बांधवगढ़ के घने जंगलो के बीच घोड़छत्र नदी के किनारे है माता का अद्भुत मंदिर

बांधवगढ़ के घने जंगलो के बीच घोड़छत्र नदी के किनारे है माता का अद्भुत मंदिर
बांधवगढ़ के घने जंगलो के बीच घोड़छत्र नदी के किनारे है माता का अद्भुत मंदिर

Ramashankar mishra | Publish: Oct, 06 2019 12:08:34 PM (IST) Umaria, Umaria, Madhya Pradesh, India

यहां हर दिन 20 हजार भक्त लगा रहे हाजिरी
लगभग 12 वर्ष पूर्व बना था मंदिर, दूर-दूर से पहुंचते हैं श्रद्धालु

 

उमरिया. जिला मुख्यालय से लगभग 15 किमी दूर घोड़छत्र नदी के किनारे बांधवगढ़ के विकराल घने जंगल के बच बसी मां ज्वालामाई का धाम बड़ा ही अद्भुत है। उचेहरा स्थित मां ज्वालामाई मंदिर में आने वाले भक्त कभी खाली हाथ नहीं लौटा। लगभग 12 वर्ष पूर्व बने इस मंदिर में चैत्र नवरात्रि व शारदेय नवरात्रि में माता के दर्शन के लिए भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है। मंदिर के प्रमुख पुजारी की माने तो नवरात्रि के इस अवसर पर प्रतिदिन 20 से 25 हजार भक्ता मां के दरबार में पहुंच कर माता रानी का दर्शन लाभ ले रहे हैं। साथ ही भण्डारे का प्रसाद ग्रहण कर रहे हैं।
विलुप्त थी माता
जानकारों की माने तो मां ज्वाला माई का स्थान बहुत ही प्राचीन है। पूर्व में माता विलुप्त अवस्था में थी। जहां उचेहरा व आस-पास के लोग समय-समय पर यहां पहुंचकर पूजन अर्चन करते थे साथ ही चैत्र नवरात्रि में यहां जवारे स्थापित किए जाते थे। जिसके बाद वर्ष 2006-07 में स्थानीय लोगों द्वारा माता रानी के भव्य मंदिर का निर्माण किया गया। मां ज्चालाधाम उचेहरा में लगभग 10 वर्ष से अखण्ड ज्योति प्रज्वलित हो रही है। जानकारों की माने तो वर्ष 2009 से यह अखण्ड ज्योति अनवरत प्रज्वलित हो रही है।
यज्ञ के बाद हुए माता के दर्शन
मंदिर से जुड़े भक्तों व माता की सेवा करने वालों की माने तो माता रानी ने उचेहरा निवासी भंडारी सिंह को स्वप्न दिया था। जिसमें भंडारी सिंह ने माता को शक्ति रूप में सदैव अपने बीच में रहने की बात कही थी। जिससे कि वह उनकी सेवा कर सके। माता ने स्वप्न में ही कहा था कि नदी के किनारे जिस करौंदा के पेड़ के नीचे मै विलुप्त अवस्था में थी वहीं मेरा पुन: प्रादुर्भाव होगा। जिसकी जानकारी ग्रामीणों को हुई तो उनके द्वारा वर्ष 2006-07 में मंदिर का निर्माण कराया गया व विशाल यज्ञ का आयोजन किया गया। बताया जा रहा है कि यज्ञ के दौरान ही संध्या के समय दिव्य प्रकाश आया और करौंदा के पेड़ में समाहित हो गया। इसी दिन मां ज्वाला का प्रादुर्भाव हुआ।
त्रिदेवों की परिक्रमा से पूरी होती हैं मुरादें
मां ज्वाला माई मंदिर परिसर में ही विशाल पीपल का वृक्ष है। जिसके नीचे शिवलिंग, नंदेश्वर महराज की प्रतिमा विराजमान है। मान्यता है कि इन पीपल के वृक्ष के साथ स्थापित त्रिदेवों की परिक्रमा करने वाले भक्त की हर मुरादे पूरी होती है। माँ ज्वाला के ठीक सामने अंजनी पुत्र हनुमान जी की विशाल प्रतिमा स्थापित है। मुख्य द्वार पर भैरव नाथ व शनिदेव की स्थापित है। मंदिर के चारो तरफ विधिवत तरीके से सुन्दर-सुन्दर पेड़ पौधे, फूल लगाए गए हैं जो मंदिर परिसर की शोभा बढ़ा रहे हैं। राधा कृष्ण मंदिर, राम जानकी मंदिर, भारत माता के मंदिर का भी निर्माण कराया गया हैलगभग 150 मीटर की दूरी पर घोड़छत्र नदी की विशाल धारा कल-कल कर बहती है।

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