टिड्डा प्रकोप के महामारी से बचने के लिए किसानों को किया गया सावधान, करें यह उपाय

- राजस्थान, पंजाब, हरियाणा के बाद उत्तर प्रदेश में टिड्डा का प्रकोप को देखते हुए किसानों को किया गया अलर्ट

By: Narendra Awasthi

Updated: 24 May 2020, 12:03 PM IST

उन्नाव. पाकिस्तानी टिड्डा का प्रकोप राजस्थान, पंजाब, हरियाणा के बाद अब उत्तर प्रदेश के जनपदों में भी पहुंच गया है। इस संबंध में जिला कृषि रक्षा अधिकारी अधिकारी ने किसानों को सचेत करते हुए कहा है कि टिड्डा का प्रकोप महामारी का रूप ले लेता है। इसलिए टिड्डी दल के आक्रमण की निगरानी निरंतर करते रहें और एक साथ इकट्ठा होकर टीन के डब्बे व थालियों को बजाएं। फायर ब्रिगेड की भी मदद ली जा रही है। खाली पड़े खेत को जुतवा कर उसमें पानी भर दे। लगातार निगरानी की आवश्यकता है। जिला कृषि रक्षा अधिकारी की तरफ से यह सूचना ग्राम प्रधान, लेखपाल, कृषि विभाग के प्राविधिक सहायक ग्राम पंचायत अधिकारी तत्काल पहुंचाए जाने की मांग की गई है।

 

कृषि रक्षा अधिकारी के अनुसार

कृषि रक्षा अधिकारी के अनुसार चिड़ियों के प्रकोप से बचने के लिए ग्रामीणों को एक साथ इकट्ठा होकर टीन के डिब्बे व थाली बजाने के साथ शोर मचाने की सलाह दी गई है। शोर के डर से टिड्डी दल आसपास के खेतों में आक्रमण नहीं कर पाएगा। उन्होंने बताया कि गर्मी के मौसम एवं बलुई मिट्टी के प्रजनन में अण्डे देने हेतु सर्वाधिक अनुकूल होता है। अतः टिड्डी दल के आक्रमण से सम्भावित ऐसी मिट्टी वाले क्षेत्रों में जुताई करवा दें एवं जल भराव करा दें। ऐसी दशा में टिड्डी के विकास की सम्भावना कम हो जाती है।

अग्निशमन विभाग की मदद की संभावना

सूत्रों से पता चला है कि पंजाब में टिड्डी दल के नियंत्रण हेतु अग्निशमन फायर ब्रिगेड विभाग की भी सहायता ली गयी थी। अतः टिड्डी दल के नियंत्रण हेतु प्रशासन के माध्यम से अग्निशमन विभाग की भी सहायता ली जा सकती है। टिड्डी दल के न्यूनतम, मध्यम प्रकोप की दशा में कृषक क्लोरेपाइरीफाॅस 20%EC का तीब्र छिड़काव करे। टिड्डी दल के नियंत्रण हेतु रसायन मैलाथियान 96% ULV का अत्यन्त प्रभावी होता है। परन्तु इस रसायन की जन सामान्य को उपलब्धता न होने के कारण कृषक स्तर से इसका छिड़काव नही किया जा सकता। यह रसायन टिड्डा नियंत्रण से सम्बधित सरकारी तन्त्र को ही उपलब्ध हो सकता है। इस लिए टिड्डी दल के आक्रमण की दशा में लोकस्ट कण्ट्रोल आर्गेनाइजेशन फरीदाबाद एवं क्षेत्रीय केन्द्रीय एकीकृत नाशीजीव प्रबन्धन केन्द्र, लखनऊ को फोन नं. 0522 - 2732063 पर सूचित करे। जिससे प्रशिक्षित व्यक्तियों एवं समुचित यंत्रों के माध्यम से नियंत्रण कराया जा सके।

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