बांधवगढ़ में एक दिन में दिखे उन्नीस बाघ

नववर्ष के प्रथम दिन बांधवगढ़ में बना इतिहास

By: Rajkumar yadav

Published: 04 Jan 2018, 11:24 AM IST

उमरिया. नये वर्ष बांधवगढ़ के लिये कई सौगातें लेकर आया। नव वर्ष के आगमन की पूर्व संध्या पर बफर के तीनों जोनों में नाइट सफारी कर कुशल संचालन चालू किया गया। जिसका पर्यटकों द्वारा भरपूर आनंद उठाया जा रहा है। इसी कड़ी में बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व प्रबंधन की जिम्मेदारी सम्भाल रहे क्षेत्र संचालक मृदुल पाठक के कुशल नेतृत्व तथा निर्देशन में नये वर्ष के प्रथम दिन बांधवगढ के नये इतिहास में नये अध्याय की शुरुआत हुई। इस दिन कोर जोन में 17 बाघ एवं बफर जोन की सफारी में दो बाघों का दर्शन पर्यटकों को हुआ। इस तरह कुल मिलाकर 19 बाघों का एक दिन में दिखना शायद भारत देश के टाइगर रिजर्व का एक रिकार्ड होगा। बताया गया है कि दो वर्ष पूर्व बांधवगढ़ की दयनीय हालत को देखते हुये प्रशासन स्तर पर मार्गदर्शक मंडल द्वारा श्रीपाठक के कुशल नेतृत्व क्षमता को देखते हुये बांधवगढ़ की बागडोर की सौंपने की सिफारिश की थी। जिसे मध्यप्रदेश शासन ने स्वीकार करते हुये बीटीआर की अहम जिम्मेदारी सौपी।
लगभग डेढ वर्षो के कुशल नेतृत्व का नतीजा रहा है कि बांधवगढ़ में बाघो का कुनबा लगातार बढ़ता चला जा रहा है। इसी तरह बाघों का यह कुनबा बढ़ता रहा तो संभवत: आने वाले वर्षो में पुन: टाइगर स्टेट का दर्जा पाने में प्रदेश को कोई नहीं रोक सकता। पर्यटन क्षेत्र में मिली कुछ शिकायतों को ध्यान में रखते हुये नये वर्ष से आन लाइन बुकिंग टिकट के कैसिंल होने की दशा में वह टिकट प्रबंधन कोटे में शामिल की जायेगी, जिससे आन लाइन टिकट बुकिंग में पारदर्शिता दिखाई देगी। प्रबंधन के इस नेतृत्व को वन्य प्राणी विशेषज्ञों ने सराहा है और भविष्य में बेहतर प्रबंधन की उम्मीद जताई है।रिहायशी इलाके में तेंदुए की आहट
उमरिया. जिला मुख्यालय स्थित वार्ड नम्बर 14 डे-कॉलोनी में बीती रात मादा तेंदुए और उसके दो शावकों के आने के संकेत मिले है। इस मामले में स्थानीय डे-कालोनी निवासी श्रवण तिवारी ने बताया कि रात के दूसरी पहर करीब दो बजे क्षेत्र में तेंदुआ विचरण कर रहा था। इस दौरान ईंट भट्ठा संचालक राजा प्रजापति के घर भी काफी देर तक बैठा रहा एवं घर के दरवाजे को खोलने की कोशिश कर रहा था। स्थानीय सेवानिवृत्त डिप्टी रेंजर वंृदावन तिवारी ने खबर की पुष्टि के लिए कई पद चिन्हों को देखा है। बताया जाता है कि वन्य प्राणी मादा तेंदुआ और उसके शावक ग्राम किरन ताल, महरोई के वन क्षेत्र मार्ग से मुख्यालय स्थित रहवासी क्षेत्र में आये थे। बताया यह भी जाता है कि ज्वालामुखी मंदिर के समीप स्थित नाले से होते हुये देर रात डे-कालोनी तक आने के दौरान रहवासी क्षेत्र के कुत्ते सहित बंदरों ने देर तक आवाजेें लगाई है। जिसके बाद सुबह होने से पहले तेंदुआ वन क्षेत्र की ओर चला गया। घटना के बाद से ही क्षेत्र में दहशत का माहौल है।

 

Rajkumar yadav
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned