जांच हुई तो निकल सकता है करोड़ो का ईपीएफ में हेरफेर

कोयला अनलोडिंग मजदूरों के साथ ठेकेदार कर रहा है धोखाधड़ी
संजय गांधी ताप विद्युत गृह का मामला

By: ayazuddin siddiqui

Published: 28 May 2020, 09:00 AM IST

उमरिया. संजय गांधी ताप विद्युत केंद्र बिरसिंहपुर में कोयला अनलोडिंग का काम करने वाले लगभग 600 से 700 ठेका मजदूरों द्वारा काम बंद हड़ताल के बाद भी मजदूरी भुगतान में भारी गोलमाल हो रहा है। लॉकडाउन के दौरान जब सब कुछ ठप था, तब भी ये श्रमिक भारी असुरक्षा के बीच काम करते रहे, जबकि न तो उनका पुलिस वेरिफिकेशन किया गया, न स्क्रीनिंग कराई गई और न ही मास्क और सेनेटाइजर का वितरण किया गया। बावजूद इसके उन्हें मजदूरी देने में ठेकेदार द्वारा की जा रही आनाकानी पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े करती है। जिसमें एमपीईबी संजय ताप बिजली घर से लेकर राज्य शासन का श्रम विभाग और जिला प्रशासन भी सवालों के घेरे में है।
अब जब मजदूरी भुगतान का पेंच फंसा है तब एक-एक करके सारी परतें बाहर आ रही हैं। जिनसे पता चल रहा है कि कोल साइडिंग के जंगल में झोपड़ी बनाकर रह रहे इन श्रमिकों को बुनियादी सुविधाएं भी प्राप्त नहीं हैं। ठेके के पावर जेनरेशन कम्पनी विद्युत मंडल द्वारा दिये गए वर्क आर्डर की शर्तों के नियमानुसार श्रमिकों का मजदूरी भुगतान सीधे उनके एकाउंट में किया जाना चाहिए, लेकिन डिजिटल इंडिया के सपने और लेबर लॉ की अवहेलना कर दस वर्षों से उन्हें साइट पर ही अधिकारियों के सांठगांठ से नकद भुगतान किया जाता रहा है। यही नहीं ज्यादातर श्रमिकों का न तो ईपीएफ काटा जाता है और यदि काटा भी जाता रहा तो जिनके नाम से ईपीएफ काटा गया क्या वही यहां कोयला अनलोडिंग का काम करने वाले प्रमाणित मजदूर है जिन्हें न मिनिमम वेजेज और कोई दूसरी सुविधाएं दी जाती हैं लॉकडाउन के दौरान श्रमिक अपनी मजदूरी मांग कर रहे हैं, तब ठेकेदार की ढाल बने अधिकारी नगद और अकाउंट का पेंच खड़ा कर भुगतान लटका रहे हैं। हैरान करने वाली बात यह है कि जब पिछले दस साल से ज्यादा समय से लगातार नगद भुगतान किया जा रहा था तब किसी ने संवेदनशीलता नहीं दिखाई ।
अधिकारियों का ढोंग
कोयला अनलोडिंग का काम कोयला सर्विसेस वृत्त-2 के अंतर्गत आता है। लॉकडाउन के दौरान मजदूरी भुगतान नहीं होने से भूखों मरने की कगार पर पहुंच गए श्रमिकों ने जब 19 अप्रैल को काम बंद हड़ताल की तब अधिकारी ने यह कहते हुए खुद को इस प्रभार से मुक्त करने का पत्र मुख्य अभियंता को लिखा गया है कि मजदूर नगद भुगतान की मांग कर रहे हैं। चूंकि ठेकेदार कोरबा में है, इसलिए वह पैसा लेकर आ नहीं सकता। लिहाजा नगद भुगतान संभव नहीं है। अब सवाल उठता है कि जब पिछले दस साल से नगद भुगतान ही चल रहा था, तब मजदूरों की मांग में नया क्या था। जिसे मुद्दा बनाया जा रहा है। तात्कालिक परिस्थितियों में यदि उनकी मांग नाजायज थी तो उनके खातों में समय पर मजदूरी की राशि ट्रांसफर कर दी जाती लेकिन ऐसा नही किया गया। ताप बिजलीघर के कोयला अनलोडिंग में लगे 600 से 700 मजदूरों के दसों साल से करोड़ों रुपयों के भविष्य निधि ईपीएफ घोटाले की उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच कराई जाए तो कितने ही भ्रष्ट अधिकारी सींकचों के अंदर नजर आएंगे।

इनका कहना है

कार्यालय की एक प्रक्रिया होती है जिसके तहत मजदूरों का इपीएफ काटा जाता है। उसी हिसाब से सबके इपीएफ काटे गये है। इपीएफ आफिस में सबके रिकार्ड हैं जिन्हें देखा जा सकता है। रही बात आरोपों की तो आरोप तो कोई भी किसी के ऊपर लगा सकता है। ये पब्लिक डोमेन की चीजें हैं। ये कोई छुपाने वाली चीज नही है।
सभी काम नियमानुसार हो रहे है।
एसके जैन
एडीशनल चीफ इंजीनियर संजय गांधी ताप विद्युत केंद्र बिरसिंहपुर पाली

ayazuddin siddiqui
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