दगना रोकने जिले में धारा 144 लागू

कुपोषण से लडऩे अफसर लगाएंगे गांव-गांव चौपाल

By: ayazuddin siddiqui

Updated: 07 May 2019, 05:19 PM IST

शहडोल/उमरिया. संभाग के आदिवासी अंचलों में अंधविश्वास के फेर में मासूमों को गर्म लोहे से दागने और कुपोषण के खिलाफ अफसरों ने जंग शुरू कर दी है। कलेक्टर स्वरोचिश सोमवंशी ने जहां मासूमों को दागने की कुप्रथा के खिलाफ धारा 144 लागू की है तो दूसरी ओर कुपोषण के रोकथाम की दिशा में गांव-गांव अफसरों को चौपाल लगाने के निर्देश दिए हैं। जिलादण्डाधिकारी उमरिया ने दण्ड प्रक्रिया संहिता 1973 की धारा 144 के अंतर्गत निषेधाज्ञा आदेश किया है। जिसमें कहा है कि उमरिया की सीमाओ के अंतर्गत किसी भी बच्चे को गर्म लोहे की सलाख से दागने एवं किसी भी व्यक्ति द्वारा बच्चों को दागने के लिए प्रोत्साहित नहीं किया जाएगा। बच्चों को दागने की कुप्रथा पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगी। इसी तरह जिला के सीमा अंतर्गत किसी भी व्यक्ति द्वारा किसी भी सार्वजनिक स्थल , आवासीय परिसर मे बच्चों को गर्म सलाख से दागने की इस कुप्रथा को प्रेरित नहीं करेगा। प्रोत्साहन नही देगा और न ही दागेगा। उमरिया जिले की भौगोलिक सीमा की परिधि में किसी भी सार्वजनिक स्थल, आवासीय परिसर में इस आदेश का उल्लंघन किए जाने की दशा में परिसर के स्वामी और प्रबंधक के विरूद्ध दण्डात्मक कार्रवाई की जाएगी।
सांस लेने में तकलीफ और कुपोषण में दगना
ग्रामीण अंचलों में मासूमों के पेट फूलने, सांस लेने में तकलीफ और कुपोषण पर अंधविश्वास के फेर में मासूम बच्चों को गर्म लोहे से दाग दिया जाता है। मासूमों को दागने से संक्रमण का खतरा रहता है। इससे पहले कई बच्चों की मौत भी हो चुकी है। कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी स्वरोचिष सोमवंशी ने बताया कि लगातार संज्ञान में आया कि जिले में कुछ स्थानों पर कुपोषित , कम वजन वाले तथा किसी अन्य बीमारी से ग्रसित बच्चों को चिकित्सालय में प्राथमिक उपचार कराने के वजाए गैर पेशेवर लोगों , घर की बुजुर्ग महिलाओं द्वारा बच्चों को गर्म लोहे की सलाख से दागने की कुप्रथा प्रचलित है। जिससे बच्चों को शारीरिक यातनाओ का सामना करना पडता है तथा बच्चोंं में संक्रमण फैलने की आशंका भी बनी रहती है। जिनका समुचित उपचार नहीं हो पाता और ऐसे में बच्चे असमय काल के गाल में समा जाते है।
ग्रामीणों को दी समझाइश, एनआरसी में भर्ती कराएं कुपोषित बच्चे
कुपोषण और दगना के खिलाफ गांव- गांव चौपाल लगाई जा रही है। मानपुर क्षेत्र में स्वास्थ्य विभाग द्वारा सामुदायिक बैठक का आयोजन कर स्वास्थ्य विभाग के बीपीएम जियादद्ीन एवं बीसीएम द्वारा दागना प्रथा और कुपोषण के संबंध में बताया गया कि यह एक अव्यवहारिक एवं गैर चिकित्सकीय प्रथा है। इससे छोटे बच्चों की जान जा सकती है। साथ ही उन्हें संक्रमण का भी खतरा बना रहता है। ग्रामीणों को चाहिए कि बच्चों के बीमार होने पर निकटतम स्वास्थ्य केंद्र में ले जाकर चिकित्सा कराए। इसी तरह कुपोषण की समस्यां से निदान के लिए जन सामान्य को गर्भवती माताओ एवं बच्चों को अनिवार्य रूप से समय समय पर टीकाकरण कराने की सलाह दी गई। साथ ही बच्चों को संतुलित आहार की भी समझाइश दी गई। इसके बावजूद भी यदि पोषण के प्रकरण सामने आते है तो संबंधित आंगनबाडी कार्यकर्ता या आशा कार्यकर्ता का सहयोग लेकर निकटतम एन आर सी में भर्ती कराने की बात कही गई। ग्राम गोरैया में आशा कार्यकर्ता एवं एएनएम द्वारा गृह भेंट के दौरान मिले कुपोषित बच्चे को एन आर सी में भर्ती कराने के लिए उनके अभिभावकों को प्रेरित किया गया।
इनका कहना है
मासूमों को दागने की कुप्रथा के खिलाफ धारा 144 प्रभावशील की है। कुपोषण को लेकर भी लगातार चौपाल लगाई जा रही है। एनआरसी का अपडेट लिया जा रहा है। कुपोषित बच्चों को भर्ती कराया जा रहा है। दगना और कुपोषण के खिलाफ चौपाल भी लगाई जा रही है।
स्वरोचिश सोमवंशी, कलेक्टर, उमरिया।

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