गोद लिए गांवों का निरीक्षण करेंगे जिला स्तरीय अधिकारी, बनाएंगे कुपोषण मुक्त

Mahendra Pratap

Publish: Oct, 13 2017 04:41:56 (IST)

Lucknow, Uttar Pradesh, India
गोद लिए गांवों का निरीक्षण करेंगे जिला स्तरीय अधिकारी, बनाएंगे कुपोषण मुक्त

गोद लिए गांव को कुपोषण मुक्त करने के लिए बच्चों के साथ गर्भवती महिलाओं को भी शामिल किया गया।

उन्नाव. गांव को कुपोषण मुक्त करने के लिए बच्चों के साथ गर्भवती महिलाओं को भी शामिल किया गया। जिसके लिए अधिकारियों द्वारा गोद लिए गांवों को कुपोषण के साथ ही ओडीएफ समेत एक दर्जन बिंदुओं पर कार्य करना होगा। इसके लिये आईसीडीएस, खाद्य विभाग, पंचायती राज, ग्राम विकास सहित विभिन्न विभागों को अलग-अलग जिम्मेदारियां दी गई हैं और इसके लिए उन्हें अंक भी दिए जाएंगे। जिससे गांव में कुपोषण की रेटिंग दर्ज की जाएगी।

अधिकारियों द्वारा भ्रमण के दौरान गांव को प्रत्येक बिंदु पर अंक देने की की योजना बनाई गई है। जिस गांव को 100 में 75 अंक मिल जाएंगे। उस गांव को कुपोषण मुक्त माना जाएगा। कुपोषण मुक्त करने की शर्त होगी कि गांव को खुले में शौच से मुक्त किया जाए। इस संबंध में जिला कार्यक्रम अधिकारी ने बताया कि शीघ्र ही प्रशासन स्तर पर बैठक करके नई गाइड लाइन के अनुसार कार्य करने के निर्देश जारी किए जाएंगे।

कुपोषण मुक्त गांव के लिए खुले में शौच मुक्त होना जरूरी

कुपोषण की रोकथाम और मातृ बाल कुपोषण शिशु मृत्यु दर रोकने के लिए राज्य पोषण मिशन के द्वारा अभियान चलाया जा रहा है। इस संबंध में शासनादेश जारी किया गया है। शासनादेश के अनुसार जिला स्तरीय अधिकारी 2 - 2 राजस्व गांव को गोद लेंगे। जिन की निगरानी में इन गांवों की गर्भवती महिलाओं की देखभाल, उनकी एनीमिया से बचाने, स्वच्छता, शिक्षा, आजीविका मिशन के साथ खुले में शौच मुक्त कराने के कार्य की निगरानी करनी है। जिसके लिए प्रत्येक विभाग को अलग अलग जिम्मेदारियां दी गई हैं।

विभिन्न विभागों को दी गई अलग-अलग जिम्मेदारियां

स्वास्थ्य विभाग को गर्भवती व बच्चों के स्वास्थ्य का परीक्षण और टीकाकरण आदि के कार्य की जिम्मेदारी दी गई है। भ्रमण के दौरान अधिकारी गर्भवती महिलाओं के एमसीटीएस रजिस्ट्रेशन और प्रसव पूर्व मासिक जांच के साथ विभिन्न स्तरों पर अपनी रिपोर्ट तैयार करेंगे। इसी प्रकार खाद्य विभाग को पी डी एस योजना के तहत गर्भवती महिलाओं और अति कुपोषित बच्चों को आहार और पोषण सामग्री उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी दी गई है। खाद्य विभाग को लाभ पाने वाले परिवारों की रिपोर्ट तैयार करनी है। इसी क्रम में शिक्षा विभाग को आयरन की गोलियों का साप्ताहिक सेवन करने वाली किशोरियों के साथ उनमें होने वाली अन्य प्रकार की समस्याओं से निजात की जानकारी देना। उन्हें सरकारी स्कूलों में किशोरियों के प्रतिशत की रिपोर्ट देनी पड़ेगी।

कुपोषण से मुक्त जनपद के लिए बड़े कदम

ग्राम विकास विभाग को मनरेगा योजना के तहत महिलाओं को काम दिए जाने की जिम्मेदारी दी गई है। जो महिलाएं काम कर रही हैं। उनकी रिपोर्ट देने की जिम्मेदारी ग्राम विकास को है। आईसीडीएस के अंतर्गत काम करने वाली आंगनबाड़ी कार्यकत्री आंगनवाड़ी केंद्र पर निर्धारित मात्रा में मासिक अनुपूरक पोषाहार देने की जिम्मेदारी दी गई है। लाभ पाने वाली जिम्मेदार गर्भवती महिलाओं की रिपोर्ट आईसीडीएस विभाग को देना है। पोषाहार पाने वाले 6 माह से 3 वर्ष तक के बच्चों की रिपोर्ट भी आईसीडीएस को देना है। पंचायती राज विभाग को खुले में शौच और स्वच्छ गांव बनाने की जिम्मेदारी दी गई है। जिसके तहत गांव में स्थापित प्राथमिक, उच्च प्राथमिक विद्यालयों में साफ सफाई के साथ ग्राम सभा को कुपोषण मुक्त बनाने की समीक्षा भी करेगा। इसके साथ ही विद्यालय में स्वच्छ जल की उपलब्धता भी सुनिश्चित करेगा।

100 में 75 मिलने पर समझा जाएगा कुपोषण मुक्त गांव

अलग-अलग विभागों को दी गई अलग-अलग जिम्मेदारियों के लिए सभी अधिकारियों को अंक निर्धारित किए गए हैं। यह अधिकारी गांव के भ्रमण के दौरान गांव में उपलब्ध विभिन्न मांगों को देखते हुए देंगे। जिन गांव को 100 में से 75 अंक आएंगे। उस गांव को कुपोषण मुक्त माना जाएगा। कुपोषण मुक्त गांव की शर्त होगी कि जब वह गांव खुले में शौच से मुक्त होगा। जिला कार्यक्रम अधिकारी ने बताया कि गोद लिए गांव का निरीक्षण संबंधित अधिकारी करेंगे और शासन द्वारा निर्धारित किए गए 12 बिंदुओं का निरीक्षण कर अंक देंगे। जिसे उन्हें अपनी रिपोर्ट राज्य पोषण मिशन की वेबसाइट पर देना पड़ेगा।

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