सभी गांवों को खुले में शौच से मुक्त (ओडीएफ) करने का टारगेट है। लेकिन आठ माह से अधिक समय बीत गया है। लक्ष्य पूर्ण होते दिखाई नहीं दे रहा है। प्रशासन के सामने अभी भी दो सौ से अधिक ग्राम पंचायतों को ओडीएफ करने का पहाड़ सा लक्ष्य है।
खेत में बना दिए शौचालय
स्वच्छ भारत अभियान का लक्ष्य पूरा करने खेतों में शौचालय बना दिए। ये शौचालय भी भ्रष्टाचार का शिकार होते नजर आ रहे हैं। ग्राम पंचायत भिम्मा डोंगरी में बीते वर्ष दो सगे भाईयों के नाम स्वीकृत शौचालय एक साथ खेत में बना दिए गए। दोनों शौचालयों के बीच एक दीवार रखी गई और एक ही वॉशबेसिन बनाया गया। खेतों के बीच बने ये शौचालय झाडिय़ों से घिरे हैं और इनका शायद ही कभी उपयोग हो पाए। पहले से बने शौचालय तो उपयोग लायक बचे नहीं है नए भी उसी तर्ज पर बनाए जा रहे हैं।
दरवाजा गायब
निर्मल भारत अभियान के तहत वर्ष 2012-13 में जिले में अभियान चलाकर शौचालयों का निर्माण किया गया था। तब 9900 रुपये की लागत से बनने वाले शौचालयों के निर्माण में जमकर भ्रष्टाचार किया गया। यही वजह है कि कहीं गड्ढे नहीं बनाए तो कहीं दरवाजे गायब हैं। अब ऐसे शौचालय बेकार पड़े हैं और लोग चाहकर भी उनका उपयोग नहीं कर पा रहे हैं। जनपद पंचायत बिरसिंहपुर पाली की ग्राम पंचायत भिम्मा डोंगरी, अमिलिहा, महरोई सहित ज्यादातर ग्राम पंचायतों में शौचालयों का निर्माण ठप है। यहां पूर्व में बने शौचालय खंडहर में तब्दील होते जा रहे हैं। अमिलिहा के ग्रामीणों ने बताया कि तीन साल पहले पंचायत ने शौचालय बनाए थे। किसी में गड्ढा नहीं है तो किसी में दरवाजा भी नहीं लगाया है।
35 फीसदी भी नहीं बने शौचालय
शौचालय निर्माण में सबसे दयनीय स्थिति बिरसिंहपुर पाली ब्लाक की ही है। यहां पिछले साल स्वीकृत शौचालयों में 35 फीसदी भी नहीं बना पाए हैं। हालांकि स्वच्छ भारत अभियान के तहत लक्षित शौचालयों का निर्माण 2018 तक किया जाना है लेकिन जिस गति से कार्य हो रहा है उसने प्रशासन को भी चिंता में डाल दिया है। आंकड़ों से साफ होता है कि ग्रामीण क्षेत्रों की 70 फीसदी आबादी के हाथ से लोटा नहीं छूट रहा है। स्वच्छ भारत अभियान के तहत वर्ष 2015-16 में जिले भर में 18 हजार से अधिक व्यक्तिगत शौचालय स्वीकृत हुए थे। इनमें से साढ़े आठ हजार ही बन पाए हैं। प्राप्त जानकारी के अुनसार अनुसार करकेली ब्लाक में 5546 में से 4297, मानपुर ब्लाक में 7755 में से 2873 एवं बिरसिंहपुर पाली ब्लाक में 4999 में से 1450 शौचालयों का निर्माण पूर्ण हो पाया है। इस तरह पिछले सत्र में 18300 में से 8610 शौचालय बने हैं। नए सत्र में करकेली में करकेली में 576, मानपुर में 767 और पाली ब्लाक में 234 शौचालय बने हैं। जिले में आगामी 2018 तक 55 हजार से अधिक शौचालयों का निर्माण किया जाना है। मिली जानकारी के अनुसार करकेली ब्लाक में 21744, मानपुर में 24616 और पाली में 8833 शौचालयों का निमार्ण 2018 तक होना है। शौचालयों का निर्माण और उसके हितग्राहियों द्वारा उसका उपयोग प्रशासन के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है। ऐसे में लक्ष्य को पूरा कैसे होगा समक्ष से परे नजर आ रहा है।
इनका कहना है
शौचालयों के निर्माण में विशेष ध्यान दिया जा रहा है। बीते एक वर्ष पहले 15 ग्राम पंचायतों को ओडीएफ किया गया था। अब लक्ष्य के हिसाब से जल्द शौचालयों का निर्माण कार्य हो रहा है।
आशीष वशिष्ट, सीईओ जिला पंचायत।

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