एसीईसीएल द्वारा की जा रही कार्यवाही पर लगाई जाए रोक

नागरिकों ने अपर कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन

By: ayazuddin siddiqui

Published: 05 Sep 2019, 09:30 AM IST

उमरिया. नौरोजाबाद के हितेश पटेल, अवधेश पटेल, साजीद अली, राजेंद्र प्रसाद गुप्ता, पूरनलाल जायसवाल, सुनीता चौधरी, मो कय्यूम , रानू गुप्ता ने अपर कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर प्रार्थियो के उपर एसईसीएल संपदा अधिकारी द्वारा लोक परिसर अधिनियम की धारा 4 के संबंध में विधि पूर्वक वैधानिक कार्यवाही न किए जाने की मंाग की है। उन्होने बताया कि उनके डबल मंजिला पक्का मकान नौरोजाबाद में बने हुए है जिसमें परिवार सहित रहते है। आवेदगणो के साथ उनके छोटे छोटे बच्चे एवं माता पिता निवास करते है। जो यहां 50 वर्षो से रह रहे है। एसईसीएल प्रबंधन द्वारा आवेदकगणों को लोक परिसर बेदखली अधिनियम 1971 के तहत फार्म ए में नोटिस दिया गया। उक्त नोटिस का जवाब आवेदक गणो के द्वारा प्रस्तुत किया जा चुका है। संपदा अधिकारी एसईसीएल नौरोजाबाद द्वारा आवेदगणो को साक्ष्य प्रस्तुत करने का अवसर दिए बगैर तथा प्रकरण मे कोई अंतिम आदेश पारित किए बगैर प्रकरण के विचाराधीन रहते ही मकान गिराने का आदेश दिया गया जो विधि विरूद्ध है एवं नैसर्गिक है। संपदा अधिकारी एसईसीएल नौरोजाबाद द्वारा आवेदक गण के विरूद्ध कोई अंतिम आदेश पारित नही किया गया तथा आवेद गण द्वारा संपदा अधिकारी से बार बार अपील हेतु अंतिम आदेश की मांग करने पर न तो नकल प्रदान की जा रही है और न ही प्रकरण मे पारित आदेश की जानकारी दी जा रही है। नौरोजाबाद में जो मकान बनाकर रह रहे है उनके पूर्वज कोल माइंस मे ही कार्यरत थे, एवं रिटायर होने के बाद यहीं बस गये थे जो 50 वर्षो से नौरोजाबाद मे रहकर अपना जीवन यापन कर रहे है तथा उनके पास इस भूमि के अतिरिक्त कोई अन्य आवास नही है। उक्त भूमि मे मप्र शासन के द्वारा पट्टो का आवंटन किया गया है। उक्त भूमि की लीज भी माइंस की समाप्त हो चुकी है तथा कोल माइंस के द्वारा लीज का नवीनीकरण भी नही कराया गया । इस प्रकार उक्त भूमि मप्र शासन की भूमि है। जिसमे कालरी प्रबंधन का कोई स्वामित्व या अधिकार नही है। नौरोजाबाद में स्थित सभी भवन गिरा दिए जाते है तो आवेदक गण एवं उसके परिवार को भरी बरसात में आवास विहीन कर उसे खुले आसमान के नीचे रहने के लिए विवश होना पडेगा जिससे आवेदक गणो को अपूर्णनीय क्षति होगी। उन्होने मांग की है कि एसईसीएल प्रबंधन को तत्काल यह आदेश दिया जाए कि वैधानिक कार्यवाही किए बगैर आवेदकगणो को बेदखल न किया जाए। उक्त प्रकरण में यह भी जांच कराई जाए कि उक्त भूमि कालरी प्रबंधन की है या नही।

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