भक्तों की मनोकामना को पूर्ण करते हैं दुर्गा व कुशहरी माता

भक्तों की मनोकामना को पूर्ण करते हैं दुर्गा व कुशहरी माता
Mata Kushhari Devi

Shatrudhan Gupta | Updated: 29 Sep 2017, 10:14:08 PM (IST) Lucknow, Uttar Pradesh, India

असुरों के विनाश के लिए धरती पर प्रकट हुए मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम कि महत्वपूर्ण निशानियां जनपद के विभिन्न पुण्य स्थलों पर विद्यमान है।

जब जब होय धर्म की हानि,
बाढ़ै असुर अधम अभिमानी।।
तब तब प्रभू धर विविध शरीरा,
हरहि दयानिधि सज्जन पीरा।।

उन्नाव. असुरों के विनाश के लिए धरती पर प्रकट हुए मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम कि महत्वपूर्ण निशानियां जनपद के विभिन्न पुण्य स्थलों पर विद्यमान है। माता जानकी ने अपने वनवास काल के दौरान ने जानकी कुंड परियर में प्रवास किया था, जहां लव और कुश ने जन्म लिया था। जनपद में लव-कुश से जुड़ी तमाम मान्यताएं सबके सामने हैं, जिसमें जानकी कुंड परिसर के साथ लव व कुश के द्वारा स्थापित मां दुर्गा व कुशहरी देवी का मंदिर भक्तों पर विशेष कृपा बनाए हुए हैं। दोनों देवी मंदिरों में भक्तगण माता के दर्शन कर शांति प्राप्त करते हैं। माता का यह विग्रह भक्तों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं। दुर्गा और कुशहरी देवी के मंदिर की संरचना लगभग एक जैसी है। दोनों की बीच की दूरी लगभग 5 किलोमीटर है। इसके अलावा कुशहरी मंदिर परिसर में राधा-कृष्ण, भोले बाबा, संकट मोचन के साथ केले का पेड़ और हवन कुंड भी है।

लखनऊ कानपुर राष्ट्रीय राजमार्ग परिस्थिति दुर्गा मंदिर

लखनऊ-कानपुर राष्ट्रीय राजमार्ग पर नवाबगंज में स्थित दुर्गा माता का दरबार 12 महीने भक्तों के जयकारों से गुलजार रहता है। नवरात्रों में भक्तों की भीड़ से तिल रखने की जगह नहीं मिलती है। जनपद मुख्यालय से लगभग 20 किलोमीटर और लखनऊ से 40 किलोमीटर की दूरी पर स्थित दुर्गा मंदिर में माता के विग्रह के दर्शन के लिए आसपास के साथ राजधानी लखनऊ व कानपुर सहित विभिन्न स्थानों से लोग आते हैं मंदिर परिसर को जाने वाला रास्ता माता की चुनरी प्रसादो व अन्य सामग्रियों से पटा रहता है मंदिर का गुंबद लखनऊ कानपुर राष्ट्रीय राजमार्ग से भी दिखाई पड़ता है।

भक्तों की मनोकामना को पूर्ण करती हैं माता कुशहरी

माता कुशहरी देवी के दर्शन के लिए भक्तगण रेल से भी पहुंच सकते हैं। सबसे नजदीकी स्टेशन कुसुंबी है, जहां से भक्तगण पैदल लगभग 1 किलोमीटर की यात्रा कर माता के दरबार तक पहुंच सकते हैं। मंदिर के सामने एक विशाल सरोवर है, जिसकी मछलियों को देखने वह आटा की छोटी-छोटी गोलियां खिलाने के लिए भक्तगण लंबा इंतजार करते हैं। पूर्व में मछलियों को खिलाने के लिए भक्तगण लैया का प्रयोग करते थे, परंतु मंदिर संचालक द्वारा लैया खिलाने पर प्रतिबंधित कर दिया गया है और उन्हें 8 कच्चे आटे की गोली खिलाने की सलाह दी गई है। कच्चे आटे की गोली बनाकर आप घर से भी ले जा सकती हैं या फिर मौके पर भी आपको आटे का गोला मिल जाता है, जिसे आप मछलियों को खिला सकते हैं भक्तों के द्वारा आटा खिलाने से मछलियों का पेट पूरी तरह से भर जाता है। जिससे मछलियों के इंतजार में भक्तों को काफी देर खड़ा रहना पड़ता है। वैसे तो कुशहरी देवी मंदिर में 12 महीने भक्तों को के आने का सिलसिला बना रहता है परंतु नवरात्रों में संख्या कई गुना बढ़ जाती है मंदिर परिसर में लगातार नवरात्रों में कार्यक्रम चला करते हैं, जिसमें विगत बुधवार को सुंदरकांड के पाठ का संगीत मय प्रस्तुतीकरण किया गया। मंदिर परिसर के बाहर टीले पर संकट मोचन हनुमान भी भक्तों की मनोकामना को पूर्ण करने के लिए विराजमान हैं। नवरात्रों में लगातार मांगलिक कार्यक्रम भी चला करते हैं।

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