बाघिन सोलो को देखते ही घेर लेते थे पर्यटक, सैलानियों में चर्चित थी बाघिन

सुरक्षा पर सवाल: शावकों के साथ गांव में बाघिन का था मूवमेंट, ग्रामीणों में थी नाराजगी, पांच माह में पांच शावकों की मौत

By: ayazuddin siddiqui

Published: 18 Oct 2020, 05:35 PM IST

उमरिया. बांधवगढ़ नेशनल पार्क में लगातार बाघों की मौत ने सुरक्षा को लेकर प्रबंधन की कलई खोल दी है। शनिवार को बाघिन और शावक की मौत मामले में प्रबंधन अब तक कारणों का पता नहीं लगा सका है। चर्चित बाघिन और शावक की मौत के बाद सैलानियों और वन्यप्राणी प्रेमी भी दुखी हैं। ये बाघिन सोलो नाम से पहचानी जाती थी। जिस बाघिन की मौत हुई उसे टी 42 के नाम से जाना जाता था। यह वही बाघिन है जिसे पार्क प्रबंधन पर्यटकों को दिखाने के लिए चारों तरफ से जिप्सियों से घेर लेते थे। बाघिन की मौत के बाद दो शावक अभी भी पार्क प्रबंधन की नजरों से दूर है। एक शावक के बारे में पार्क प्रबंधन यह कह रहा है कि गस्ती दल द्वारा देखा गया है। बाघिन और शावक के आसपास फाइटिंग के निशान भी नहीं मिले हैं। इससे दोनों की मौत को लेकर कई तरह के सवाल उठ रहे हैं।
महामन गांव में था मूवमेंट, शिकार की भी आशंका
बाघिन का मूवमेंट महामन गांव के आस पास कई दिनों से रहा है। इसके बावजूद भी ग्रामीणों की आवाज को पार्क प्रबंधन अनसुना करता रहा। फाइटिंग के निशान नहीं मिले हैं। इससे मामले में शिकार की आशंका भी हो सकती है। पार्क के समीप बसे गांव के आसपास बाघिन टी 42 एवं उसके शावकों की मौजूदगी से पूरा गांव दहशत मे था। पार्क प्रबंधन ग्रामीणों की आवाज को दबाता रहा और उनकी मौजूदगी गांव के आस पास बनी रही। आस पास के जानवरों को किल करने से नाराज भी थे।
प्रबंधन की दलील: बाघिन के चोट के निशान
पार्क प्रबंधन द्वारा कहा जा रहा है कि बाघिन कई दिनों से चोटिल देखी गई। सवाल उठता है कि इलाज के लिए क्यों प्रयास नहीं किए गए। पार्क प्रबंधन ने दलील दी है कि बाघिन को ढूंढने के लिए ं आठ हाथियों का एक दल लगाया हुआ था। जब आठ हाथियो का दल एक बाघिन की देख रेख मे लगा हुआ था। निगरानी के बावजूद मौत और शावकों का गायब होना कई सवाल खड़े कर रहा है। पार्क प्रबंधन ने बाघिन और शावक की फोटो भी जारी नहीं की है। इसके चलते प्रबंधन पर कई सवालिया निशान उठ रहे हैं।
पांच माह में पांच शावकों की मौत
बांधवगढ़ नेशनल पार्क के दक्षिण गोहडी उमरहा पहाड़ी के ऊपर गुफा के बाहर दो बाघ शावकों का शव एक सप्ताह पहले मिला था। 9 अक्टूबर को दोपहर 1 हाथी गश्त के दौरान ताला परिक्षेत्र की दक्षिण गोहडी बीट एक गुफा के नजदीक दोनों बाघ शावक देखे थे। अभी तक मौत के कारणों की पुष्टि नहीं हो सकी है। इसके पहले जून में भी बांधवगढ़ पार्क में दो शावकों की मौत हुई थी। जिनकी उम्र 15-20 दिन थी। दोनों बाघ शावक काफी छोटे थे। प्रबंधन ने इसे टेरिटरी स्थापित करने के लिए बाघ द्वारा मारे जाने की बात कही थी। प्रबंधन ने दोनों बाघ शावकों की मौत पर तर्क दिया था कि बाघ द्वारा दोनों शावकों को मारा गया था।
जनवरी में दिए थे पांच शावक, दो की मौत
जानकारी के अनुसार, बाघिन ने पांच शावकों को जन्म दिया था। इसमें एक शावक की मौत पहले ही हो गई थी। चार शावकों के साथ बाघिन 12 अक्टूबर को दिखी थी। इसके बाद शावकों के साथ महामन गांव की ओर चली गई थी। एक शावक की मौत के बाद बाकी के लोकेशन अभी नहीं मिले हैं।
दो चरवाहों पर बाघ ने किया हमला
दुलहरा में मवेशी चरा रहे दो ग्रामीणों पर बाघ ने हमला कर दिया। जानकारी अनुसार शिव प्रसाद पिता लल्ली साहू उम्र 42 एवं राम लावन के ऊपर बाघ ने हमला किया है। बताया गया कि दोनों चरवाहे मवेशियों को चरा रहे थे। चीखने चिल्लाने पर आसपास के ग्रामीणों के पहुंचने पर बाघ छोड़कर भाग गए। घायलों को अस्पताल लाया गया। जहां उनका इलाज किया जा रहा हैं।

एक बाघिन और शावक का शव मिलने की जानकारी मिली थी। अंतिम संस्कार कर दिया गया है। डाग स्क्वायड भी घटना स्थल पर पहुंच पड़ताल की। किन कारणों से मौत हुई, इसका पता लगाया जा रहा है।
वीसेंट रहीम, फील्ड डायरेक्टर

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