पुत्र की लम्बी उम्र की कामना के लिए महिलाओं ने रखा हलषष्ठी व्रत

पुत्र की लम्बी उम्र की कामना के लिए महिलाओं ने रखा हलषष्ठी व्रत

Shiv Mangal Singh | Publish: Sep, 02 2018 05:39:23 PM (IST) Umaria, Madhya Pradesh, India

उत्साह के साथ मनाया त्योहार

उमरिया. हरछट का पर्व शनिवार को महिलाओं ने मनाया जिसके पीछे यह बताया जाता है कि उक्त व्रत महिलाएं अपने पुत्र के लंबी उम्र के लिए रखती हैं। इसके पीछे यह भी कहा जाता है कि यह व्रत पुत्रवती महिलाएं ही रखती हैं दोपहर को कास, पलास के साथ बलदाऊ की पूजा हुई। विशेष भोग उपरांत महिलाओं ने फलाहार किया। त्योहार का असर बाजार में भी देखने को मिला। दही, बांस की टोकनी व पूजन सामग्री के भाव मनमाने दाम में मिले। हलषष्ठी पर्व को लेकर बाजार में दही, बांस से बनी टोकनी की एक दिन पहले बाजार में खून डिमाण्ड थी। आमतौर पर ४०-५० रुपए प्रति लीटर बिकने वाला दही ८०-१०० रुपए तक मिला। यही हाल बांस के बने टोकनी का था। ये भी १००-१५० रुपए तक बिके। दोपहर से घर-घर बलदाऊ की पूजा प्रारंभ हुई। महिलाओं ने पूजा के लिए भूमि को लीपकर गड्ढा खोदकर तालाबनुमा आकार दिया। कास, पलाश की शाखा बांधकर इससे बनाई गई हरछठ को विराजमान किया गया। पूजा में चना, जौ, गेहूं, धान, अरहर, मक्का, मूंग, सूखी धूल, हरी कुजरिया, भुने हुए चने तथा जौ की बाली बददाऊ को अर्पित की गई। पूजन उपरांत महिलाओं ने एक दूसरे को प्रसाद दिया। यह सिलसिला पुराना पड़ाव, शांतिमार्ग, खलेशर, कैम्प, झिरिया मोहल्ला सहित अन्य बस्तियों में देर शाम तक चलता रहा। घुनघुटी कॉलोनी में हलषष्टी पर्व की चहल-पहल देखी गई। महिलाओं ने प्रतिवर्ष भाद्रपद माह की छठी शनिवार को व्रत रखकर पूजा पाठ की। शाम को पसही चावल, महुआ का विशेष आहार गृहण किया। गांव में पूनम नायक, रजनी शिवहरे, शांति एवं दुर्गा, सत्या, वर्षा आदि ने व्रत रखा। उन्होंने बताया वे पिछले कई साल से व्रतरखकर विधिविधान से पूजन कर रही हैं। इससे ईश्वर पुत्र को दीर्घायु का आर्शीवाद देते हैं। इसी तरह पाली में उपाध्याय मोहल्ला, चंदिया में चौपड़ा, गढ़ी व अस्पताल तिराहा की आवासीय बस्ती में महिलाओं ने पर्व मनाया और अपने पुत्र की लम्बी उम्र की कामना ईश्वर से की।

महिलाओं ने रखा व्रत, श्रद्धा के साथ की पूजा अर्चना
बिरसिंहपुर पाली. हरषठ का पर्व नगर सहित क्षेत्र में बड़े ही श्रद्धा उल्लास के साथ भक्तमय वातावरण में मनाया गया। महिलाएं व्रत पालन के पूर्व नए वस्त्र धारण कर पूजा स्थल में उपस्थित हुए जहाँ श्रद्धा मुताबिक पूजा अर्चना कर बांस के पात्र में नैवेद्य प्रसाद भूंजे हुए चना महुआ व भैंस के दही दूध आदि का भोग लगाया। कहा जाता है कि हल षष्ठी पर्व भाद्रपद कृष्ण षष्ठी को यह व्रत भगवान श्रीकृष्ण के ज्येष्ठ भ्राता श्री बलरामजी के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। इसी दिन श्री बलरामजी का जन्म हुआ था। हल षष्ठी की व्रतकथा इस प्रकार है। जानकारों के मुताबिक प्राचीन काल में एक ग्वालिन थी उसका प्रसवकाल अत्यंत निकट थाए एक ओर वह प्रसव से व्याकुल थी तो दूसरी ओर उसका मन गौ.रस ;दूध.दहीद्ध बेचने में लगा हुआ था। उसने सोचा कि यदि प्रसव हो गया तो गौ.रस यूं ही पड़ा रह जाएगा। यह सोचकर उसने दूध.दही के घड़े सिर पर रखे और बेचने के लिए चल दी किन्तु कुछ दूर पहुंचने पर उसे असहनीय प्रसव पीड़ा हुई। वह एक झरबेरी की ओट में चली गई और वहां एक बच्चे को जन्म दिया। वह बच्चे को वहीं छोड़कर पास के गांवों में दूध.दही बेचने चली गई। संयोग से उस दिन हल षष्ठी थी। गाय.भैंस के मिश्रित दूध को केवल भैंस का दूध बताकर उसने सीधे.सादे गांव वालों में बेच दिया।उधर जिस झरबेरी के नीचे उसने बच्चे को छोड़ा थाए उसके समीप ही खेत में एक किसान हल जोत रहा था। अचानक उसके बैल भड़क उठे और हल का फल शरीर में घुसने से वह बालक मर गया। इस घटना से किसान बहुत दुखी हुआ, फिर भी उसने हिम्मत और धैर्य से काम लिया। उसने झरबेरी के कांटों से ही बच्चे के चिरे हुए पेट में टांके लगाए और उसे वहीं छोड़कर चला गया।

MP/CG लाइव टीवी

Ad Block is Banned