scriptGadadhari Bhima establish Shivling, named Bhimeshwar | यहां पर पांडवों ने अपना अज्ञातवास बिताया था, गदाधारी भीम ने शिवलिंग की स्थापना की थी, नाम पड़ा भीमेश्वर | Patrika News

यहां पर पांडवों ने अपना अज्ञातवास बिताया था, गदाधारी भीम ने शिवलिंग की स्थापना की थी, नाम पड़ा भीमेश्वर

द्वापर युग में पांडव अपने अज्ञातवास का समय यहां बिताया था। पूजा अर्चना के लिए गदाधारी भीम ने यहां शिवलिंग की स्थापना की थी। यही कारण था कि शिवलिंग भीमेश्वर नाम से विख्यात हुआ। इसकी ख्याति सुनकर औरंगजेब ने सैनिकों को शिवलिंग निकालने का आदेश दिया। इस दौरान पहली बार दूध, दूसरी बार में खून निकला। फिर भी मुगल शासक नहीं माने तो तीसरी बार में भंवरों ने मुगल सेना पर आक्रमण कर दिया। जिसके बाद शिवलिंग भंवरेश्वर नाम से प्रसिद्ध हुआ।

उन्नाव

Published: July 24, 2022 09:09:36 pm

भीमेश्वर महादेव की महिमा अपरंपार है। जिसकी ख्याति सुनकर औरंगजेब ने अपने सैनिकों से शिवलिंग को बाहर निकालने का आदेश दिया। इस दौरान सबसे पहले दूध निकला। लेकिन भोले का संकेत मुगल शासक समझ नहीं पाया और शिवलिंग को निकालने का प्रयास जारी रखा। दूसरी बार में मौके से खून निकला, फिर भी खुदाई जारी रही। तीसरी बार भीमेश्वर शिवलिंग के पास से भंवरे निकलने लगे और मुगल सैनिकों पर हमला बोल दिया। भंवरों के हमला बोलते ही मुगल सैनिक मौके से भाग निकले। यहीं से भीमेश्वर का नाम भवरेश्वर पड़ गया। जिसकी ख्याति लखनऊ उन्नाव रायबरेली सहित अन्य जिलों में है। सई नदी के किनारे स्थित भंवरेश्वर महादेव पर तीनों ही जिले के भक्त अपना दावा ठोकते हैं। फिलहाल भोले अपने भक्तों की मनोकामना पूरी करते हैं।

यहां पर पांडवों ने अपना अज्ञातवास बिताया था, गदाधारी भीम ने शिवलिंग की स्थापना की थी, नाम पड़ा भीमेश्वर

हिलौली विकासखंड के गांव बरेंदा में स्थित भीमेश्वर महादेव के दर्शन करने के लिए बड़ी संख्या में भक्तगण आते हैं। भीमेश्वर या भंवरेश्वर मंदिर के सामने पिछले कई दशकों से पूजा सामग्री की दुकान चलाने वाले रमेश गोस्वामी ने बताया कि यहां पर 12 महीने भक्तों की भीड़ उमड़ती है। सावन और शिवरात्रि के अवसर पर तिल रखने की जगह नहीं होती है। मंदिर परिसर के तरफ सई नदी बहती है। जबकि विशाल प्रांगण में भोले बाबा विराजमान है। भंवरेश्वर महादेव के आसपास का क्षेत्र भी आनंदमय है। इस संबंध में बातचीत करने पर रामबाबू अवस्थी ने बताया कि यहां पर लखनऊ, रायबरेली, उन्नाव से बड़ी संख्या में भक्तगण जलाभिषेक के लिए आते हैं। लखनऊ से मंत्रियों का भी आना जाना लगा रहता है

कैसे पहुंचे भंवरेश्वर महादेव के दर्शन के लिए

भावेश्वर महादेव का शिवालय सड़क मार्ग से जुड़ा है। लखनऊ - कानपुर राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित भल्ला फार्म से कांथा, असोहा, कालूखेड़ा होते हुए भंवरेश्वर के दर्शन के लिए जाया जा सकता है। उन्नाव से भंवरेश्वर महादेव की दूरी लगभग 62 किलोमीटर है। लखनऊ से आने वाले भक्त मोहनलालगंज, कालूखेड़ा होते हुए भंवरेश्वर आ सकते हैं। यह दूरी मात्र 42 किलोमीटर है। शिवालय रायबरेली जनपद से भी जुड़ा है। गंगागंज, हरचंदपुर, बछरावां होते हुए बाबा के दरबार में पहुंचा जा सकता है।

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गदाधारी भीम द्वारा स्थापित है शिवलिंग

भीमेश्वर महादेव का शिवलिंग महाभारत कालीन है। जिन्हें गदाधारी भीम ने मां कुंती के पूजा अर्चना के लिए स्थापित किया था। रमेश गोस्वामी ने बताया कि द्वापर युग के दौरान पांडव अज्ञातवास में थे। अज्ञातवास के दौरान उनका यहां आना हुआ। सई नदी के किनारे रमणीक स्थल पर पांडवों ने अज्ञातवास बिताया। इस दौरान मां कुंती की पूजा अर्चना के लिए उन्होंने शिवलिंग की स्थापना की। जिन्होंने रोजाना शिव जी की पूजा की प्रतिज्ञा ली थी।

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