अर्जी लगाने पर धौरखोह के संकटमोचन दूर करते हैं भक्तों का कष्ट

दूर-दूर से पहुंच रहे श्रद्धालु

By: ayazuddin siddiqui

Published: 06 Jan 2020, 06:17 PM IST

उमरिया. जंगलो से घिरे उमरिया जिले मे कहने को तो एक से बढ़कर एक दर्शनीय स्थल विद्यमान है। जिनमें कुछ ऐसी भी अदभुत मंदिरें और स्थान है तो अपने आप में अलौकिक हैं। इन्ही में से एक जिले के सलैया ग्राम के तट पर घने जंगलों के बीच स्थापित हनुमान जी का मंदिर है।
जानकारों की मानना है कि यहां हर दर्द की दवा है और दु:खो का निवारण होता है। कहा जाता है कि इस दुर्गम स्थल को सुगम बनाने में स्थानीय लोगो को करीब 20 साल से अधिक का समय लग गया। जिन्होंने जन आन्दोलन कर इस प्रचीन धौरखोह मंदिर को पाया है।
नहीं था पहुंच मार्ग
जिला पंचायत उपाध्यक्ष दिवाकर सिंह ने बताया कि बीस साल पहले यहां आने से डरते थे। यहां आने जाने के लिए रास्ता नही था, लेकिन गांव और सहयोगियों को साथ लेकर लडाई लडी गई और अंतत: जीत दक्षिणमुखी हनुमान जी की हुई और आज यहां दिन रात किसी भी समय कोई भी दर्शन कर रात रूक सकता है। जिसे खाने से लेकर हर प्रकार की सुविधा बजरंग धाम समिति द्वारा उपलब्ध कराई जाती है। इस संबंध मे स्थानीय निवासी व समिति सचिव दुखीलाल यादव बताते है कि घनघोर जंगल होने के कारण यहां रात मे रूक पाना मुश्किल होता था लेकिन अब करीब एक किमी दूर से बिजली पोल के माध्यम से मंदिर तक बिजली पहुंचाई गई है। जिससे अब किसी प्रकार की कोई कठिनाई नही हो रही हैं।
दु:खों का निवारण
हजारों साल पहले एक भारी भरकम चट्टान पर लेटे हुए हनुमान जी को लेकर मंदिर के पुजारी बताते है कि पहले यहां लोग आने मे हिचकिचाहट महसूस करते थे। यहां आने वाले श्रद्वालुओं को नेशनल पार्क के कर्मचारी खदेड देते थे। जिनके भय के साथ साथ जंगली जानवरों का डेरा होने के कारण भक्त और भी भयभीत रहते थे। पुजारी गिरधारी लाल बताते है कि ग्राम ताली, सलैया और अंचला के ग्रामीण खासतौर पर स्थानीय निवासी व जिला पंचायत उपाध्यक्ष दिवाकर सिंह के अथक प्रयासों से यहां बिना भय के भक्त आते है और अपना दु:ख संकटमोचन के पास रखकर निवारण की अर्जी लगाते है जिनको कुछ ही समय मे आराम लगता है।
27 साल तक मुनि ने की थी तपस्या
धौरखोह मे विराजमान दक्षिणमुखी हनुमान मंदिर की पूजा पाठ करते हुए आज से 25 वर्ष पहले एक महाराज ने बेलपत्र खाकर 27 वर्ष तक तपस्या की और फिर समाधी ले ली। जिसके कारण यहां का प्रताप और भी बढ़ गया है। इस संबध मे स्थानीय जनों का कहना है कि अगर जिला प्रशासन इस ओर ध्यान दे और सहयोग करें तो निश्चित रूप से यहां पर्यटन स्थल विकसित किया जा सकता है।

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