खाद्यान्न घोटाला उजागर : 2200 बोरी खराब गेहूं खपाने की थी तैयारी, अधिकारी पर गिरी गाज

उमरिया में गेहूं उपार्जन खत्म होने के बाद एक बड़ा घोटाला सामने आया है। अधिकारियों द्वारा व्यापारियों से गठजोड़ कर खराब और राशन दुकानों का गेहूं खपाया जा रहा था।

By: Faiz

Published: 17 Jun 2021, 07:26 PM IST

उमरिया/ मध्य प्रदेश के उमरिया जिले में गेहूं उपार्जन खत्म होने के बाद एक बड़ा घोटाला सामने आया है। अधिकारियों द्वारा व्यापारियों से गठजोड़ कर खराब और राशन दुकानों का गेहूं खपाया जा रहा था। उपार्जन ज्यादा बताकर बाद में खराब और पीडीएस का गेहूं मिलाने का खेल चल रहा था। पहले अधिकारियों द्वारा ज्यादा उपार्जन बता दिया गया। बाद में गोदाम में गेहूं जमा न कराकर हेरफेर किया जा रहा था।

 

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शिकायत के बाद अधिकारियों की जांच में खुलासा

उमरिया के महरोई कैप में शिकायत के बाद जांच करने अधिकारियों को ओपन कैप में हजारों बोरी सरकारी राशन की दुकान और व्यापारियों का खराब गेहूं मिला है। जांच प्रतिवेदन मिलते ही कलेक्टर संजीव श्रीवास्तव ने प्रथम दृष्टया मानपुर क्षेत्र के फूड इंस्पेक्टर यज्ञ दत्त त्रिपाठी को जिम्मेदार मानते हुए निलंबित कर दिया है। कलेक्टर ने जांच के बाद दोषी पाए जाने वालों के विरुद्ध एफआईआर कराने के निर्देश दिए हैं।


कलेक्टर खुद पहुंचे जांच करने

कलेक्टर उमरिया संजीव श्रीवास्तव के अनुसार, लगातार शिकायत मिल रही थी कि उपार्जन जितना बताया गया है, उतनी खरीदी नहीं हुई है। बाहर से गेहूं मंगाकर मिलाया जा रहा है। शिकायत मिलने पर कलेक्टर श्रीवास्तव खुद मौके पर पहुंच गए। इस दौरान यहां पर बताए गए उपार्जन से लगभग 2200 बोरे कम पाए गए। जांच टीम को महरोई कैप में पीडीएस की बोरियों के अलावा खराब गेहूं की भी बड़ी मात्रा मिली है। आशंका जताई जा रही है कि खराब और पीडीएस के गेहूं को व्यापारियों और किसानों के नाम से खरीदी कर खपाने की तैयारी थी।

 

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ये है जांच का विषय

महरोई कैप में उपार्जन केंद्र अमरपुर एवं चिल्हारी क्षेत्र के किसानों से रबी विपणन वर्ष 2021 का गेंहू खरीदा गया है। जांच के दौरान खरीदी गई कुल मात्रा में से 1000 क्विंटल गेंहू मौके में कम पाया गया। राशन की दुकान का गेंहू ओपन कैंप तक कैसे पंहुचा, इसकी जांच शुरू कर दी गई है। मामले में अनियमितता मिलने पर फूड इंस्पेक्टर को निलंबित किया गया है।

 

खरीदी के बाद भी नहीं कराई थी स्टैकिंग

बताया गया कि अधिकारियों द्वारा खरीदी खत्म होने के बाद भी स्टैकिंग के लिए गेहूं गोदामों में जमा नहीं कराया था। बाद में बाहर से गेहूं मंगाकर मिलाकर जमा कराने की तैयारी चल रही थी।


क्या कहते हैं कलेक्टर

उमरिया कलेक्टर संजीव श्रीवास्तव ने बताया कि, महरोई में अनियमितता की शिकायत मिली थी। उपार्जन की जितनी मात्रा बताई जा रही थी, उससे 2200 बोरी कम गेहूं मिला है। खरीदी समाप्त होने के बाद भी गेहूं जमा नहीं कराया गया था। जांच करने के लिए गया तो कम गेहूं मिला। साथ ही, बड़ी मात्रा में पीडीएस का अनाज मिला है।

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