scriptInfants are also at risk from infected mothers | संक्रमित माताओं से शिशु को भी खतरा | Patrika News

संक्रमित माताओं से शिशु को भी खतरा

कार्यक्रम: एड्स की बात-सबके साथ

उमरिया

Published: December 02, 2021 08:10:27 pm

उमरिया. एड्स एक ऐसी महामारी है, जिसकी अस्मिता को अवधारणाएं बदलने के साथ-साथ दुनिया के तमाम देशों के बीच परस्पर जबरदस्त विरोधाभाष भी सामने आ रहे। हाल ही में एड्स से बचाव के लिए जो नई अवधारणा सामने आई है, उसके अनुसार एड्स से बचाव के लिए टीव्ही पर नियंत्रण जरूरी है। दरअसल एड्स से पीडि़त पांच युवक सबसे पहले जून 1981 में अमेरिका में पाए गए थे, तभी इस महामारी का पता चला, किन्तु अमेरिकी विशेषज्ञों ने एक अवधारणा यह भी गढ़ी कि यह बिमारी 1970 से ही फैल रही थी, और इसके वायरस का पता चलने से दुनिया के सभी देशों में फैल चुके थे। भारत के बुद्धजीवी भी इस महामारी के संदर्भ में नए सिरे से सोचने लगे हैं कि एड्स दुनिया की बीमारियों में से एक मात्र ऐसी बीमारी है, जो दीन-हीन, कमजोर और गरीब लोगों को ही गिरफ्त में लेती है। यह बात शासकीय आदर्श महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. एमएन स्वामी ने एड्स दिवस के अवसर पर अध्यक्षीय उद्बोधन में कही। अर्थषास्त्री एवं पूर्व में स्वास्थ्य विभाग के शासकीय सेवक पुष्पराज मरावी ने बताया कि एड्स एचआईवी नामक वायरस के संक्रमण से फैलता है और इससे शरीर में रोगों का सामना करने की स्वाभाविक क्षमता क्षीर्ण हो जाती है, जिससे शरीर रोगों का घर बनता जाता है। उन्होंने यह भी बताया कि एड्स एचआईव्ही संक्रमित व्यक्ति से असुरक्षित सहवास, दूषित खून चढ़ाने से, दूषित सुईयो एवं सिरेंजों के उपयोग से, संक्रमित गर्भवती माता से उसके शिशु को फैलती है, किन्तु एड्स से पीडि़त किसी भी व्यक्ति के मेलजोल रखने से, उससे हाथ मिलाने, उसे छूने, गले मिलने, एक ही बर्तन में खाने, बिस्तर, कपड़े के प्रयोग से एवं एक ही स्वीमिंग पुल में नहाने से एड्स नहीं फैलता है। वनस्पतिषास्त्री नीलम दुबे ने कहा कि बहुसंबंध सहवास से बचा जाए। एक बार प्रयोग में लायी गई सुई का इस्तेमाल न किया जाए, व्यवसायिक रक्तदाता से एचआईवी की जांच किए बिना रक्त न लें और यह भी बताया कि वफादार बनना एवं समझदार बनना ही एड्स से एक मात्र बचाव है। कार्यक्रम का संचालन रासेयो के कार्यक्रम अधिकारी रेम सिंह हटिला द्वारा किया गया। इस अवसर पर महाविद्यालय के समस्त शैक्षणिक स्टॉफ के अतिरिक्त छात्र-छात्राओं की उपस्थिति रही।

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